नैनीताल 23 अक्टूबर 26*लालकुआं नगर पंचायत में वित्तीय घोटाले की जांच 5 महीने बाद भी अधर में, समाजसेवी ने सीएम पोर्टल पर की शिकायत;
डस्टबिन खरीद से अलाव की लकड़ी तक सरकारी धन की बंदरबांट का आरोप
डीएम के आदेश के बावजूद 15 दिन में पूरी होने वाली जांच का अब तक अता-पता नहीं, राजनीतिक दबाव में मामले को दबाने की आशंका, सभासदों की मांग भी ठंडे बस्ते में।
जफर अंसारी, यूपीआजतक (लालकुआं, नैनीताल)
लालकुआं (नैनीताल):उत्तराखंड के नैनीताल जनपद अंतर्गत लालकुआं नगर पंचायत में हुए कथित वित्तीय भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बंदरबांट का मामला एक बार फिर गरमा गया है। जिलाधिकारी नैनीताल द्वारा जांच के स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए जाने के बावजूद पांच माह का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन न तो जांच रिपोर्ट सामने आई है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई अमल में लाई गई है। प्रशासन के इस लचर और ढुलमुल रवैये के खिलाफ नगर के जागरूक समाजसेवी मुकेश कुमार ने मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल पर सीधे शिकायत दर्ज कराई है और मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
15 दिन की मियाद, 5 महीने बाद भी नतीजा शून्य

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई शिकायतों का संज्ञान लेते हुए बीती 5 मई को नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने हल्द्वानी के नगर मजिस्ट्रेट (सिटी मजिस्ट्रेट) को जांच के आधिकारिक आदेश जारी किए थे। इस जांच आदेश में नगर पंचायत लालकुआं द्वारा खरीदे गए स्टील डस्टबिनों, सार्वजनिक शौचालय पुनर्निर्माण कार्यों, छठ पूजा स्थल निर्माण और शीतकाल में जनहित के नाम पर अलाव के लिए खरीदी गई लकड़ी के बिलों व खर्चों से जुड़े सभी साक्ष्यों की गहन पड़ताल करने के सख्त निर्देश दिए गए थे।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया था कि जांच प्रक्रिया को अधिकतम 15 दिनों के भीतर पूरा कर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। हालांकि, प्रशासनिक लापरवाही और कथित राजनीतिक दखल का आलम यह है कि 15 दिन की समय सीमा कब की बीत गई और पांच महीने का वक्त गुजर जाने के बाद भी जांच प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
सरकारी धन की बंदरबांट और राजनीतिक संरक्षण के आरोप

मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने वाले समाजसेवी मुकेश कुमार का कहना है कि नगर पंचायत में विकास कार्यों और आवश्यक सामग्रियों की खरीद के नाम पर खुलेआम सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डस्टबिन खरीद से लेकर अलाव की लकड़ी और निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय फर्जीवाड़ा हुआ है।
समाजसेवी ने आरोप लगाया कि जांच को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला गया है क्योंकि इसके पीछे रसूखदार लोगों और राजनीतिक आकाओं का दबाव काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले दोषियों को बचाने के लिए पूरी जांच प्रक्रिया को दबाने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है।
4 सभासदों की गुहार भी रही अनसुनी
नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का यह मामला केवल समाजसेवियों तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर के चुने हुए जनप्रतिनिधि भी इसके खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। इससे पूर्व नगर पंचायत के चार सभासदों ने भी लिखित रूप में प्रशासन को शिकायती पत्र सौंपकर सरकारी धन के गबन की जांच कराने की मांग की थी। बावजूद इसके, चुने हुए जनप्रतिधियों की मांग को दरकिनार करते हुए शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिससे नगरवासियों में भारी रोष व्याप्त है।
समाजसेवी मुकेश कुमार ने प्रदेश सरकार और शासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही जनता के टैक्स के पैसे का गबन करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर रिकवरी की जाए।
रिपोर्ट: जफर अंसारी, यूपीआजतक (लालकुआं, नैनीताल)
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