पूर्णिया बिहार27अक्टूबर26* पूर्णिया में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ की धूम, बच्चों को मिल रहा सुरक्षित भविष्य का संदेश*
मोहम्मद इरफान कामिल ब्यूरो चीफ़ यूपी आज़तक न्यूज़ चैनल पूर्णिया डीवीजन बिहार
*पूर्णिया बिहार ।* राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण पटना तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पूर्णिया श्री अनुराग के निर्देशानुसार जिले में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ चलाया जा रहा है। 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान के तहत जिले के विभिन्न विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं अधिकारों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
*सेंट पीटर्स स्कूल में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम*
अभियान के दूसरे दिन 27 अक्टूबर को सेंट पीटर्स स्कूल, पूर्णिया में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अवर न्यायाधीश-सह-सचिव श्री सुनील कुमार, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री सुमित प्रकाश, डिप्टी चीफ एलएडीसी अधिवक्ता श्रीमती कुमारी वेदवती यादव, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के जिला समन्वयक-सह-चाइल्ड राइट एसोसिएट मो. सज्जाद आलम तथा चाइल्ड हेल्पलाइन के काउंसलर सहित कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं भी मौजूद रहीं।
*पॉक्सो एक्ट और सुरक्षित-असुरक्षित व्यवहार का बताया फर्क*
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, शिक्षा, सम्मानजनक वातावरण तथा शोषण, हिंसा एवं दुर्व्यवहार से मुक्त जीवन का अधिकार है। बच्चों को पॉक्सो एक्ट 2012 के प्रावधानों, बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और बाल यौन शोषण की रोकथाम के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार के बीच अंतर, अनुचित व्यवहार की पहचान और निडर होकर अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने अपील की कि किसी भी उत्पीड़न या असुरक्षा की स्थिति में बच्चे बिना भय के अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को जानकारी दें।
*सभी संस्थाओं की सहभागिता से बनेगा बाल-अनुकूल वातावरण*
अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास विकसित करना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाना है। इसकी सफलता के लिए न्यायिक संस्थाओं, जिला प्रशासन, पुलिस, विद्यालयों, बाल संरक्षण इकाइयों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं सामाजिक संगठनों की सामूहिक सहभागिता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामूहिक प्रयासों से बच्चों के लिए सुरक्षित एवं बाल-अनुकूल वातावरण विकसित करने और बाल अधिकारों के उल्लंघन की रोकथाम के प्रति समाज को संवेदनशील बनाया जा रहा है।
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