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नई दिल्ली21मई25*जल जीवन मिशन में नियम बदलने से 16,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत
जल जीवन मिशन की निविदा प्रक्रिया में वर्ष 2022 में किए गए एक बदलाव के कारण सरकार को करीब ₹16,000 करोड़ की अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ा है। 2019 में मिशन के दिशानिर्देशों में “टेंडर प्रीमियम” जैसे तत्वों को अस्वीकार्य खर्चों की सूची में रखा गया था, लेकिन जून 2022 में इसे हटाकर यह व्यय स्वीकृत कर दिया गया। इससे राज्य सरकारें ऊंचे दरों पर ठेके देने लगीं।
अकेले मध्य प्रदेश में अनुमानित लागत ₹42,616 करोड़ थी जबकि ठेका ₹53,381 करोड़ में दिया गया – ₹10,764 करोड़ अधिक।
मुख्य तथ्य जो निकलकर आए।
कुल 1,03,093 योजनाओं में 14,586 में लागत अनुमान से ज्यादा कीमत पर ठेके दिए गए।
इनमें सबसे अधिक मामले मध्य प्रदेश (508 योजनाएं), महाराष्ट्र (4,553 योजनाएं), छत्तीसगढ़, बंगाल और राजस्थान में सामने आए।
जल शक्ति मंत्रालय ने इसका कारण कोविड के बाद बढ़ी निर्माण सामग्री की कीमतों को बताया है, पर “इंडियन एक्सप्रेस” इन्वेस्टिगेशन ने पाया कि मूल्य वृद्धि नियम बदलाव के बाद ज्यादा तेज़ी से हुई।

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