August 5, 2026

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उन्नाव4अगस्त26*त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं में ब्रह्मा-विष्णु-महेश का दिव्य संदेश, शिवभक्ति के गूढ़ रहस्य से अभिभूत हुए श्रद्धालु।

उन्नाव4अगस्त26*त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं में ब्रह्मा-विष्णु-महेश का दिव्य संदेश, शिवभक्ति के गूढ़ रहस्य से अभिभूत हुए श्रद्धालु।

उन्नाव4अगस्त26*त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं में ब्रह्मा-विष्णु-महेश का दिव्य संदेश, शिवभक्ति के गूढ़ रहस्य से अभिभूत हुए श्रद्धालु।

शिव महापुराण कथा में लोकविख्यात कथा प्रवक्ता शैवाचार्य प्रशांत प्रभु महाराज ने सुनाई त्रिपुण्ड की महिमा काल भैरव, काशी, गंगा और शिवलिंग के आध्यात्मिक प्रसंगों ने बांधा श्रद्धालुओं को।

उन्नाव। मगरवारा स्थित श्री गोकुल बाबा मंदिर प्रांगण में श्री आदि गुरु वैदिक सेवा सनातन ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रही विशाल श्री शिव महापुराण कथा में भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। लोकविख्यात कथा प्रवक्ता शैवाचार्य श्री प्रशांत प्रभु महाराज के श्रीमुख से जब त्रिपुण्ड धारण की महिमा का प्रसंग प्रारंभ हुआ तो कथा पंडाल श्रद्धा और शिवभक्ति के भाव से सराबोर हो उठा। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा का श्रवण करते रहे और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंजायमान हो उठा। शैवाचार्य श्री प्रशांत प्रभु महाराज ने त्रिपुण्ड की आध्यात्मिक महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान शिव के भक्त के मस्तक पर सुशोभित तीन रेखाएं केवल भस्म की रेखाएं नहीं, बल्कि शिवतत्व, वैराग्य, साधना और सनातन आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक हैं। स्नान एवं शुद्धि के पश्चात विधिपूर्वक भस्म धारण कर भगवान शिव का स्मरण और पूजन करने की परंपरा का उन्होंने विशेष महत्व बताया। कथा में त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं से जुड़े आध्यात्मिक भाव को स्पष्ट करते हुए बताया गया कि इन तीन रेखाओं में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूप का स्मरण किया जाता है। पहली रेखा ब्रह्मा, दूसरी विष्णु और तीसरी भगवान शिव के आध्यात्मिक स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है। महाराज जी ने कहा कि शिवभक्त के लिए त्रिपुण्ड श्रद्धा, साधना और शिव आराधना की भावना को निरंतर जागृत रखने वाला पवित्र प्रतीक है।उन्होंने भस्म की महिमा बताते हुए कहा कि भस्म मनुष्य को जीवन की नश्वरता का बोध कराते हुए अहंकार का त्याग, वैराग्य और आत्मचिंतन का संदेश देती है। कथा में बेल से संबंधित भस्म की पवित्रता का भी वर्णन किया गया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि सच्ची शिवभक्ति केवल बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता, सदाचार और भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण का नाम है।कथा के दौरान नारायण नाम की महिमा, गंगा की उत्पत्ति, केनकी पुण्य कथा और शिवलिंग की महिमा से जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। कथा प्रवक्ता ने इन प्रसंगों के माध्यम से सनातन परंपरा में भगवान के नाम, गंगा, तीर्थ और शिवलिंग के महत्व को सरल एवं भावपूर्ण ढंग से समझाया।इसके बाद काल भैरव की उत्पत्ति, काशी की महिमा और काल भैरव के दिव्य स्वरूप का प्रसंग आया तो कथा पंडाल पुनः भक्तिभाव से भर उठा। काशी और काल भैरव से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान शिव की नगरी काशी तथा शिवतत्व की व्यापक आध्यात्मिक महिमा से परिचित कराया गया। कथा के दौरान वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा संगम रहा कि श्रद्धालु कथा के प्रत्येक प्रसंग को एकाग्रचित्त होकर सुनते दिखाई दिए। शैवाचार्य श्री प्रशांत प्रभु महाराज ने कहा कि शिवभक्ति का मार्ग श्रद्धा, संयम, सदाचार, सेवा और समर्पण से होकर गुजरता है। भगवान शिव का स्मरण मनुष्य को भीतर से मजबूत करता है और जीवन में धर्म एवं संस्कारों की ज्योति प्रज्वलित करता है।
यजमानों और पदाधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति कथा आयोजन में मुख्य यजमान श्रीमती वंदना सत्येंद्र सिंह एवं श्रीमती संतोष हरिप्रसाद साहू प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। वहीं कथा यजमानों में श्रीमती राधा निशीथ निगम उर्फ राजू भैया, श्रीमती सोनम धीरज सिंह एवं श्रीमती प्रिया विक्रम सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।आयोजन में मुख्य समाजसेवी रंजना मिश्रा (लखनऊ), अध्यक्ष संजय नीलम त्रिपाठी, महामंत्री अजय अवस्थी, चन्द्र प्रकाश अवस्थी, संपर्क प्रमुख डॉ. मनीष सिंह सेंगर, मीडिया प्रभारी श्याम जी गुप्ता, राहुल कश्यप, कल्लू दादा सहित समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। सदर विधायक पंकज गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी, रामलीला कमेटी आवास विकास से राकेश सिंह एडवोकेट और जी एस भदौरिया, साईं मंदिर संस्थापक सुरेंद्र वर्मा आदि ने महाराजश्री का सम्मान करते हुए आशीर्वाद लिया। प्रातःकाल वैभव लक्ष्मी महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने मनोकामना पूर्ति हेतु आहुतियां अर्पित कीं। कथा के दौरान उमड़ रही श्रद्धालुओं की आस्था से पूरा श्री गोकुल बाबा मंदिर प्रांगण शिवमय नजर आया। कथा के माध्यम से जहां श्रद्धालुओं को शिवतत्व, सनातन परंपरा, धर्म और संस्कारों का संदेश मिल रहा है, वहीं भक्ति के साथ जीवन को सदाचार और सेवा के मार्ग पर ले जाने की प्रेरणा भी दी जा रही है।अंत में जैसे ही कथा पंडाल में हर-हर महादेव का जयघोष गूंजा, श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। भक्ति और आस्था से ओतप्रोत वातावरण में शिव महापुराण कथा का यह दिव्य प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का यादगार क्षण बन गया।

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