पंजाब3मई26*🔴न्यूयार्क निवासी कुक्कड़ दंपती ने समर्थ ओल्ड एज होम एवं उदभव आवास के निर्माण में दिया 6 लाख का सहयोग*
_-सेवा,संवेदना और प्रेरणा का जीवंत उदाहरण – डॉ कटारिया/लूथरा_
अबोहर, 2 मई। विदेश की चकाचौंध में बसे होने के बावजूद कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनका दिल हमेशा ही अपनी जन्म भूमि के लिए धडक़ता रहता हैं। हजारों किलोमीटर दूर न्यूयार्क में रहने वाले डा. नरेंद्र मोहन कुक्कड़ और उनकी धर्मपत्नी मंजू कुक्कड़ भी उन्हीं लोगों में से एक हैं जो भौगोलिक दूरी होने के बाद भी भावनात्मक नजदीकियां बनाए हुए हैं। अपने जन्म स्थान फाजिल्का और अपने ननिहाल गांव ढाबा कोकरिया के प्रति उनका प्रेम और स्नेह को केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेवा के रूप में साकार हो रहा है। जिसके चलते उन्होंने समर्थ ओल्ड एज होम एवं उद्भव आवास अनाथालय के लिए 6 लाख रुपए का आर्थिक सहयोग दिया है।
इस बारे में जानकारी देते हुए श्री बाला जी मानव सेवा समिति की चेयरपर्सन सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डा. सुमेधा कटारिया और प्रधान रजत लूथरा ने बताया कि फाजिल्का में जन्में और वर्तमान समय में न्यूयार्क में रहने वाले डा. नरेन्द्र मोहन व मंजू कुक्कड़ ने अपने दिवंगत माता-पिता सुखलाल कुक्कड़ और बागाँ बाई कुक्कड़ तथा सास-ससुर श्री सरदारी लाल सेतिया और तुलसी बाई सेतिया की पावन स्मृति में हनुमानगढ़ रोड़ स्थित समर्थ ओल्ड एज होम और उद्भव आवास में एक ऐसी सौगात अर्पित की है, जो केवल भवन नहीं, बल्कि भावनाओं का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। डा. कटारिया व श्री लूथरा ने बताया कि उक्त दंपती ने छ: लाख रुपए का सहयोग दिया है। जिससे ओल्ड एज होम व अनाथालय में कार्यालय कक्ष, स्वागत कक्ष और पूजा कक्ष का निर्माण करवाते हुए इन्हें बेहतर तरीके से सजाया जाएगा। श्री कुक्कड ने विशेष आग्रह किया है कि आश्रम की गरिमा अनुरूप फर्नीचर व्यवस्था की जाए। क्योंकि यह केवल ईंट-पत्थरों का संयोजन नहीं, बल्कि उन हाथों का स्पर्श है, जो सेवा को अपना धर्म मानते हैं। न्यूयार्क में बसे होने के बावजूद, उन्होंने जिस विनम्रता के साथ इस सेवा-यज्ञ के लिए इतनी बड़ी धनराशि की आहुति दी है, वह सचमुच मन को अनुगृहीत कर देती है। यह दान केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि एक संदेश है कि अपनी जड़ों से जुड़ाव और समाज के प्रति जिम्मेदारी ही सच्ची समृद्धि है। उनका मानना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद समर्थ ओल्ड एज होम के प्रांगण में जब कोई वृद्ध मुस्कुराएगा, और उद्भव अनाथालय में कोई बच्चा निश्चिंत होकर खेलेगा, तब इस सेवा की धवल चांदनी और भी स्पष्ट रूप से प्रकाशमान होगी। क्योंकि सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी आडंबर के, केवल प्रेम और कृतज्ञता के भाव से की जाए। कुक्कड दंपति के इस योगदान पर डा. कटारिया व श्री लूथरा ने उनका तहेदिल से धन्यवाद किया है।

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