October 6, 2026

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हरिद्वार 5 अक्टूबर 26*कुम्भ महोत्सव 2027: हरिद्वार में धर्मध्वजारोहण और तीन मुख्य अमृत स्नान पर्वों की तिथियां घोषित,

हरिद्वार 5 अक्टूबर 26*कुम्भ महोत्सव 2027: हरिद्वार में धर्मध्वजारोहण और तीन मुख्य अमृत स्नान पर्वों की तिथियां घोषित,

हरिद्वार 5 अक्टूबर 26*कुम्भ महोत्सव 2027: हरिद्वार में धर्मध्वजारोहण और तीन मुख्य अमृत स्नान पर्वों की तिथियां घोषित,

धर्मनगरी में तैयारियाँ तेज

​विशेष संवाददाता: कालूराम जयपुरिया, यूपीआजतक, हरिद्वार

​हरिद्वार 5 अक्टूबर 26*कुम्भ महोत्सव 2027: हरिद्वार में धर्मध्वजारोहण और तीन मुख्य अमृत स्नान पर्वों की तिथियां घोषित,

हरिद्वार*तीर्थनगरी हरिद्वार में सनातन संस्कृति के सबसे बड़े समागम ‘कुम्भ महोत्सव 2027’ की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। अखाड़ा परिषदों और संतों की अगुवाई में इस महामहोत्सव के औपचारिक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा एवं प्रमुख स्नान तिथियों का ऐलान कर दिया गया है। पतित पावनी मां गंगा के पावन तट पर आयोजित होने वाले इस दिव्य और भव्य आयोजन को लेकर संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय प्रशासन में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

​हरिद्वार के विभिन्न अखाड़ों, आश्रमों और तीर्थ क्षेत्रों में अभी से धर्म के इस विशाल पर्व को लेकर चिंतन-मंथन का दौर शुरू हो चुका है। मां गंगा की गोद में लगने वाले इस महाकुम्भ में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं और साधु-संतों के पहुंचने का अनुमान है।

​धर्मध्वजारोहण के साथ होगा महाकुम्भ का श्रीगणेश

​कुम्भ महोत्सव 2027 का औपचारिक शुभारंभ विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धर्मध्वजारोहण के साथ किया जाएगा।

  • ​तिथि व दिन: 25 फरवरी 2027 ई०, गुरुवार (फाल्गुन कृष्ण पंचमी)

  • ​शुभ मुहूर्त: प्रातः 9:30 बजे

​सनातन परंपरा में धर्मध्वजा का रोपण कुम्भ महापर्व के विधिवत आरंभ का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सभी तेरह अखाड़ों के संत, महामंडलेश्वर, नागा संन्यासी और धर्माचार्य विशेष पूजा-अर्चना कर धर्मध्वजा को स्थापित करेंगे, जिसके बाद पूरा हरिद्वार कुम्भ के दिव्य रंग में रंग जाएगा।

​शोभायात्रा (छावनी प्रवेश): संतों का भव्य नगर आगमन

​धर्मध्वजा स्थापित होने के उपरांत अखाड़ों का अपनी-अपनी छावनियों में विधिवत प्रवेश होगा, जिसे शोभायात्रा (छावनी प्रवेश) कहा जाता है।

  • ​तिथि व दिन: 28 फरवरी 2027 ई०, रविवार (फाल्गुन कृष्ण अष्टमी)

​इस दिन विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत, महामंडलेश्वर और नागा संन्यासी भव्य जुलूस व शोभायात्रा निकालते हुए अपनी-अपनी कुम्भ छावनियों में प्रवेश करेंगे। हाथी, घोड़े, ऊंट, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और अस्त्र-शस्त्र कौशल के प्रदर्शन के साथ निकलने वाली यह शोभायात्रा हरिद्वार वासियों और श्रद्धालुओं के लिए अलौकिक आकर्षण का केंद्र बनेगी।

​प्रमुख तीन अमृत स्नान पर्वों का विस्तृत विवरण

​कुम्भ महोत्सव 2027 के तहत गंगा तट पर आयोजित होने वाले तीन प्रमुख ‘अमृत स्नान’ (शाही स्नान) पर्वों की तिथियां इस प्रकार निर्धारित की गई हैं:

​1. प्रथम अमृत स्नान पर्व – महाशिवरात्रि

  • ​तिथि व दिन: 06 मार्च 2027 ई०, शनिवार

  • ​पंचांग विवरण: फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी (चतुर्दशी)

  • ​धार्मिक महत्व: भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा महापर्व महाशिवरात्रि कुम्भ के प्रथम अमृत स्नान का साक्षी बनेगा। भगवान आशुतोष के प्रिय दिन पर गंगाजल में डुबकी लगाने के लिए शैव, वैष्णव और उदासीन संप्रदाय के संतों के साथ लाखों श्रद्धालु हर की पौड़ी पर ब्रह्म मुहूर्त से ही जुटेंगे।

​2. द्वितीय अमृत स्नान पर्व – चैत्र अमावस

  • ​तिथि व दिन: 06 अप्रैल 2027 ई०, मंगलवार

  • ​पंचांग विवरण: चैत्र कृष्ण अमावस्या

  • ​धार्मिक महत्व: हिंदू धर्म में चैत्र मास की अमावस्या पितृ तर्पण, दान-पुण्य और पवित्र नदी स्नान के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। मंगलवार को पड़ने वाली इस अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का विशेष योग बनेगा, जिसमें गंगा स्नान से अनंत गुना पुण्य प्राप्त होता है।

​3. तृतीय अमृत स्नान पर्व – मेष संक्रांति (बैसाखी)

  • ​तिथि व दिन: 14 अप्रैल 2027 ई०, बुधवार

  • ​पंचांग विवरण: मेष संक्रान्ति, चैत्र शुक्ल अष्टमी

  • ​धार्मिक महत्व: ज्योतिषीय दृष्टि से जब सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब हरिद्वार में कुम्भ का मुख्य योग बनता है। मेष संक्रांति और चैत्र शुक्ल अष्टमी (दुर्गाष्टमी) के पावन संगम पर यह तीसरा और सबसे बड़ा अमृत स्नान संपन्न होगा। इस दिन देश-दुनिया से संतों और भक्तों का सबसे विशाल जनसैलाब हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड पर पुण्य अर्जित करने पहुंचेगा।

​हरिद्वार 5 अक्टूबर 26*कुम्भ महोत्सव 2027: हरिद्वार में धर्मध्वजारोहण और तीन मुख्य अमृत स्नान पर्वों की तिथियां घोषित,

प्रशासन और संतों में उत्साह, सुरक्षा व व्यवस्था की तैयारी

​तिथियों की घोषणा के साथ ही उत्तराखंड शासन और हरिद्वार जिला प्रशासन ने आधारभूत ढांचे के विकास, घाटों के विस्तार, पार्किंग, सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कार्ययोजना पर काम तेज कर दिया है। कुम्भ मेला क्षेत्र को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए विशेष तकनीकी प्रबंध और निगरानी तंत्र तैयार किए जा रहे हैं।

​कुम्भ सिर्फ एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विविधता और सनातन एकता का महासंगम है। वर्ष 2027 में होने वाला यह महोत्सव हरिद्वार की धरती पर अध्यात्म, भक्ति और श्रद्धा का एक नया इतिहास रचेगा।

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