अयोध्या २३ जनवरी २६*मख़्दूम साहब की दरगाह व ख़ानक़ाह पर धूमधाम से मनाया गया बसंत
सद्भाव, इंसानियत, अमन और प्रेम का संदेश दे रही मख़्दूम साहब की दरगाह
भेलसर(अयोध्या)रुदौली के सुप्रसिद्ध सूफ़ी बुज़ुर्ग हज़रत मख़्दूम अब्दुल हक़ रुदौलवी की दरगाह व ख़ानक़ाह परिसर में बसंत का पर्व पूरे जोश, ख़ुशी और रूहानी माहौल के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दरगाह और ख़ानक़ाह को विशेष रूप से सजाया गया, जहाँ प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश गूंजता रहा।
कार्यक्रम के दौरान दरगाह वा ख़ानक़ाह हज़रत शैख़ुल आलम रुदौली शरीफ़ के सज्जादा नशीन शाह मोहम्मद अली आरिफ(सुब्बु मियां) ने सूफ़ी परंपरा को जीवंत करते हुए अमीर ख़ुसरो की प्रसिद्ध नज़्म को सुना।
सकल बन फूल रही सरसों
सकल बन फूल रही सरसों
अम्बवा फूटे, टेसू फूले,
कोयल बोले डार-डार,
और गोरी करत सिंगार,
मलनियाँ गढवा ले आईं कर सों,
सकल बन फूल रही सरसों
तर तरह के फूल खिलाए,
ले गढवा हाथन में आए,
निजामुद्दीन के दरवज्जे पर,
आँवर कह गए आशिक़ रंग,
और बीत गए बरसों,
सकल बन फूल रही सरसों
नज़्म की अदायगी से माहौल रूहानियत और सूफ़ियाना रंग में रंग गया। इस अवसर पर ख़ानदान के सभी ख़ानवादे मौजूद रहे और बसंत की खुशियों में शरीक हुए।
बसंत उत्सव के माध्यम से दरगाह परिसर से समाज में अमन, मोहब्बत, आपसी सौहार्द और इंसानियत का पैग़ाम दिया गया। श्रद्धालुओं और अकीदतमंदों ने बसंत की मुबारकबाद पेश करते हुए मुल्क में शांति और भाईचारे की दुआ की।

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