October 2, 2026

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झाँसी13सितम्बर*परिवहन विभाग के आदेश के बावजूद भी झांसी खजुराहो फोरलेन से सीधे निकल रही है प्राइवेट यात्री बसें।

झाँसी13सितम्बर*परिवहन विभाग के आदेश के बावजूद भी झांसी खजुराहो फोरलेन से सीधे निकल रही है प्राइवेट यात्री बसें।

झाँसी13सितम्बर*परिवहन विभाग के आदेश के बावजूद भी झांसी खजुराहो फोरलेन से सीधे निकल रही है प्राइवेट यात्री बसें।

झांसी 13 सितंबर । कार्यालय प्रबंधक उत्तर प्रदेश परिवहन निगम झांसी एवं राठ द्वारा बार बार आदेश पत्र जारी करने के बाद भी सभी निजी एवं सरकारी बसें पुराने परमिट वाले सड़क मार्ग से नही निकलने से खिलारा,भण्डरा, देवरीघाट के यात्रियों द्वारा बराबर शिकायतें प्राप्त हो रही है कि राठ से झांसी तथा खजुराहो से झांसी मार्ग पर संचालित करीब चालीस बस सेवाएं अभी भी सीधे फोरलेन से होकर निकल रही है। जिसमें से मात्र आधा दर्जन प्राइवेट बसें ही एक तरफ से खिलारा, भंड़रा, देवरीघाट आदि ग्रामों के पुराने रूट पर से संचालित हो रही रही लेकिन वापसी में झांसी से आने वाली बसें नही निकलती है। जिससे यात्रियों को भारी असुविधा होने के अलावा परिवहन निगम को भी भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। जबकि झांसी, राठ एवं खजुराहो झांसी मार्ग पर संचालन करने वाले समस्त बस मालिकों को परिवहन विभाग द्वारा निर्देशित किया गया है कि किसी भी दशा में बसों का संचालन सीधे फोरलेन से न करते हुए पुराने झांसी मिर्जापुर राष्टीय राजमार्ग पर से ही सभी निजी व सरकारी बसों को निकाला जाय। विभाग द्वारा जारी किए गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि यदि निर्देश के बाद भी परिवहन में बदलाव नही किया जाता है और यदि कोई परिवाद प्राप्त होता है तो संबंधित बस चालकों के खिलाफ कठोरतम कार्यवाही अमल में लाई जाएगी जिसका कढ़ाई से अनुपालन करना सुनिश्चित करें यह आदेश वरिष्ट केंद्र प्रभारी राठ तथा परिवहन विभाग झांसी द्वारा दिया गया है। फिर भी अधिकार बस वाले दिए जा रहे आदेशों की लगातार अनदेखी करते हुए अपनी मनमानी पर उतारू है। वही ग्राम खिलारा निवासी द्रोपदी देवी पत्नी सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि 13 सितंबर मंगलवार को पति तथा बच्चे का इलाज कराने के लिए झांसी गये लेकिन बस गांव से नही आने से ग्राम अटारन फोरलेन से प्राईवेट यात्री बस से जाना पड़ा वापसी में जब झांसी बस स्टैंड से दोपहर तीन बजे दतिया छतरपुर निजी बस में सवार होकर आये तो चालक व परिचालक ने मनमाना किराया जबरन बसूल कर टिकट भी नही दिया और तो और बस को खिलारा ग्राम के पुराने रूट से नही ले जाकर पांच किलोमीटर पहले फोरलेन पर जबरन उतार दिया। जिससे हम सभी बीमार व्यक्तियों को हो रही बारिश में भीगते हुए घर आना पड़ा। वही ग्राम खिलारा निवासी अधिवक्ता नंदकिशोर द्विवेदी, रविंद्र द्विवेदी, संजीव द्विवेदी, संदीप मिश्रा, अरविन्द तिवारी, कृष्णकांत सिंह, बीरपाल सिंह परिहार, अधिवक्ता जालम प्रसाद, गोविन्ददास परिहार हरीदास रैकवार, सद्दू आदि ग्रामीणों ने झांसी मिर्जापुर राष्टीय राजमार्ग पर से ही सरकारी एवं सभी प्रकार की निजी यात्री बसों का संचालन कराये जाने की मांग जिलाधिकारी से की है। इस संबंध में निजी बस वालों का कहना है कि झांसी खजुराहो फोर लाइन पर जहां पर मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग निकला हुआ है। वहां पर फोरलेन पर संबंधित पी एन सी कंपनी द्वारा कट नही बनाया गया है और इसके आगे परसारा गांव के संपर्क मार्ग पर आधा किलोमीटर पहले कट बना होने से झांसी से विपरीत दिशा से बसों को लेकर जाना पड़ता है। जिससे सामने से आने वाले अन्य वाहनों से हादसा होने का अंदेशा बना रहता है बस संचालकों ने झांसी मिर्जापुर संपर्क मार्ग पर सिद्धपुरा गांव के पास फोरलेन पर कट बनवाए जाने की मांग संबंधित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण विभाग से की है।

