May 16, 2026

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सादुलपुर १६ मई २६ * तेज धूप और गर्मी से बेहाल दुधारू पशु, घट रहा दुग्ध उत्पादन, लू और तपिश का असर पशुपालन पर भी पड़ा भारी

सादुलपुर १६ मई २६ * तेज धूप और गर्मी से बेहाल दुधारू पशु, घट रहा दुग्ध उत्पादन, लू और तपिश का असर पशुपालन पर भी पड़ा भारी, पशुपालकों को बरतनी होगी विशेष सावधानी

सादुलपुर १६ मई २६ * तेज धूप और गर्मी से बेहाल दुधारू पशु, घट रहा दुग्ध उत्पादन, लू और तपिश का असर पशुपालन पर भी पड़ा भारी, पशुपालकों को बरतनी होगी विशेष सावधानी

सादुलपुर। अंचल में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी, तेज धूप और लू के कारण जहां आमजन का जनजीवन प्रभावित हो रहा है वहीं दुधारू पशुओं पर भी इसका प्रतिकूल असर देखने को मिल रहा है। अत्यधिक तापमान और गर्म हवाओं के चलते दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन लगातार घटता जा रहा है, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में हरे चारे और पर्याप्त पानी की कमी के कारण पशु कमजोर पड़ रहे हैं तथा उनका खान-पान भी प्रभावित हो रहा है।
राधा बड़ी उप स्वास्थ्य केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. नीतू फोगाट ने बताया कि गर्मी के मौसम में पशु सामान्य दिनों की तुलना में खाना-पीना कम कर देते हैं। इसके चलते उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और दूध की मात्रा में कमी आने लगती है। उन्होंने बताया कि तेज धूप एवं लू के कारण पशुओं में बुखार, कमजोरी, डिहाइड्रेशन और अन्य बीमारियों की आशंका बनी रहती है। ऐसे मौसम में पशुपालकों को अपने पशुओं की विशेष देखभाल करने की आवश्यकता है।
डॉ. फोगाट ने बताया कि पशुओं को गर्मी और लू से बचाने के लिए उन्हें छायादार एवं हवादार स्थान पर बांधना चाहिए। पशुशाला में पर्याप्त हवा और ठंडक की व्यवस्था होना जरूरी है। पशुओं को दिन के अधिक गर्म समय में बाहर नहीं ले जाना चाहिए तथा सुबह और शाम ठंडे पानी से नहलाने से उन्हें राहत मिलती है। साथ ही पशुओं को भरपूर मात्रा में स्वच्छ पानी और संतुलित आहार देना चाहिए ताकि उनके शरीर में पानी और पोषण की कमी न हो।
उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में हरे चारे की उपलब्धता कम होने के कारण दुग्ध उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में पशुपालकों को पशुओं के आहार में पौष्टिक तत्वों के साथ खनिज मिश्रण एवं आवश्यक जड़ी-बूटियां भी शामिल करनी चाहिए ताकि पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे और दूध उत्पादन में अत्यधिक गिरावट न आए।
ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालक नेतराम मेहरा ने बताया कि गर्मी के मौसम में पशुओं की नियमित साफ-सफाई बेहद जरूरी है। पशुओं को नियमित रूप से खुरैरा करना चाहिए तथा उनके खाने-पीने के बर्तन, खौर और ठाण आदि साफ रखने चाहिए। पशुशाला की छत पर पुआल बिछाने से भी गर्मी का असर कुछ कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को गर्मी के मौसम में पशुओं को हीट स्ट्रोक और लू से बचाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
क्षेत्र के पशुपालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी और घटते दुग्ध उत्पादन से आर्थिक असर भी पड़ रहा है। पशुपालकों ने प्रशासन से पशुओं के लिए पानी एवं हरे चारे की उचित व्यवस्था करवाने की मांग की है ताकि गर्मी के इस दौर में पशुधन को सुरक्षित रखा जा सके।

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