सहारनपुर 30 अक्टूबर 26*सहारनपुर थाना मंडी लूट कांड का पूरा सच*
सहारनपुर से लोकेन्द्र गौतम की रिपोर्ट यूपीआजतक
*सहारनपुर।* थाना मंडी क्षेत्र में दर्ज लूट के मुकदमे ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस की जांच, पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखने का आरोप –
*पहला पहलू – मुकदमा कैसे दर्ज हुआ?*
जानकारी के अनुसार चिलकाना रोड पर डॉलर / USDT के लेन-देन को लेकर दो पक्षों में कहासुनी हुई थी। इसके बाद एक पक्ष थाना मंडी पहुंचा और लूट का मुकदमा दर्ज करा दिया। इस मुकदमे में एक वरिष्ठ पत्रकार सहित कुछ लोगों को आरोपी बनाया गया है।
आरोप लग रहा है कि यह मुकदमा एक हिस्ट्रीशीटर पत्रकार किस्म के व्यक्ति द्वारा पुलिस अधिकारियों को गुमराह किया गया जो सरासर झूठ थां सूत्र
*दूसरा पहलू – 2021 का नकली रेमडेसिविर कनेक्शन*
अवलोकन में सामने आया कि मुकदमा दर्ज कराने वाले पक्ष का नाम 2021 के चर्चित नकली रेमडेसिविर मामले में आ चुका है। दैनिक जागरण और प्रभासाक्षी की रिपोर्ट के अनुसार यमुनानगर पुलिस ने नकली रेमडेसिविर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सहारनपुर के खाताखेड़ी निवासी दो सगे भाइयों को पकड़ा था। पंजाब के रोपड़ जिले में भी इसी गैंग पर कार्रवाई हुई थी। सूत्रों का कहना है कि वही लोग अब साइबर फ्रॉड के पैसों को USDT में कन्वर्ट कर बेचने के काम में लगे हैं।
*तीसरा पहलू – पीड़ित पत्रकार के साथ क्या हुआ?*
पीड़ित पक्ष का सबसे बड़ा आरोप है –
1. पत्रकार को जांच के नाम पर थाना मंडी में 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखा गया, जो कानूनन गलत है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है।
2. पहले दिन पूछताछ के बाद क्लीन चिट जैसी स्थिति बनने के बाद अगले दिन उसी मामले में मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
3. झूठे मुकदमे का डर दिखाकर 25 लाख रुपये की मांग की जा रही है, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा किया जा रहा है।
*पुलिस का अवलोकन -*
इस पूरे मामले में थाना मंडी पुलिस की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पुलिस किसी के दबाव में नहीं है।
पुलिस अब चार चीजों पर जांच कर रही है –
1. घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज
2. दोनों पक्षों की कॉल डिटेल और लोकेशन
3. पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
4. ब्लैकमेलिंग और पैसों की मांग वाली ऑडियो की सत्यता
अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच में यह पाया गया कि पुलिस को गुमराह कर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है, तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी धारा 182, 211 IPC के तहत कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सिर्फ लूट का नहीं, बल्कि पुलिस की विश्वसनीयता का भी है। अगर एक हिस्ट्रीशीटर पत्रकार व्यक्ति पुलिस को गुमराह करने में सफल हो जाता है गलत खबरें चलाता है और एक पत्रकार को 24 घंटे से अधिक थाने में रखा जाता है, तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल है।
*मामला जांच अधीन है, सभी आरोप जांच के अधीन हैं।*
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