अयोध्या 6जनवरी 26**अयोध्या महोत्सव:बना अराजकतत्व का अड्डा दारु की बोतल अंडा का छिलका और कंडोम की पैकेट उड़ा रहा मनको कि धज्जिया
*अयोध्या महोत्सव:बना अराजकतत्व का अड्डा दारु की बोतल अंडा का छिलका और कंडोम की पैकेट बनी अयोध्या महोत्सव की पहचान सुरक्षा मानकों की उड़ रही धज्जियां, क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा प्रशासन?*
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या, जो अपनी गरिमा और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व विख्यात है, वहां आयोजित ‘अयोध्या महोत्सव’ इस समय विवादों के घेरे में है। महोत्सव में उमड़ रही भीड़ के बीच सुरक्षा मानकों की ऐसी अनदेखी की जा रही है, जो किसी भी वक्त एक बड़ी त्रासदी को दावत दे सकती है। ताज्जुब की बात यह है कि सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार विभाग अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं।
खतरे में मासूमों की जान: बिना सेफ्टी बेल्ट चल रहे झूले
महोत्सव का सबसे डरावना मंजर झूला परिसर में देखने को मिल रहा है। ऊंची उड़ान भरने वाले बड़े-बड़े झूलों पर छोटे-छोटे बच्चे बिना किसी सेफ्टी बेल्ट या सुरक्षा घेरे के झूलते नजर आ रहे हैं। नियमानुसार, इन झूलों के संचालन के लिए कड़े सुरक्षा मानक तय हैं, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रख दिया गया है। ऐसा लग रहा है मानो आयोजक लोगों को मनोरंजन के नाम पर ‘मौत का खेल’ दिखा रहे हैं।
जिम्मेदारों की ‘कुंभकर्णी’ नींद: कहां हैं विभाग?
सवाल खड़ा होता है कि पर्यटन विभाग और अग्निशमन (Fire Department) जैसे महत्वपूर्ण विभाग धरातल पर क्यों नजर नहीं आ रहे? क्या इन विभागों ने सिर्फ कागजों पर अनुमति देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है? महोत्सव स्थल पर सुरक्षा जांच के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है, तभी शायद नींद से जागेगा।
दावे बनाम हकीकत: शराब की बोतलें, मंशा कुछ अराजक तत्व बयां कर रही कहानी
अयोध्या महोत्सव के संचालक हरीश श्रीवास्तव का दावा है कि सभी मानकों को पूरा किया जा रहा है। लेकिन महोत्सव की जमीन से निकलकर आ रही तस्वीरें कुछ और ही हकीकत बयां कर रही हैं। मैदान में जगह-जगह पड़ी शराब की खाली बोतलें, और मांश, मैनफोर्स जैसी पैकेट पड़े न केवल महोत्सव की व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं, बल्कि अयोध्या जैसी पवित्र नगरी की गरिमा को भी ठेस पहुंचा रही हैं। एक तरफ सांस्कृतिक आयोजन का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, तो दूसरी तरफ अनुशासनहीनता का यह आलम है।
बड़ा सवाल: आखिर मजबूरी क्या है?
आयोजन को लेकर अब जनता के बीच कई सवाल तैर रहे हैं:
* बिना फिटनेस सर्टिफिकेट और सेफ्टी ऑडिट के इन भारी-भरकम झूलों को अनुमति कैसे मिली?
* क्या रसूखदार लोगों की पहुंच के कारण अधिकारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं?
* यदि कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा—आयोजक या वो विभाग जिन्होंने आंखें बंद कर रखी हैं?
अयोध्या की गरिमा को बचाने और मासूमों की जान सुरक्षित करने के लिए अब उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप की सख्त जरूरत है। अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो अयोध्या महोत्सव खुशियों के बजाय किसी मातम की वजह बन सकता है।
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