May 20, 2026

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सुल्तानपुर20मई26*ऐतिहासिक धरोहर 'आनंद निकेतन विद्यालय' अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू

सुल्तानपुर20मई26*ऐतिहासिक धरोहर ‘आनंद निकेतन विद्यालय’ अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू

सुल्तानपुर20मई26*ऐतिहासिक धरोहर ‘आनंद निकेतन विद्यालय’ अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू, जिला प्रशासन से जीर्णोद्धार की गुहार

**सुलतानपुर।** सन 1962, जब देश पर चीनी आक्रमण हुआ था, तब मातृभूमि की रक्षा के लिए तत्कालीन भारत सरकार की एक अपील पर पूरा देश उठ खड़ा हुआ था। सुलतानपुर की जनता ने भी अपनी देशभक्ति का परिचय देते हुए वार फंड (युद्ध कोष) में बढ़-चढ़कर योगदान दिया। महिलाओं ने अपने सुहाग की निशानी मंगलसूत्र, सोना-चांदी और पुरुषों ने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी देश के नाम कर दी थी। युद्ध रुकने के बाद जब दान का सिलसिला थमा, तो सुलतानपुर के तत्कालीन जिला प्रशासन के पास जनता द्वारा समर्पित भारी-भरकम धनराशि बची रह गई।
प्रशासन ने इस पावन धन को जनहित के कार्यों में लगाने का एक बेहतरीन फैसला किया। इस राशि से तत्कालीन ‘पंत व्यायाम मंदिर’ (वर्तमान पंत स्टेडियम) के मध्य में एक आधुनिक व्यायामशाला का निर्माण कराया गया। साथ ही, जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दो महत्वपूर्ण कमेटियों का गठन हुआ। इसी के तहत सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी उपन्यास ‘आनंद मठ’ की प्रेरणा से **’आनंद निकेतन विद्यालय’** की स्थापना की गई।
### शिक्षा के बाजारीकरण की भेंट चढ़ी ऐतिहासिक विरासत
अपने शुरुआती दौर में ‘आनंद निकेतन विद्यालय’ जनपद का सबसे प्रतिष्ठित इंग्लिश मीडियम स्कूल हुआ करता था, जहाँ प्रवेश पाना गौरव की बात मानी जाती थी। शहर के अति महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित यह विद्यालय कभी सुलतानपुर की शान था। लेकिन आज, शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण और व्यापारीकरण के दौर में इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले विद्यालय को पूरी तरह उपेक्षित छोड़ दिया गया है।
> जहाँ एक तरफ शिक्षा माफिया कॉन्वेंट स्कूलों की बड़ी-बड़ी श्रृंखलाएं खड़ी कर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं, वहीं देश के लिए दिए गए दान से खड़ा हुआ यह पारंपरिक स्कूल समय की धूल फांक रहा है। वर्तमान में विद्यालय का हाल बेहाल है; न यहाँ पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही छात्र। यह ऐतिहासिक धरोहर अमूमन बंद ही रहती है।
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### नए जिलाधिकारी ‘सरदार इंद्रजीत सिंह’ से जगी उम्मीदें
जनपद के वर्तमान जिलाधिकारी सरदार इंद्रजीत सिंह जी के बारे में क्षेत्र में काफी सकारात्मक चर्चाएं हैं। उन्होंने लगभग 20 लाख रुपये महीने का कॉर्पोरेट पैकेज ठुकराकर, गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं और गुरु गोविंद सिंह जी के आदर्शों को सर्वोपरि मानते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के जरिए देश सेवा का मार्ग चुना है। उनके इस सेवा संकल्प की सराहना करते हुए जदयू (प्रबुद्ध प्रकोष्ठ) उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष ने स्वयं जिले व प्रदेश की जनता की ओर से उनका स्वागत और अभिनंदन किया है।
### संज्ञान न लेने पर आंदोलन की चेतावनी
जनता और प्रबुद्ध वर्ग ने जिलाधिकारी (जो कि पदेन इस विद्यालय के अध्यक्ष भी हैं) से तत्काल प्रभाव से इस गंभीर मामले का संज्ञान लेने का पुरजोर अनुरोध किया है। मांग की गई है कि इस ऐतिहासिक और गौरवमयी विद्यालय को दोबारा इसका पुराना और प्रतिष्ठित स्वरूप वापस दिलाया जाए।
इसके साथ ही यह स्पष्ट चेतावनी भी दी गई है कि यदि इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मजबूरन जिले की जनता और शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।