सुल्तानपुर ३०मयी २६ * स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं जनोन्मुखी बनाने पर जोर,लंबित अनुदानों पर जिलाधिकारी ने जताई नाराजगी, सोमवार तक कार्रवाई का अल्टीमेटम
जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक में दिए महत्वपूर्ण निर्देश
सुलतानपुर, 30 मई/जिलाधिकारी श्री इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता में मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा हेतु जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारीगण व समस्त सीएचसी अधीक्षक स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के प्रारम्भ में जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित सभी कार्यक्रमों का अंतिम उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने सभी विभागों को समन्वित एवं परिणामोन्मुखी कार्यशैली अपनाने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन गांधीजी के ट्रस्टिशिप मॉडल की भावना के अनुरूप करें तथा समावेशी विकास को प्राथमिकता दें।
बैठक में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम, कुपोषण, कम्युनिटी प्रोसेस, परिवार नियोजन, आभा, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), क्वालिटी एश्योरेंस, आयुष्मान भारत, एनटीईपी, नियमित टीकाकरण एवं अन्य स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अधीक्षकों से उनके यहां उपलब्ध सुविधाओं एवं आवश्यक संसाधनों की जानकारी प्राप्त की। सीएचसी लम्भुआ एवं जयसिंहपुर द्वारा बताया गया कि बच्चों के परीक्षण हेतु वेट एवं हाइट मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने सभी स्वास्थ्य इकाइयों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) में भर्ती बच्चों के निर्धारित अवधि तक न रोके जाने के संबंध में जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने कारणों की समीक्षा की। उन्होने निर्देशित किया कि चिन्हित बच्चों को 14 से 20 दिन तक रख कर उनकी मॉनिटरिंग किया जाना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने सीएचसी अखण्डनगर को निर्देशित किया कि बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास की नियमित निगरानी की जाए तथा चिन्हित बच्चों को स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराया जाए।
बैठक में आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं आशा कार्यकर्त्रियों के मध्य बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्यों के बेहतर क्रियान्वयन हेतु संवाद और समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सीएचसी कुड़वार को निर्देशित किया कि आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के मध्य संचार संबंधी कमियों को दूर किया जाए।
जिलाधिकारी ने ‘ट्रिपल-111’ बैठकों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी सीएचसी अधीक्षकों को निर्देशित किया कि वे खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ) एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के साथ नियमित बैठकें आयोजित करें। जिला कार्यक्रम अधिकारी को इन बैठकों की मॉनिटरिंग करने तथा अगली शासी निकाय बैठक से पूर्व इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण एवं बाल विकास से जुड़े सभी विभाग 360 डिग्री दृष्टिकोण अपनाते हुए एकीकृत प्रशासन की भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने निर्देशित किया कि अवशेष 48 आंगनबाड़ी केन्द्रों को शीघ्र क्रियाशील किया जाए तथा सभी केन्द्रों को स्मार्ट क्लास, टीवी एवं प्रोजेक्टर जैसी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए। प्रत्येक सुपरवाइजर को एक मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्र का प्रस्तुतीकरण अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में विशेष आवश्यकता वाले 21 बच्चों के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि ऐसे सभी बच्चों की व्यक्तिगत देखभाल योजना (डिटेल केयर प्लान) तैयार की जाए तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सीडीपीओ एवं सुपरवाइजरों को अपने-अपने विकास खण्डों की विस्तृत प्रस्तुति (पीपीटी) अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अवगत कराया कि मई माह में विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से 29 बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराया गया है। उन्होंने बताया कि आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, आरबीएसके टीम एवं चिकित्सकों के सहयोग से कुपोषित बच्चों की पहचान एवं उपचार का कार्य निरंतर किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि उपलब्ध संसाधनों एवं वास्तविक आवश्यकताओं के मध्य अंतर (गैप) की पहचान कर उसका समयबद्ध निस्तारण किया जाए।
आरबीएसके कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने स्कूलों में की जा रही स्वास्थ्य जांच गतिविधियों की मॉनिटरिंग रिपोर्ट अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी कार्यक्रमों में प्रशिक्षण गतिविधियों को प्राथमिकता देने तथा दैनिक प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।
बैठक के दौरान जननी शिशु सुरक्षा योजना के अंतर्गत लंबित अनुदानों (ग्रांट) का मामला सामने आने पर जिलाधिकारी ने गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एनएचएम के लेखाकार को निर्देशित किया कि सोमवार तक लंबित प्रकरणों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि 15 दिनों के भीतर समस्त लंबित भुगतान पूर्ण कर लिए जाएं।
जिलाधिकारी ने जनपद में सीटी स्कैन सेवाओं में आ रही कमियों का भी संज्ञान लिया तथा आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। आगामी मानसून एवं डेंगू के संभावित खतरे को देखते हुए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को अभी से व्यापक तैयारी करने तथा जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
टीबी उन्मूलन की दिशा में चलाए जा रहे 100 दिवसीय अभियान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने तथा चिन्हित मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त जनपद के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी विभाग समन्वित प्रयास करें।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के संबंध में उन्होंने आयुष विभाग को 21 जून को व्यापक स्तर पर योग कार्यक्रम आयोजित करने तथा अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री आरोग्य मेले को और अधिक प्रभावी एवं जनोपयोगी बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का वास्तविक लाभ समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सभी अधिकारियों से संवेदनशीलता, जवाबदेही एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
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जिला सूचना कार्यालय सुलतानपुर द्वारा जनहित में प्रसारित।

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