April 18, 2026

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पूर्णिया बिहार 17 अप्रैल 26 *थाने पर तीसरी आंख: CCTV बताएगा सच, सुप्रीम कोर्ट का सख्त पहरा*

पूर्णिया बिहार 17 अप्रैल 26 *थाने पर तीसरी आंख: CCTV बताएगा सच, सुप्रीम कोर्ट का सख्त पहरा*

पूर्णिया बिहार 17 अप्रैल 26 *थाने पर तीसरी आंख: CCTV बताएगा सच, सुप्रीम कोर्ट का सख्त पहरा*

पूर्णिया बिहार से मोहम्मद इरफान कामिल की खास रिपोर्ट यूपी आजतक

पूर्णिया बिहार : पुलिस थानों में पारदर्शिता और Accountability लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक Landmark और Practical कदम उठाया है। अब कानून के रक्षक भी 24×7 निगरानी के दायरे में रहेंगे।
_Paramvir Singh Saini vs. Baljit Singh (2020)_ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद Strict निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि थाने के हर Entry और Exit Point, Main Gate, सभी Lockup, Interrogation Room, Corridor, Lobby, बरामदा, Duty Officer के केबिन और Lockup के बाहर का इलाका CCTV Coverage में आएगा। कोई भी Area अछूता नहीं रहेगा। सभी कैमरों में Night Vision और Audio-Video Recording अनिवार्य की गई है।
हर फुटेज को कम से कम 18 महीने तक Tamper Proof Mode में सुरक्षित रखना होगा। यह ऑर्डर सिर्फ State Police तक सीमित नहीं है। CBI, ED, NIA जैसी Central Agencies के दफ्तर भी इस दायरे में आएंगे।
यह ऑर्डर सिर्फ Technical Compliance नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को Accountable बनाने की Strategy है।
अगर कोई नागरिक Custodial Torture या Illegal Detention का आरोप लगाता है, तो बिना छेड़छाड़ वाली CCTV फुटेज देना पुलिस की Duty होगी। फुटेज नहीं दी तो कोर्ट Adverse Inference लेगी, यानी माना जाएगा कि पुलिस की गलती है।
अब तक ‘कैमरा खराब था’ या ‘बिजली चली गई’ का बहाना चलता था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि SHOs Personally रखरखाव और Repair के लिए जिम्मेदार होंगे। अब यह Excuse नहीं चलेगा।
कोर्ट ने Custodial Death को ‘Blot on the System’ बताया और केंद्र-राज्यों को फटकार लगाई। केंद्र सरकार को तो यहां तक कहा कि वह “Taking the Court Too Lightly” कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने Kerala Model की तारीफ की जहां Senior Officers Mobile App से थानों की Real-Time Monitoring करते हैं। बाकी राज्यों को भी यही Model अपनाने को कहा गया है।
कोर्ट ने खुद Suo Motu संज्ञान लेकर केंद्रीय गृह सचिव को Summon किया था। सभी राज्यों से Compliance Affidavit मांगा गया है। जो राज्य फेल हुए, उनके Chief Secretaries को Personal Appearance की Warning दी गई है।
यह फैसला सिर्फ कैमरे लगाने का आदेश नहीं है। यह Article 21 यानी Right to Life and Personal Liberty की रक्षा के लिए Structural Intervention है।
इसका मैसेज साफ है: “Law Enforcers भी Law के ऊपर नहीं हैं।” अब पुलिस थाने Blind Spots नहीं रहेंगे, बल्कि 24×7 Surveillance में रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने बता दिया कि अब थाने पर Third Eye का पहरा होगा और Transparency से कोई समझौता नहीं।

Taza Khabar