April 30, 2026

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भागलपुर04मई25 अंजुमन बाग व बहार, बरहपुरा में उर्दू के मशहूर अफसाना निगार शमोएल अहमद की जयन्ती मनायी गयी।

भागलपुर04मई25 अंजुमन बाग व बहार, बरहपुरा में उर्दू के मशहूर अफसाना निगार शमोएल अहमद की जयन्ती मनायी गयी।

भागलपुर04मई25 अंजुमन बाग व बहार, बरहपुरा में उर्दू के मशहूर अफसाना निगार शमोएल अहमद की जयन्ती मनायी गयी।

बिहार से शैलेन्द्र कुमार गुप्ता यूपी आजतक

अंजुमन बाग व बहार, बरहपुरा में उर्दू के मशहूर अफसाना निगार शमोएल अहमद की जयन्ती मनायी गयी।

4मई 2025, अंजुमन बाग व बहार, बरहपुरा, भागलपुर के बैनर तले जौसर अयाग की अध्यक्षता में उर्दू के मशहूर व मारूफ फिक्शन निगार शमोएल अहमद की जयन्ती डा० हबीब मुर्शीद खॉ के आवास पर इस्लामनगर बरहपुरा में मनायी गयी। इस मौके पर अंजुमन के महसचिव डा मो० परवेज ने कहा के शमोएल अहमद आधुनिक दौर के बड़े अफसाना निगार थे। उन्होंने उर्दू अदब को लाजबाब अफसाने दिये उन्होंने ने अपनी कहानियों से भागलपुर का नाम रौशन किया। उनकी कई कहानियों का दूसरी जुबान में अनुवाद हो चुका है और उनकी कई कहानियों पर टेली फिल्म भी बन चुकी हैं। 4 मई 1943 ई0 को भीखनपुर गुमटी न० 3, भागलपुर में जन्म हुआ था वह सिविल चीफ इंजिनियर से सेवा निवृत थे। उन्होंने अपनी अदबी जिन्दगी का आगाज अफसाना निगारी से किया और उनकी पहली कहानी चाँद का दाग थी जो 1963 ई० में पत्रिका सनम में छपी थी सिगारदान, आँगन का पेड़, कागजी पैरहन, बागमती जब हँसती है, बलराम का घर, मेन स्वीच, मीनरल वाटर, बगोले, मिश्री की डली, आखरी सीढी, गाय हमारी माता है,लगी, आदि उनकी बहुत ही बशहूर व मारूफ कहानियाँ है। उनके मशहूर उपन्यासो में नदी, महामारी, गिरदाब, ऐ दिल आवारा आदि है। उन्हे कई पुरस्कार भी मिले जिनमें फरोग उर्दू अदब दोहा कतर आलमी सम्मान शामिल है। इस मौके पर मो० शादाब आलम, डा० अरशद रजा, डा० हबीब मुशीद खाँ डा० एजाज अहमद खान, अतहर चाँद आदि मौजूद थे।