कौशाम्बी 10 मार्च 26*डायट कौशाम्बी में दो दिवसीय आई.सी.टी कार्यशाला का समापन*
*शिक्षा के क्षितिज पर तकनीक का नव-उन्मेष*
*हर्रायपुर कौशाम्बी* ऐतिहासिक एवं पौराणिक आभा से मंडित जनपद कौशाम्बी के शैक्षिक परिदृश्य में एक नवीन स्वर्णिम अध्याय का सूत्रपात हुआ है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान मंझनपुर के सभागार में आयोजित दो दिवसीय ‘सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन हुआ। यह आयोजन केवल एक तकनीकी प्रशिक्षण मात्र नहीं,अपितु परिषदीय शिक्षा को आधुनिकता और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने का एक वैचारिक अनुष्ठान सिद्ध हुआ।कुशल नेतृत्व और प्रखर मार्गदर्शन का संगम देखने को मिला
ज्ञान के इस महाकुंभ का आयोजन डायट प्राचार्या सुश्री निधि शुक्ला के निर्देशन में संपन्न हुआ। उनके विज़न ने जनपद के शिक्षकों को तकनीक के प्रति सजग करने में आधारस्तंभ की भूमिका निभाई। कार्यक्रम को अपनी बौद्धिक प्रखरता से डायट प्रवक्ता रसायनविद डॉ. नरेंद्र ने सीचा जिनके सूक्ष्म मार्गदर्शन ने कार्यशाला के प्रत्येक सत्र को परिणामोन्मुखी बनाया।स्टेट रिसोर्स ग्रुप के स्तंभ डॉ.ओमप्रकाश सिंह के संदर्भन और सक्रिय सहभागिता ने इस कार्यशाला को एक नई ऊँचाई प्रदान की। डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने अपनी विशिष्ट कार्यशैली और तकनीकी दक्षता से प्रतिभागियों के मध्य शिक्षण में तकनीक के समन्वय’ की एक नई चेतना जागृत की। उन्होंने कहा कि परिवर्तन ही शैक्षणिक प्रगति का आधार है
कार्यशाला के एसआरजी डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए अत्यंत गूढ़ और दार्शनिक विचार साझा किए। उन्होंने रेखांकित किया कि आज का शिक्षक केवल सूचनाओं का प्रदाता नहीं, बल्कि ज्ञान का सुगमकर्ता है। डिजिटल युग में चाक और टॉक के साथ ‘क्लिक और क्विक’ का समन्वय अनिवार्य है।उन्होंने प्रीप और दीक्षा जैसे मंचों की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब एक शिक्षक तकनीक से लैस होता है,तो वह कक्षा की दीवारों को लांघकर वैश्विक ज्ञान के भंडार से जुड़ जाता है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे गूगल जेमिनी जैसे ए.आई टूल्स का उपयोग केवल कार्य को सरल बनाने के लिए नहीं,बल्कि बच्चों की रचनात्मकता को नई दिशा देने के लिए करें। सुनिष्ठा अभिषेक के सान्निध्य में शिक्षकों ने जटिल तकनीकी बारीकियों को अत्यंत सुबोधगम्यता से आत्मसात किया।तो डिजिटल साक्षरता से सशक्तिकरण तक दो दिवसीय सघन प्रशिक्षण में जनपद के कड़ा,कौशाम्बी,मंझनपुर,चायल ब्लॉकों से आए 100 ऊर्जावान प्रतिभागियों ने सहभागिता की। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को निम्नवत विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया-आई-प्रेप शिक्षकों को पंजीकरण से लेकर डिजिटल प्रोफाइल निर्माण,विषय चयन और शिक्षण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की बारीकियां सिखाई गईं।समय सारिणी एवं संसाधन प्रबंधन-तकनीक के माध्यम से विद्यालयी समय सारिणी को व्यवस्थित करने और उपलब्ध वीडियो सामग्री के माध्यम से शिक्षण को ‘दृश्य-श्रव्य अनुभव में बदलने का अभ्यास कराया गयाआधुनिक टूल्स का प्रयोग- गूगल जेमिनी के माध्यम से ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ और गूगल फॉर्म के द्वारा त्वरित मूल्यांकन की विधियों पर विशेष बल दिया गया।स्वयं एवं दीक्षा एप्प से शिक्षकों के व्यावसायिक विकास हेतु उपलब्ध ऑनलाइन कोर्सेज और डिजिटल लाइब्रेरी के उपयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।
तकनीकी विमर्श और सम्पादन तकनीकी सत्रों का संचालन प्रशिक्षक सुनिष्ठा प्रजापति और टी.सी.आई.एल.के प्रतिनिधि अभिषेक सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने अत्यंत धैर्य और कुशलता के साथ शिक्षकों की तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यशाला के दौरान हैंड्स-ऑन अभ्यास के माध्यम से शिक्षकों ने स्वयं अपनी प्रोफाइल और शिक्षण योजनाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्मित कीं।समापन सत्र में डायट प्राचार्या सुश्री निधि शुक्ला ने डॉ. नरेंद्र और एसआरजी डॉ ओमप्रकाश सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कौशाम्बी के शिक्षक अब ‘स्मार्ट क्लास’ के माध्यम से जनपद को प्रदेश के अग्रणी जनपदों में स्थापित करेंगे।अंत में,सभी 100 प्रतिभागियों ने पूर्ण मनोयोग से तकनीक को अपनी कार्यशैली का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया।सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट प्रदान किये गए राष्ट्रगान और परस्पर शुभकामनाओं के साथ इस दो दिवसीय ज्ञान-यज्ञ की पूर्णाहुति हुई।

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