दिबियापुर (औरैया) 20 अप्रैल 24*
कस्बे के निकट ग्राम उमरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिन रविवार २० अप्रैल को आचार्य धनंजय मिश्र ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार पूर्वक वर्णन करते हुए श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया उन्होंने बताया भगवान श्री कृष्णा जब छोटे थे तब गोपियों के घरों से माखन चुराकर खाया करते थे। इस लीला में उन्हें कान्हा, माधव, मोहन, यशोदा के लाल आदि नामों से जाना जाता है।एक बार, कृष्ण ने गोपियों के कपड़े पेड़ से उतार लिए जब वे नदी में स्नान कर रही थीं। इस लीला में कृष्ण ने गोपियों के प्रेम को प्रकट किया और उन्हें अपनी दिव्य स्वरूप का दर्शन दिया। यशोदा माता के घर, गोकुल में, कृष्ण की बाल लीलाएं काफी प्रसिद्ध हैं। वे गोपाल के रूप में अपने साथी गोप बच्चों के साथ खेलते थे। आचार्य धनंजय मिश्र ने बताया कि कृष्ण की लीलाओं में सबसे प्रमुख लीला कालिया सर्प की है जिसमें कृष्ण ने कालिया नामक एक अत्यंत विषधारी नाग को पराजित किया। इस लीला में कृष्ण ने कालिया नाग के फन पर यमुना नदी में नृत्य किया और फिर कालिया नाग को मार कर नदी से उसे बाहर निकाला।
कृष्ण ने गोकुल के लोगों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। और इंद्र के अहंकार को नष्ट किया इस लीला में कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति का प्रदर्शन किया और गोवर्धन पर्वत को उठाकर गोपों को आश्रय दिया। कृष्ण ने गोपियों के साथ वृंदावन के वनों में रास नाच किया और अपनी अनंत प्रेम और लीलाओं का आनंद उनके साथ साझा किया।
परीक्षित श्रीमती चंद्र प्रभा त्रिपाठी और बृज किशोर त्रिपाठी के साथ रजनीकांत त्रिपाठी (बड़े), देवकांत त्रिपाठी (छोटे) मनोज त्रिपाठी अमित त्रिपाठी और इंजीनियर आशीष त्रिपाठी ने सजीव झांकिया का प्रदर्शन भी कथा पंडाल में करवाया जिनके कलाकारों को देखकर भगवत प्रेमी खासे उत्साहित नजर आए|रिपोर्टर सत्य प्रकाश बाजपेई
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