औरैया28जुलाई*सुपोषण का पैगाम लेकर घर-घर पहुंच जागरूक कर रही सुमन*
*आठ किशोरियों व सात गर्भवतियों को किया एनीमिया मुक्त*
*औरैया 28 जुलाई 2022-* दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा और पक्का इरादा हो तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। अछल्दा ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय में संचालित केंद्रआंगनवाड़ी केंद्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुमन चतुर्वेदी इसकी बानगी हैं। कुपोषण के खिलाफ छिड़ी जंग को जीतने के उनके जज्बे का ही नतीजा रहा कि 5 कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाकर उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेरने में वह कामयाब रहीं। साथ ही जुलाई माह में चले संभव अभियान में गांव की 8 किशोरियों व 7 गर्भवतियों को एनीमिया की जद में आने से बचाकर रखा है। साथ ही पिछले वर्ष कोरोना काल में लोगों को सुरक्षित बनाने को लेकर जागरूकता की उन्होंने अलख भी जगाई, जिसकी आज हर ओर तारीफ हो रही है।
1 मार्च वर्ष 2005 को सुमन आंगनवाड़ी पद पर तैनात हुई थीं। घर-घर जाकर महिलाओं को उनके बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना शुरू कर दिया। 3 से 6 वर्ष तक के सभी बच्चों को आंगनवाड़ी भेजने के लिए प्रेरित किया। इस साल यहां 106 बच्चे पंजीकृत हैं। शून्य से 6 माह के 11 , 6 माह से 3 साल तक के 55 और 3 वर्ष से 5 साल तक के 40 बच्चे शामिल हैं। 17 महिलाएं गर्भवती हैं। लगातार पौष्टिक आहार, नियमित टीकाकरण और समय-समय पर वजन व जांच से चार में से दो सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं। केंद्र पर महिलाओं को बुलाकर पोषण व आयोडीनयुक्त भोजन के बारे में बताती हैं। बच्चों को साफ-सफाई रखने के साथ खुद भी भोजन बनाने या खाने से पहले हाथ धोने के तरीके सिखा रही हैं। मिट्टी की गोलियां बनाकर बच्चों को आकृति और संख्या का ज्ञान करा रही हैं। गांव में 11 से 17 साल तक की 35 किशोरियां हैं। किशोरियों व उनके अभिभावकों में आयरन की गोलियों को लेकर भ्रांतियां थीं। अपने निरंतर प्रयास से इसको दूर किया। घरों व स्कूलों में जाकर किशोरियों में एनीमिया (खून की कमी) से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया। अब किशोरियां आयरन की टेबलेट ले रही हैं। सुमन का कहना है कि गांव में किसी भी किशोरी में खून की कमी नहीं है।
*वजन दिवस पर बच्चों को लाते हैं अभिभावक*
सुमन ने बताया कि उन्होंने शुरूआत में जब गांव का सर्वे किया तो पाया कि लोग सरकार द्वारा चलाई जा रही आंगनवाड़ी योजना के बारे में कुछ खास नहीं जानते। उन्हें सिर्फ इतना पता है कि यह पंजीरी बांटने की योजना है। सुमन ने लोगों को आईसीडीएस विभाग के बारे में बताया। इमसे चल रहे कार्यक्रम और गतिविधियों की जानकारी दी। उनका कहना है कि अब वजन दिवस पर लोग खुद बच्चे को लेकर आने लगे हैं। बच्चों के वजन और श्रेणी में बदलाव के बारे में जानने के लिए उत्सुकता दिखाते हैं।
*कोरोना काल में ग्रामीणों को किया जागरूक*
वैश्विक महामारी के दौर में दिल्ली से लौटे दो ग्रामीण जांच में कोरोना पाजिटिव पाए गए। सुमन ने बताया कि उन्हें मेडिकल कालेज में भर्ती करवाया। इसके बाद ग्रामीणों को कोरोना के प्रति जागरूक करने के लिए घर-घर अभियान चलाया। बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों को खास सतर्कता बरतने की नसीहत दी। उन्हें साबुन से बार-बार हाथ धोने, मास्क पहनने व उचित दूरी बनाए रखने के बारे में जागरूक किया। इसका नतीजा रहा कि दो केस के बाद गांव में फिर कोई केस नहीं मिला।
*यह भी हैं उपलब्धियां*
जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद अवस्थी बताते हैं कि वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश समाज रत्न सम्मान प्राप्त हुआ । वर्ष 2016 से वर्ष 2019 तक स्वच्छ भारत मिशन में भी वोलेंटियर के रूप में काम करके पहली पंचायत जलालपुर फफूंद पर ओडीएफ करवाई जिसके लिये पूरे उत्तर प्रदेश में 12 महिला चैंपियन में औरैया जनपद से इन्हें चुना गया और सम्मानित भी किया गया। कोविड काल में स्वयं मास्क सिलकर आगनवाड़ी केंद्रों पर जाकर बच्चों को मास्क निशुल्क वितरण किए। गांव में काढ़ा बनाकर बांटा। कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चो को लगभग 10 बच्चो को बाल सेवा योजना के अंतर्गत लाभान्वित भी करवाया।

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