प्रयागराज27अगस्त*प्रयागराज में बाढ़ को ध्यान में रखकर रेलवे पुल की हो रही कड़ी निगरानी
यहां शहर में रेलवे के तीन पुलों की निगरानी बढ़ाने के साथ ही दारागंज को झूंसी से जोड़ने वाले रेल पुल पर शुक्रवार दोपहर कॉशन लगा दिया गया। वहीं हावड़ा-दिल्ली रेल मार्ग पर स्थित नैनी यमुना ब्रिज पर लगे सेंसर से भी पल-पल की खबर कंट्रोल रूम को मिल रही है।*
शुक्रवार को गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे का निशान पार करने के बाद से ही रेलवे ने अपने तीन महत्वपूर्ण पुलों की निगरानी बढ़ा दी है। यहां फाफामऊ रेल ब्रिज को छोड़ दिया जाए तो नैनी यमुना ब्रिज 157 वर्ष पुराना है तो वहीं दारागंज को झूंसी से जोड़ने वाला पुल भी 100 वर्ष से ज्यादा पुराना है। 2013 में आई बाढ़ के दौरान फाफामऊ रेल ब्रिज जो 25 वर्ष पुराना है, उसके तटबंध पर मिट्टी की कटान होने से रेल संचालन प्रभावित हुआ था। हालांकि इस बार तीनों ही रेल ब्रिज के तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित हैं, लेकिन बढ़ते जलस्तर की वजह से पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल ने झूंसी पुल पर कॉशन लगा दिया।
यहां अधिकतम 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ही ट्रेन संचालित होंगी। मंडल के पीआरओ अशोक कुमार ने इसकी पुष्टि की है। उधर, फाफामऊ रेल ब्रिज पर भी स्पीड नियंत्रित कर दी गई है। हालांकि रेलवे की ओर से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है, लेकिन यहां शुक्रवार को अधिकतम 40 किमी की रफ्तार से ही ट्रेनें चलीं। यहां जलस्तर और बढ़ने पर रेलवे शनिवार को कॉशन लगा सकता है।
दूसरी ओर 1865 में बना नैनी यमुना ब्रिज के नीचे बढ़ रहे जलस्तर की रेलवे द्वारा लगाए गए सेंसर के माध्यम से निगरानी की जा रही है। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि यहां पल-पल का अपेडट कंट्रोल रूम को मिल रहा है। नैनी ही नहीं, मेजारोड के पहले टोंस नदी पुल की भी निगरानी हो रही है। इन दोनों ही पुलों पर कॉशन लगाने की अभी फिलहाल जरूरत नहीं है।

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