सतना20मई25*स्मार्ट सिटी सतना का नसीब बन गई चारों तरफ फैली जानलेवा गड्ढों वाली सड़कें, रोज चोटिल हो रहे लोग
घटिया मरम्मत के नाम पर उड़ाए जा रहे हैं जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे, बह रही है मनमानी की गंगा
अमर रिपब्लिक सतना। कहने के लिए जरुर औद्योगिक नगरी सतना स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शामिल हो गया है पर आज भी यहां के हालात गांवों से भी बद्तर बने हुए हैं। पूरे शहर में आपको इक्का दुक्का जगहों पर ही चलने के लिए सकुशल सड़क देखने को मिल सकती है वरना अधिकांश स्थानों पर जानलेवा गड्ढे ही आपका वेलकम करने के लिए हमेशा तैयार नजर आते हैं। पिछले छः साल से सतना को विकसित बनाने के लिए सीवरेज प्रोजेक्ट का काम चल रहा है। बेहतर प्लानिंग के साथ कार्य न होने की वजह से हर रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जहां पहले केंद्र सरकार के सीवरेज प्रोजेक्ट पर काम करते हुए दिल्ली की केके स्पंज लिमिटेड कंपनी ने जनता को समस्या के दलदल में धकेलने का काम किया तो वहीं अब गुजरात की स्नेह लिमिटेड कंपनी लोगों को खून के आंसू रुला रही है। एक जगह पर सड़क खोदकर किसी तरह सीवर पाइप डाला जाता है और उसके बाद मिट्टी डालकर कंपनी की टीम गायब हो जाती है। सही तरीके से सड़कों की मरम्मत न होने कारण पूरे रास्ते पर जानलेवा गड्ढों का अंबार लग जाता है। मौजूदा समय में बाजार क्षेत्र की हर सड़क बदहाली के आंसू बहाने के लिए मजबूर हो गयी है। नगर निगम आयुक्त दावा करते हैं जहां पर सीवरेज का काम किया गया है, वहां पर सुधार कार्य जारी है। जबकि हकीकत यह है कि खस्ताहाल सड़कों पर मरम्मत के नाम पर केवल सीमेंट पोतने का अभियान चलाया जाता है। यही वजह है कि रेलवे स्टेशन सड़क, जयस्तंभ चौक से भैंसा खाना जाने वाली सड़क को जानलेवा गड्ढों से मुक्ति नहीं मिल पाई है। आखिर यह कैसा सुधार कार्य सतना नगर निगम करवा रहा है कि सड़कें आवागमन के लिए पहले की तरह चकाचक नहीं हो रही है? सूत्रों ने बताया कि सड़कों का घटिया मरम्मत कार्य करवाते हुए जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा उड़ाया जा रहा है। कुल मिलाकर विकास की आड़ लेकर सतना नगर निगम और गुजरात की कंपनी मनमानी की गंगा बहा रहे हैं।
दिखावे के विरोध तक सिमटे जनप्रतिनिधि, इसलिए जनता के नहीं आएंगे अच्छे दिन!
सतना नगर निगम और गुजरात की कंपनी सीवरेज प्रोजेक्ट के नाम पर सड़कों को बद्तर बना रही है और विकास का दम भरनेवाले जनप्रतिनिधि तमाशा देख रहे हैं। बताया जाता है कि गुजरात की कंपनी होने के कारण सांसद गणेश सिंह और महापौर योगेश ताम्रकार केवल दिखावे का विरोध करने तक सीमित रह गए हैं। केवल बैठकों में ही इन्हें परेशान जनता का हमदर्द बनने का नाटक करते हुए देखा जाता है। सत्ता पक्ष के लोगों की मजबूरी तो समझ में आती है लेकिन विपक्ष दूर दूर तक कहीं नजर नहीं आता है। आम जनता जिस समस्या से सबसे ज्यादा परेशान है, अफसोस वह जिले के कांग्रेसियों को नजर नहीं आती है। शहर के इतने बद्तर हालात होने के बाद भी विपक्ष का सड़क पर न उतरना संदेह को बल देता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि सीवरेज प्रोजेक्ट को लेकर अंदर ही अंदर दोनों दलों के बीच कोई सेटिंग हो गई है? सड़कों के बद्तर हालातों का व्यापक विरोध न होने की वजह से परेशानी आम आदमी का नसीब बन गई है। इस मामले को लेकर भाजपा का मौन सियासी विवशता है लेकिन कांग्रेस की चुप्पी समझ से परे है। यदि इसी तरह बचे हुए गिने चुने कांग्रेसी राजनीति करते रहे तो सतना जिले में मजबूती के साथ पार्टी शायद ही कभी दोबारा खड़ी हो पाएगी? केवल ज्ञापन देने की औपचारिकता से कांग्रेस पार्टी जनता का विश्वास हासिल नहीं कर पाएगी?

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