दिल्ली20सितम्बर23*महिला आरक्षण बिल लोकसभा में तो पेश हो गया, इतनी जल्दी नहीं पहनाया जा सकता अमलीजामा लोकसभा चुनावों तक तो बिल्कुल नहीं*
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश हो चुका है अमलीजामा पहनने से पहले इसे कई रुकावटों से गुजरना होगा। इनमें राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल करने के साथ जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया शामिल हैं। बिल के प्रावधानों में कुछ चीजें बिलकुल साफ हैं। जनगणना के बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने पर ही यह अमल में आएगा।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद भी बात खत्म नहीं होगी। इसे कानून की शक्ल लेने के लिए कम से कम 50 फीसदी राज्य विधानसभाओं की मंजूरी की जरूरत होगी। कुल मिलाकर अभी यह कहा जा सकता है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू कर पाना मुश्किल होगा। 2029 के बाद भी इसे लागू करने के लिए सरकार को तेजी से काम करना होगा। तभी यह वास्तकिता बनेगा ।
संविधान के जानकारों का कहना है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण बिल को कानून का रूप देना मुश्किल है। संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित हो जाने के बाद भी कई तरह की अड़चनें हैं। बिल को कानून का रूप देने के लिए कम से कम 50 फीसदी राज्य विधानसभाओं की मंजूरी जरूरी होगी। राज्य विधानसभाओं की मंजूरी इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे राज्यों के अधिकार प्रभावित होते हैं

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