संवाददाता सुरेन्द्र द्विवेदी यूपी आजतक मऊरानीपुर झांसी।

Taza Khabar

मुजफ्फरनगर, 2 अक्टूबर 2026 रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर पहुंचे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी किया शहीदों का नमन,,,,,, लोकेन्द्र गौतम ब्यूरो चीफ सहारनपुर मंडल यूपीआजतक रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राज्य आंदोलनकारियों, शहीदों के परिजनों और अन्य लोगों ने भी शहीदों को नमन किया। कार्यक्रम स्थल पर माहौल भावुक रहा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण में राज्य आंदोलनकारियों और अमर शहीदों का योगदान, संघर्ष और बलिदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि शहीदों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, उस दिशा में आगे बढ़ना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने शहीदों के बलिदान को प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बताते हुए उनके सपनों और संकल्पों को आगे बढ़ाने की बात कही। 1994 की घटना की याद में जुटे आंदोलनकारी रामपुर तिराहा उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्थल है। 2 अक्टूबर 1994 को अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी दिल्ली जा रहे थे। रामपुर तिराहा पर उन्हें रोके जाने के दौरान पुलिस फायरिंग हुई। इस घटना में सात राज्य आंदोलनकारी शहीद हुए थे और कई आंदोलनकारी घायल हुए थे। घटना के बाद रामपुर तिराहा उत्तराखंड आंदोलन के संघर्ष और बलिदान के प्रमुख प्रतीक के रूप में जाना जाने लगा। रिपोर्टों के अनुसार रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए सात आंदोलनकारियों में रविंद्र रावत उर्फ गोलू, सतेंद्र चौहान, गिरीश भदरी, राजेश लखेड़ा, सूर्य प्रकाश थपलियाल, राजेश नेगी और अशोक कुमार शामिल थे। अशोक कुमार की बाद में उपचार के दौरान मृत्यु हुई थी। हर वर्ष शहीद स्मारक पर होता है श्रद्धांजलि कार्यक्रम,,, रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पर प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को राज्य आंदोलन के शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। उत्तराखंड से राज्य आंदोलनकारी और शहीदों के परिजन भी इस अवसर पर यहां पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इससे पहले भी रामपुर तिराहा पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दे चुके हैं। शहीदों की स्मृति को स्थायी रूप देने की दिशा में कदम,,, रामपुर तिराहा कांड के सभी सात शहीदों की प्रतिमाएं शहीद स्थल पर लगाए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी इस वर्ष चर्चा रही। 2 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार सभी सात शहीदों की प्रतिमाएं लगाने के लिए पूर्व में जारी शासनादेश में संशोधन किया जाएगा। *सुरक्षा के रहे व्यापक इंतजाम* ,,, मुख्यमंत्री के रामपुर तिराहा कार्यक्रम को लेकर मुजफ्फरनगर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। कार्यक्रम स्थल के आसपास पुलिस बल तैनात रहा और यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी गई। प्रशासन की ओर से कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। रामपुर तिराहा पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम ने एक बार फिर उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए किए गए लंबे आंदोलन और उसमें अपने प्राणों की आहुति देने वाले आंदोलनकारियों के बलिदान को स्मरण कराया। शहीद स्मारक पर मौजूद लोगों ने अमर शहीदों को नमन करते हुए उनके संघर्ष और योगदान को याद किया।