इलाहबाद 31 मार्च 26*सास-ससुर का भरण-पोषण करना बहू की कानूनी जिम्मेदारी नहीं है- हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि सास-ससुर का भरण-पोषण करना बहू की कानूनी जिम्मेदारी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि “नैतिक जिम्मेदारी” और “कानूनी जिम्मेदारी” अलग-अलग होती हैं, और कानून में जहां स्पष्ट प्रावधान नहीं है, वहां किसी पर बाध्यता नहीं डाली जा सकती।
मामला एक बुजुर्ग दंपती से जुड़ा था, जिन्होंने अपने बेटे की मौत के बाद बहू से गुजारा भत्ता मांगा था। हालांकि, फैमिली कोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी और स्पष्ट किया कि संबंधित कानून (धारा 144) में सास-ससुर को इस दायरे में शामिल नहीं किया गया है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि रिश्तों में नैतिक जिम्मेदारियों की अहमियत भले हो, लेकिन हर रिश्ते को कानूनी दायरे में बांधना जरूरी नहीं होता।

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