सबौर भागलपुर बिहार से शैलेन्द्र कुमार गुप्ता
भागलपुर29अप्रैल26* गन्ना उत्पादन प्रणाली के वैज्ञानिक रूपांतरण पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित
Bihar Agricultural University (बीएयू), सबौर के निदेशालय अनुसंधान में “बिहार में गन्ना खेती का उन्नयन: संभावनाएँ, चुनौतियाँ एवं अवसर” विषय पर एक दिवसीय उच्च स्तरीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यशाला Indian Society of Agronomy के बीएयू सबौर चैप्टर द्वारा आयोजित की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य गन्ना-आधारित उत्पादन प्रणाली को वैज्ञानिक नवाचार, सटीक कृषि (precision agriculture), जलवायु-स्मार्ट रणनीतियों एवं संसाधन दक्षता आधारित प्रबंधन के माध्यम से रूपांतरित करना था।
कार्यक्रम का संयोजन निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह द्वारा किया गया, जबकि अध्यक्षता डॉ. एस. के. पाठक, निदेशक प्रसार, बीएयू सबौर ने की। डॉ. संजय कुमार, डीआरआई-कम-डीन (पीजीएस) एवं सचिव, बीएयू सबौर चैप्टर, आईएसए ने स्वागत भाषण में गन्ना क्षेत्र में research–extension–innovation convergence को सुदृढ़ करने तथा data-driven एवं evidence-based agronomic interventions को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. देवेंद्र सिंह, प्रोफेसर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने अपने प्रभावशाली व्याख्यान में गन्ना उत्पादन प्रणाली के उन्नयन हेतु अत्याधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने genotype × environment interaction (G×E) के आधार पर क्षेत्र-विशिष्ट किस्म चयन, site-specific nutrient management (SSNM), real-time nitrogen management, तथा drip fertigation आधारित water–nutrient coupling को उत्पादकता वृद्धि के प्रमुख स्तंभ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गन्ना उत्पादन में yield gap reduction हेतु decision support systems (DSS), remote sensing आधारित निगरानी, तथा digital agriculture tools का एकीकरण अनिवार्य है।
उन्होंने आगे integrated pest and disease management (IPM/IDM) के अंतर्गत जैव-नियंत्रण, प्रतिरोधी किस्मों एवं पूर्वानुमान आधारित हस्तक्षेपों की वैज्ञानिक उपयोगिता को रेखांकित किया। साथ ही sugarcane-based intercropping systems, carbon sequestration potential, weed dynamics and herbicide resistance, तथा post-harvest sucrose recovery optimization जैसे उभरते अनुसंधान क्षेत्रों पर भी विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर कुलपति, Bihar Agricultural University ने अपने प्रेरक संदेश में कहा, “गन्ना क्षेत्र का भविष्य विज्ञान-आधारित नवाचार, जलवायु अनुकूल तकनीकों एवं डिजिटल कृषि के समन्वय में निहित है। हमें प्रयोगशाला से खेत तक तकनीकों के तीव्र हस्तांतरण के माध्यम से किसानों की आय एवं उत्पादन प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी।”
निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने अपने तकनीकी उद्बोधन में कहा, “बिहार में गन्ना की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए varietal replacement, nutrient use efficiency, water productivity, mechanization एवं precision agronomy पर आधारित बहु-विषयक अनुसंधान को प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही on-farm adaptive research, frontline demonstrations एवं stakeholder-driven innovation models के माध्यम से तकनीकों के तीव्र प्रसार को सुनिश्चित करना आवश्यक है।”
चर्चा सत्र में डॉ. संजय कुमार सहित वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने yield gap analysis, input-use inefficiency, climate variability impacts तथा technology adoption barriers पर गहन विमर्श किया। विशेषज्ञों ने systems-based agronomic approach, climate-resilient production models एवं participatory research frameworks को अपनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. गायत्री कुमारी द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस. एस. आचार्य ने प्रस्तुत किया।
कार्यशाला का समापन इस दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि गन्ना उत्पादन प्रणाली में research–extension–innovation continuum को सुदृढ़ करते हुए, उन्नत तकनीकों का क्षेत्रीय अनुकूलन, संसाधन संरक्षण, डिजिटल एकीकरण एवं बहु-हितधारक सहयोग के माध्यम से बिहार को सतत, जलवायु-सहिष्णु एवं उच्च उत्पादक गन्ना अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर किया जाएगा।

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