नई दिल्ली 12 अप्रैल 26* UGC के सेक्रेटरी मनीष जोशी को हटाया गया
नई दिल्ली *UGC सचिव मनीष जोशी का इस्तीफा अब सिर्फ “निजी कारण” नहीं, बल्कि एक बड़े विवाद का नतीजा माना जा रहा है। ‘समता विनियम 2026’ को लेकर उठे बवाल ने आखिरकार उन्हें पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया। बताया जा रहा है कि प्रोफेसर मनीष जोशी ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बिना सरकारी मंजूरी और उच्चस्तरीय विचार-विमर्श के आधिकारिक संदेश जारी कर दिया था, जिससे सरकार असहज हो गई और मामला तेजी से विवाद में बदल गया। इस घटनाक्रम के बाद सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दोनों ने उनसे दूरी बना ली, जबकि पहले उन्हें एक भरोसेमंद और करीबी चेहरा माना जाता था। इस फैसले के खिलाफ देशभर में खासकर सामान्य वर्ग के बीच नाराजगी देखने को मिली और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। बिना व्यापक चर्चा के इतना बड़ा कदम उठाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए। इसी बीच जारी UGC के आदेश में कहा गया है कि मनीष जोशी को 25 अप्रैल से UGC की सेवाओं से मुक्त कर दिया जाएगा और वे अपने मूल संस्थान—कवयित्री बहिनाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान संकाय में वापस लौटेंगे, जहां वह 1997 से लंबे समय तक अध्यापन कर चुके हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जोशी ने 30 मार्च 2026 को ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जबकि उनकी नियुक्ति 13 फरवरी 2023 को UGC सचिव के रूप में हुई थी। विवाद भले ही अब सुर्खियों से थोड़ा दूर हो गया हो, लेकिन उसका असर इतना गहरा रहा कि एक वरिष्ठ अधिकारी को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी—और यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी कहानी है। #UGC
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