September 14, 2026

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कौशाम्बी31जुलाई26*मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर भवंस मेहता महाविद्यालय में आयोजित हुआ कार्यक्रम*

कौशाम्बी31जुलाई26*मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर भवंस मेहता महाविद्यालय में आयोजित हुआ कार्यक्रम*

कौशाम्बी31जुलाई26*मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर भवंस मेहता महाविद्यालय में आयोजित हुआ कार्यक्रम*

*प्रेमचंद के कथा साहित्य में तत्कालीन भारत का सामाजिक और आर्थिक इतिहास*

*भरवारी कौशांबी* भवन्स मेहता महाविद्यालय,भरवारी में दिनांक 31 जुलाई 2026 को मुंशी प्रेमचंद की जयंती हिंदी विभाग, भवन्स मेहता महाविद्यालय द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुंशी प्रेमचंद के कृतित्व और व्यक्तित्व पर व्याख्यान आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य ने किया। इस कार्यक्रम को सर्वप्रथम इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद आदिल ने सम्बोधित करते हुए शेख सादी शीराजी और मुंशी प्रेमचंद के लेखों पर अपना मौलिक वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा की जिस प्रकार मुंशी प्रेमचंद ने सादी को महात्मा सम्बोधित किया उसी प्रकार मुंशी प्रेमचंद भी साहित्य के महात्मा थे।उन्होंने आगे बोलते हुए बच्चों को उनकी कहानियों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके उपरान्त हिंदी विभाग के प्राध्यापक मशहूर कहानीकार डॉ. सी. पी. श्रीवास्तव ने सम्बोधित करते हुए कहा कि कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के रचना संसार में उत्तर भारत का तत्कालीन समाज प्रतिध्वनित होता है,आगे बोलते हुए उन्होंने उनके कथा साहित्य में आये हुए विभिन्न समस्याओ को उल्लेख किया उन्होंने बताया की मुंशी प्रेमचंद की रचनाधर्मिता उन्हें माँ भारती का सच्चा सपूत घोषित करती है। इसके उपरान्त इस कार्यक्रम को हिंदी विभाग के अध्यक्ष, कवि और आलोचक प्रोफेसर विवेक कुमार त्रिपाठी निराला जी ने सम्बोधित किया उन्होंने प्रेमचंद की रचनाधार्मिता पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा की यदि आपको प्रेमचंद के कथा साहित्य को पढ़ लिया जाए तो उनके समय का सामाजिक आर्थिक इतिहास आसानी से लिखा जा सकता है, उन्होंने मुंशी प्रेमचंद को कबीर की परंपरा का लेखक कहा साथ ही साथ उन्होंने प्रेमचंद की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए ये कहा की यदि उनकी मृत्यु के अस्सी साल के बाद भी प्रेमचंद के गाँव जस के तस हैं तो ये कष्ट का विषय है ना की गर्व का। उन्होंने प्रेमचंद के उपन्यास रंगभूमि ‘का जिक्र करते हुए कहा की प्रेमचंद ने इस उपन्यास के माध्यम से नायकत्व की परम्परा को बदल कर रख दिया और साथ ही साथ उन्होंने सूरदास के संघर्ष को मौजूदा समय के लिए एक मिसाल के तौर पर प्रस्तुत किया। इसके उपरान्त कार्यक्रम को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रबोध श्रीवास्तव ने सम्बोधित करते हुए कहा की प्रेमचंद का कथा साहित्य अपने आप में पूरा एक जीवन है उसको पढ़कर आप मानवीयता,संघर्ष और कर्म का अपने जीवन में उतार सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. धर्मेन्द्र कुमार अग्रहरि ने किया उन्होंने बताया की प्रेमचंद जीवन भर औपनिवेशिकता विरोधी लेखन कार्य करते रहे अपितु सरकार विरोधी गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। इस अवसर पर डॉ.राहुल राय,डॉ.दीपक आदि लोग उपस्थित रहे।

 

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