April 20, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

कौशाम्बी11फरवरी24*गाय की सेवा से पूर्ण होती है 33 कोटि देवी, देवताओं की सेवा*

कौशाम्बी11फरवरी24*गाय की सेवा से पूर्ण होती है 33 कोटि देवी, देवताओं की सेवा*

कौशाम्बी11फरवरी24*गाय की सेवा से पूर्ण होती है 33 कोटि देवी, देवताओं की सेवा*

*पहले अपने धर्म को जानने के लिए गीता, भागवत ,रामायण पढ़ो तो, तुम नहीं तुम्हारी आने वाली पीढ़ी भी संस्कारी हो जायेगी*

*कौशाम्बी* सिराथू तहसील क्षेत्र के लच्क्षीपुर ग्राम सभा में चल रहे श्रीमद् भागवत उत्सव के पंचम दिन कथा व्यास –
परम् पूज्य श्री धनञ्जय दास जी महाराज ( मालूकपीठ वृन्दावन )
ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। महाराज श्री ने कहा धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे वही आज के समय में धनवान व्यक्ति है। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा ही संभव हो सकती है। पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पुतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्री कृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य गाय के गोब, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है। सभी को गौ माता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गाय की सेवा से 33 कोटि देवी देवताओं की सेवा हो
घर, घर में भी यशोदा और वह भी श्री कृष्ण का हाथ पकड़े। बड़ा विस्मय हुआ माता को। श्री कृष्ण ने देखा कि मैया ने तो मेरा असली तत्त्व ही पहचान लिया है। श्री कृष्ण ने सोचा यदि मैया को यह ज्ञान बना रहता है तो हो चुकी बाललीला, फिर तो वह मेरी नारायण के रूप में पूजा करेगी। न तो अपनी गोद में बैठायेगी, न दूध पिलायेगी और न मारेगी। जिस उद्देश्य के लिए मैं बालक बना वह तो पूरा होगा ही नहीं। यशोदा माता तुरन्त उस घटना को भूल गयीं।

महाराज ने कहा कि आज कल की युवा पीढ़ी अपने धर्म अपने भगवान को नही मानते है, लेकिन तुम अपने धर्म को जानना चाहते हो तो पहले अपने धर्म को जानने के लिए गीता, भागवत ,रामायण पढ़ो तो, तुम नहीं तुम्हारी आने वाली पीढ़ी भी संस्कारी हो जायेगी। ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोडकर गिर्राज जी की पूजा शुरू कर दी तो इंद्र ने कुपित होकर ब्रजवासियों पर मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण भगवान ने गिर्राज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का मान मर्दन किया। तब इंद्र को भगवान की सत्ता का अहसास हुआ और इंद्र ने भगवान से क्षमा मांगी व कहा हे प्रभु मैं भूल गया था की मेरे पास जो कुछ भी है वो सब कुछ आप का ही दिया है। कथा में राधे कृष्ण गोविंद गोपाल राधे राधे भजन ऊपर भक्तों ने खूब आनंद उठाया सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
आज कथा मे परम् पूज्य श्री पुरसोत्तम दास जी महाराज अयोध्या धाम, आचार्य श्री सत्यनरायण जी उड़ीसा, आचार्य श्री सुनील जी संस्कृत विद्यालय मंझनपुर, दिलीप मिश्रा हिंदू वाहिनी संघ के जिला प्रभारी शैलेंद्र द्विवेदी, राजु ओझा एडवोकेट, आदि मौजूद रहे।

Taza Khabar