वाराणसी10जून26*काशी में मीट-मछली की दुकानें बाहर,लेकिन नॉनवेज होटल अंदर,आखिर यह कैसा नियम?
वाराणसी से नीलिमा राय की रिपोर्ट यूपीआजतक
वाराणसी।धर्म,संस्कृति और आस्था की विश्व राजधानी कही जाने वाली काशी में नगर निगम द्वारा मीट और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की कवायद ने नई बहस को जन्म दे दिया है।इस निर्णय को जहां कुछ लोग काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं,वहीं दूसरी ओर इस नीति में दिखाई दे रहे विरोधाभास पर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि शहर की पवित्रता और धार्मिक वातावरण को बनाए रखना ही उद्देश्य है,तो फिर शहर के भीतर संचालित हो रहे नॉनवेज होटल,रेस्टोरेंट और भोजनालयों पर यह नियम लागू क्यों नहीं होगा?यदि मीट और मछली की बिक्री शहर के बाहर होगी,लेकिन उसी मीट-मछली को पकाकर और परोसकर शहर के भीतर बेचा जाएगा,तो आखिर इस पूरी कवायद का वास्तविक उद्देश्य क्या है?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल दुकानों को शहर से बाहर भेज देने से समस्या का समाधान नहीं होगा।उपभोग तो शहर के भीतर ही जारी रहेगा।ऐसे में यह निर्णय केवल दिखावटी कार्रवाई बनकर रह सकता है।लोगों का तर्क है कि यदि आस्था और धार्मिक भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है,तो नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए,न कि केवल एक वर्ग या व्यवसाय पर।
काशी करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है।यहां हर निर्णय का सीधा असर सामाजिक और धार्मिक भावनाओं पर पड़ता है।इसलिए किसी भी नीति को लागू करने से पहले संत समाज,व्यापारिक संगठनों,स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से व्यापक संवाद आवश्यक माना जाता है।बिना स्पष्ट रोडमैप के लिए गए निर्णय भविष्य में विवाद और असंतोष का कारण बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी नीति की सफलता उसकी स्पष्टता और समानता पर निर्भर करती है।यदि एक ओर मीट-मछली की दुकानें शहर से बाहर की जाएं और दूसरी ओर नॉनवेज होटल शहर के भीतर निर्बाध रूप से संचालित होते रहें,तो यह नीति अपने मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े कर देगी।
काशी की पहचान उसकी आध्यात्मिक विरासत,परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से है।ऐसे में आवश्यक है कि विकास,व्यापार और आस्था के बीच संतुलन स्थापित करते हुए ऐसी नीति बनाई जाए जो स्पष्ट,न्यायसंगत और सभी पर समान रूप से लागू हो।अन्यथा यह फैसला आने वाले दिनों में जनचर्चा और राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।
*✍️ देवेन्द्र पाण्डेय✍️*
*वाराणसी*

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