सिंगरौली 21 अक्टूबर 26*SDM देवसर की भूमिका पर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा कथित खेल?
🔴 फर्जी बाबू के कारनामे उजागर होने का दावा! कई सरपंचों की शिकायतों के बावजूद SDM देवसर की भूमिका पर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा कथित खेल?
सिंगरौली में प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल, थाने से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायतें पहुंचने का दावा; अब नए कलेक्टर से कार्रवाई की उम्मीद
देवसर, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के देवसर में कथित फर्जी बाबूगिरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि SDM कार्यालय में एक निजी व्यक्ति की भूमिका सरकारी कामकाज में बनी हुई है। वहीं, उसके बेटे द्वारा गाड़ी चलाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस मामले में पहले भी कई सरपंचों और अन्य लोगों ने संबंधित थाने एवं अधिकारियों के समक्ष आवेदन दिए थे। इसके बावजूद यदि आरोपों की जांच नहीं हुई है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है।
अब मामला नए कलेक्टर तक पहुंचने और कार्रवाई के आश्वासन की चर्चा के बाद लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि जब शिकायतें पहले भी की गई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई हुई? क्या SDM कार्यालय में निजी व्यक्तियों की भूमिका की जांच होगी? और यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
📌 कई सरपंचों और थाने में शिकायत दिए जाने का दावा
मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कथित फर्जी बाबूगिरी का मुद्दा नया नहीं है। आरोप है कि कई सरपंचों और अन्य लोगों ने पहले भी संबंधित व्यक्ति की भूमिका को लेकर शिकायतें की थीं। थाने में आवेदन दिए जाने की बात भी कही जा रही है।
ऐसे में प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि पूर्व में प्राप्त शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई। क्या संबंधित व्यक्तियों के बयान लिए गए? क्या किसी स्तर पर जांच कराई गई? क्या शिकायतों को संबंधित विभाग तक भेजा गया?
यदि पहले से शिकायतें लंबित हैं, तो उनकी स्थिति सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि लोगों को पता चल सके कि प्रशासनिक स्तर पर मामले में क्या प्रगति हुई है।
🏛️ SDM देवसर की भूमिका पर उठ रहे सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि SDM देवसर के कार्यालय में संबंधित निजी व्यक्ति की भूमिका को लेकर सवाल उठने के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति के बेटे से गाड़ी चलवाने का काम लिया जा रहा है।
इन आरोपों के बीच महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित व्यक्ति की वास्तविक नियुक्ति या पद क्या है? क्या वह सरकारी कर्मचारी है या निजी व्यक्ति? यदि वह सरकारी कर्मचारी नहीं है, तो कार्यालय में उसकी भूमिका क्या है और उसे किसके आदेश से काम करने की अनुमति मिली है?
इसी तरह, वाहन चलाने वाले व्यक्ति की नियुक्ति, कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारी को लेकर भी प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए होते हैं। ऐसे में वहां कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका, अधिकार और जिम्मेदारी स्पष्ट होना आवश्यक है।
यदि किसी निजी व्यक्ति को नियमों के विपरीत सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी जा रही है, तो यह जांच का विषय है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
⚠️ बूढ़ाडांड़ पंचायत में पुलिया निर्माण विवाद ने भी बढ़ाए सवाल
इस पूरे मामले के बीच ग्राम पंचायत बूढ़ाडांड़ के दस्तावेजों में सेमरा नदी पर पुलिया निर्माण कार्य बाधित किए जाने की शिकायत भी सामने आई है।
ग्राम पंचायत की ओर से जारी पत्रों के अनुसार, डीएमएफ मद से बेंचाटोला क्षेत्र में पुलिया का निर्माण कराया जा रहा था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की गई और मजदूरों को काम बंद करने के लिए कथित रूप से धमकाया गया।
दस्तावेजों में 1 जून 2026 को निर्माण स्थल पर विवाद होने तथा 2 जून 2026 को थाना जियावन को आवेदन दिए जाने का उल्लेख मिलता है।
एक अन्य शिकायत में 8 जुलाई 2026 को निर्माण स्थल पर विवाद, मारपीट, मोबाइल फोन छीनने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप दर्ज हैं। शिकायत के अनुसार, इस घटना के कारण निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ।
पंचायत की ओर से संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को मामले की जानकारी देने का उल्लेख भी दस्तावेजों में है।
इन शिकायतों के आधार पर सवाल उठता है कि निर्माण कार्य में बाधा और कथित धमकी के आरोपों पर संबंधित विभागों ने क्या कदम उठाए हैं। क्या पुलिस ने मामले में जांच की? क्या निर्माण कार्य को निर्बाध रूप से पूरा कराने के लिए प्रशासन ने कोई निर्देश जारी किया?
🔴 नए कलेक्टर के आश्वासन के बाद कार्रवाई का इंतजार
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मामला नए कलेक्टर के समक्ष उठाया गया है और कार्रवाई का आश्वासन मिला है। ऐसे में अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों का जवाब जांच के माध्यम से ही मिल सकता है। प्रशासन को कथित फर्जी बाबूगिरी, कार्यालय में निजी व्यक्तियों की भूमिका, पूर्व शिकायतों और पंचायत निर्माण विवाद से जुड़े सभी पहलुओं को गंभीरता से देखना चाहिए।
प्रशासन से सीधे सवाल
1. कथित फर्जी बाबूगिरी को लेकर पहले दिए गए आवेदनों पर क्या कार्रवाई हुई?
2. क्या कई सरपंचों और अन्य शिकायतकर्ताओं की शिकायतों का रिकॉर्ड उपलब्ध है?
3. SDM कार्यालय में संबंधित व्यक्ति की नियुक्ति अथवा अधिकृत भूमिका क्या है?
4. उसके बेटे द्वारा गाड़ी चलाए जाने के संबंध में नियमों के अनुसार क्या व्यवस्था है?
5. बूढ़ाडांड़ पंचायत के पुलिया निर्माण विवाद में पुलिस जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
6. क्या नए कलेक्टर के निर्देश पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी?
जनता को जवाब का इंतजार
देवसर में उठ रहे इन सवालों के बीच जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।
अब देखना यह है कि नए कलेक्टर के आश्वासन के बाद प्रशासन कब तक जांच शुरू करता है और शिकायतकर्ताओं को कब तक जवाब मिलता है।
नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क
जैसा दिखेगा, वैसा छपेगा।
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