[9/13, 8:18 PM] Ram Prakash Upaajtak: *पिता ने परिजनों के साथ मिलकर पुत्री को बनाया बंधक कराया भूमि का बैनामा*
*पति व बच्चों को जान से मारने की धमकी दे बैंक से निकलाये एक लाख रुपये*
*बिधूना,औरैया।* पुत्री ने अपने पिता समेत परिजनों पर जबरन बंधक बनाकर और बच्चों और पति को जान से मारने की धमकी देकर बैंक से एक लाख रुपए निकलवाने के साथ उसकी भूमि का बैनामा भी कराने की पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की गुहार लगाई है। घटना के कई दिन बाद भी पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने का भी पीड़िता द्वारा आरोप लगाते हुए जल्द न्याय न मिलने पर पुलिस के उच्चाधिकारियों व मुख्यमंत्री से शिकायत करने की बात कही है।
बिधूना तहसील के अंतर्गत बेला थाना क्षेत्र के ग्राम दलीपपुर बांधमऊ निवासी सरोजिनी पाल पत्नी धर्मवीर ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उसका पति दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है वह अपने बच्चों के साथ घर पर रहती है। तभी मौका पाकर उसके पिता रामपाल पुत्र रुस्तम अपने भाई रामसनेही व अमर सिंह बबलू बलवीर विश्राम श्यामसुंदर रामविलास आज परिवारी जनों के साथ आए और एक राय होकर उसे दबोच लिया और तमंचा दिखाकर उसका मोबाइल छीन लिया और उसके बच्चों को घर के कमरे में बंद कर दिया। शिकायती पत्र में कहा गया है कि बाद में उक्त लोग उसे बंधक बना कर बांधमऊ ले गए जहां शारीरिक व मानसिक प्रताड़ित करने के साथ बच्चों व पति को जान से मारने की धमकी देकर बड़ौदा यूपी बैंक बांधमऊ शाखा से उसके खाते से 100000 रुपए निकलवा लिए बाद में यह रुपए बलवीर व रामविलास ने ले लिए और उसे सीधे तहसील कार्यालय लाए जहां बच्चों व पति को जान से मारने की धमकी देकर जबरन उससे उसकी भूमि का बैनामा करा लिया। बाद में उपरोक्त लोगों के चंगुल से मुक्त होने के बाद उसने अपने पति को सूचना दी जिस पर उसके पति आए किंतु उपरोक्त आरोपी पुलिस से शिकायत करने पर जान से मारने की भी धमकियां दे रहे हैं। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। वही इस संबंध में पीड़िता का कहना है कि कई दिन से कार्रवाई के लिए चक्कर काटने के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। यदि जल्द आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई ना हुई तो वह इसकी शिकायत मुख्यमंत्री व पुलिस के उच्चाधिकारियों से करेगी।
[9/13, 8:18 PM] Ram Prakash Upaajtak: *दलितों ने दबंगों द्वारा प्लाटों पर कब्जा करने की पुलिस से की शिकायत*
*बिधूना,औरैया।* चिमकुनी गांव के दो दलितों ने अपने ही गांव के दंवगों पर नींव तोड़कर जबरन प्लाटों पर कब्जा करने और विरोध करने पर गाली- गलौज कर मारपीट का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की गुहार लगाई है। पुलिस ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अछल्दा थाना क्षेत्र के ग्राम चिमकुनी निवासी दलित आनंद कुमार बाल्मीक पुत्र इतवारी लाल व आसाराम पुत्र मंटोलू ने पुलिस को दिए शिकायतीपत्रों में आरोप लगाया है कि उन लोगों के लगभग 15 वर्ष पुराने प्लाटों पर जिन पर नींव भरी हुई है और उस पर उनके पशु बांधे जाते हैं, जिस पर उसके ही गांव निवासी अनिल कुमार पाठक लल्लू पुत्रगण मेवालाल व पुत्र जहरीले आदि दबंगई के बल पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं, और विरोध करने पर गाली-गलौज कर मारपीट पर आमादा हो रहे हैं। पीड़ित दलितों की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है।
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मुजफ्फरनगर, 2 अक्टूबर 2026 रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर पहुंचे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी किया शहीदों का नमन,,,,,, लोकेन्द्र गौतम ब्यूरो चीफ सहारनपुर मंडल यूपीआजतक रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राज्य आंदोलनकारियों, शहीदों के परिजनों और अन्य लोगों ने भी शहीदों को नमन किया। कार्यक्रम स्थल पर माहौल भावुक रहा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण में राज्य आंदोलनकारियों और अमर शहीदों का योगदान, संघर्ष और बलिदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि शहीदों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, उस दिशा में आगे बढ़ना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने शहीदों के बलिदान को प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बताते हुए उनके सपनों और संकल्पों को आगे बढ़ाने की बात कही। 1994 की घटना की याद में जुटे आंदोलनकारी रामपुर तिराहा उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्थल है। 2 अक्टूबर 1994 को अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी दिल्ली जा रहे थे। रामपुर तिराहा पर उन्हें रोके जाने के दौरान पुलिस फायरिंग हुई। इस घटना में सात राज्य आंदोलनकारी शहीद हुए थे और कई आंदोलनकारी घायल हुए थे। घटना के बाद रामपुर तिराहा उत्तराखंड आंदोलन के संघर्ष और बलिदान के प्रमुख प्रतीक के रूप में जाना जाने लगा। रिपोर्टों के अनुसार रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए सात आंदोलनकारियों में रविंद्र रावत उर्फ गोलू, सतेंद्र चौहान, गिरीश भदरी, राजेश लखेड़ा, सूर्य प्रकाश थपलियाल, राजेश नेगी और अशोक कुमार शामिल थे। अशोक कुमार की बाद में उपचार के दौरान मृत्यु हुई थी। हर वर्ष शहीद स्मारक पर होता है श्रद्धांजलि कार्यक्रम,,, रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पर प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को राज्य आंदोलन के शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। उत्तराखंड से राज्य आंदोलनकारी और शहीदों के परिजन भी इस अवसर पर यहां पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इससे पहले भी रामपुर तिराहा पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दे चुके हैं। शहीदों की स्मृति को स्थायी रूप देने की दिशा में कदम,,, रामपुर तिराहा कांड के सभी सात शहीदों की प्रतिमाएं शहीद स्थल पर लगाए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी इस वर्ष चर्चा रही। 2 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार सभी सात शहीदों की प्रतिमाएं लगाने के लिए पूर्व में जारी शासनादेश में संशोधन किया जाएगा। *सुरक्षा के रहे व्यापक इंतजाम* ,,, मुख्यमंत्री के रामपुर तिराहा कार्यक्रम को लेकर मुजफ्फरनगर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। कार्यक्रम स्थल के आसपास पुलिस बल तैनात रहा और यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी गई। प्रशासन की ओर से कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। रामपुर तिराहा पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम ने एक बार फिर उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए किए गए लंबे आंदोलन और उसमें अपने प्राणों की आहुति देने वाले आंदोलनकारियों के बलिदान को स्मरण कराया। शहीद स्मारक पर मौजूद लोगों ने अमर शहीदों को नमन करते हुए उनके संघर्ष और योगदान को याद किया।
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