May 13, 2026

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कानपुर नगर 13मई26*तत्काल लाईन हाज़िर की कार्यवाही से अपराध और शहर के अपराधियों में मौज*

कानपुर नगर 13मई26*तत्काल लाईन हाज़िर की कार्यवाही से अपराध और शहर के अपराधियों में मौज*

*Big Breaking News kanpur*

कानपुर नगर 13मई26*तत्काल लाईन हाज़िर की कार्यवाही से अपराध और शहर के अपराधियों में मौज*

 

कानपुर नगर*एक बार फिर बल्कि हर बार बिना जांच के उच्च अधिकारियों द्वारा की जा रही चौकी थानों के उप निरीक्षको पर तत्काल लाईन हाज़िर की कार्यवाही से अपराध और शहर के अपराधियों में मौज*

*एनटीए पुतला दहन विवाद में पुलिस पर कार्रवाई से उठा बड़ा सवाल, क्या अब कानून व्यवस्था संभालना भी “जोखिम” बन गया है?*

*थाना काकादेव क्षेत्र में एनटीए के विरोध में एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन और पुतला दहन का मामला पुलिस कार्रवाई बनाम राजनीतिक दबाव की बहस में बदल गया*।

*आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान क्षेत्रीय पुलिस ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर पुतला दहन रोकने का प्रयास किया, लेकिन उग्र कार्यकर्ताओं ने आदेशों की अनदेखी करते हुए जबरन पुतला फूंक दिया। इस दौरान मौके पर मौजूद उप निरीक्षकों ने कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने और संभावित हादसे से बचाने का प्रयास किया, जिसमें उप निरीक्षक खुद घायल भी हो गए*।

*पुलिस सूत्रों के मुताबिक जिस कार्यकर्ता के साथ अभद्रता के आरोप लगाए गए, उसे गिरने से बचाने की कोशिश की गई थी, लेकिन बाद में पूरे घटनाक्रम को पुलिस के खिलाफ मोड़ दिया गया।*

*हैरानी की बात यह भी रही कि जिस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया गया, वहां मौके पर कोई नीट परीक्षार्थी मौजूद नहीं था, बावजूद इसके संगठन के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन पुतला फूंकने की घटना के बाद दोनों उप निरीक्षकों पर ही सवाल उठने लगे और उन्हें लाइन हाजिर किए जाने की चर्चा ने पुलिस महकमे में खासतौर पर पुलिस कर्मियों में बेचैनी बढ़ा दी।*

*अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि कानून व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस हर बार कार्रवाई का शिकार होगी, तो क्या भविष्य में कोई पुलिसकर्मी अराजक तत्वों पर सख्ती दिखाने का साहस करेगा?*

*पूरा मामला अब जांच के दायरे में है और उच्च अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी*।

*लेकिन पुलिस विभाग के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि लगातार होने वाली ऐसी कार्रवाइयों से थानों और चौकियों में तैनात पुलिसकर्मी अपराधियों और उग्र प्रदर्शनकारियों पर हाथ डालने से बचने लगे हैं। शहर में बढ़ती प्रदर्शन राजनीति के बीच यह प्रकरण पुलिस मनोबल और प्रशासनिक निर्णयों पर बड़ा सवाल खड़ा करता जा रहा है*।