April 21, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

बांदा 21अप्रैल 26*को बनाएंगे बाल विवाह मुक्त, हर गांव मजरों पर रहेगी नजर : श्रवण कुमार*

बांदा 21अप्रैल 26*को बनाएंगे बाल विवाह मुक्त, हर गांव मजरों पर रहेगी नजर : श्रवण कुमार*

बांदा 21अप्रैल 26*को बनाएंगे बाल विवाह मुक्त, हर गांव मजरों पर रहेगी नजर : श्रवण कुमार*

“अक्षय तृतीया पर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए हुआ आयोजन”

*बांदा*- जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा व बाल विवाहों की रोकथाम के लिए काम कर रहे संगठन ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान ने अक्षय तृतीया के अवसर पर 13 अप्रैल से 20 अप्रैल तक बाल विवाहों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया व सतर्कता दिवस मनाया।
इसमें बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) व आशा यूनिटों ने भी सहयोग दिया और जिले में बाल विवाह की रोकथाम का संकल्प दोहराया। ग्रामीण परम्परा विकास संस्थान व जिला प्रशासन, पंचायतों, स्कूलों और धर्मगुरुओं के साथ मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए स्कूलों पंचायतों और गाँवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है और जिले में हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है। जिसमें लोगों को बाल विवाह होने पर पुलिस को 112 न. या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचित करने को लेकर बताया गया संगठन खास तौर से बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील अक्षय तृतीया जैसे मौकों पर प्रशासन व सरकार के सहयोग से इसकी रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाता रहा है। ग्रामीण परम्परा विकास संस्थान देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है।
जिले में अब तक बाल विवाह के खिलाफ अभियान की सफलता पर संतोष जाहिर करते हुए ग्रामीण परम्परा विकास संस्थान के सचिव श्रवण कुमार ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों की सतर्कता से अब अक्षय तृतीया के दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में खासी कमी आई है लेकिन हमें इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि चंद वर्षों पहले तक लोगों को यह भी नहीं पता था कि नाबालिग बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुमार्ना या दोनों हो सकता है। इसमें बाराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर, साज सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरेज हाल के मालिक और यहां तक कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें भी सजा व जुमार्ना हो सकता है। लेकिन जमीन पर हमारे गहन जागरूकता अभियानों से जागरूकता बढ़ी है और हालात बदले हैं। अब लोग बाल विवाहों की सूचना दे रहे हैं और प्रशासन तुरंत इसकी रोकथाम के लिए कार्रवाई कर रहा है। यह एक उल्लेखनीय बदलाव है और हमें विश्वास है कि हम 2030 से पहले ही जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन 250 से भी ज्यादा सहयोगियों के साथ बाल विवाह की ऊंची दर वाले देश के 450 से भी ज्यादा जिलों में इस अपराध के खिलाफ अभियान चला रहा है। इस नेटवर्क ने अब तक पांच लाख से ज्यादा बाल विवाह रोके हैं। इस अभियान में विनोद कुमार, सूरज भान, संतोष कुमार व समाज सेवी राम करन आदर्शी जी रहे ।

यूपीआजतक बांदा से ब्यूरो सुनैना निषाद की रिपोर्ट

Taza Khabar