[11/03, 13:40] +91 97834 14079: होम डिलीवरी के नाम पर हो रही तस्करी!
एक रिटायर्ड सीनियर आईपीएस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजी गोपनीय रिपोर्ट
नाम न छापने की शर्त पर बताया- होम डिलीवरी कंपनियां देश के लिए बन रही खतरा
मादक पदार्थों ही नहीं हथियार और विस्फोटक सामग्री की भी हो सकती है सप्लाई
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
जोधपुर से इस वक्त की बड़ी और बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। देश में तेजी से बढ़ रही होम डिलीवरी सेवाओं को लेकर एक गंभीर सुरक्षा खतरे की आशंका जताई गई है।
दरअसल, एक रिटायर्ड सीनियर आईपीएस अधिकारी ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को एक गोपनीय रिपोर्ट भेजी है, जिसमें दावा किया गया है कि कुछ तस्कर होम डिलीवरी नेटवर्क का दुरुपयोग कर मादक पदार्थों की सप्लाई कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, डिलीवरी मैन के रूप में काम कर रहे कुछ लोग एमडी ड्रग्स, हेरोइन, गांजा और अफीम जैसे नशीले पदार्थ देर रात तक घर-घर पहुंचा रहे हैं। तरीका बेहद चालाकी भरा बताया जा रहा है—डिलीवरी के नाम पर 500 से 700 रुपए का बिल ऑनलाइन लिया जाता है, जबकि बाकी रकम नकद में ली जाती है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों जैसलमेर और बाड़मेर सहित दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में इस तरह का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। चिंता की बात यह भी बताई गई है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में हथियार और विस्फोटक सामग्री तक की सप्लाई इसी सिस्टम के जरिए की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के बाद होम डिलीवरी का दायरा तेजी से बढ़ा है और अब देश में करीब 35 से 45 प्रतिशत सामान होम डिलीवरी के जरिए पहुंचाया जा रहा है।
ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि कानून, तकनीक और निगरानी प्रणाली को मजबूत कर इस संभावित खतरे को समय रहते रोका जाए। फिलहाल इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।
[11/03, 14:03] +91 97834 14079: सोलर प्लांट स्कीम के बहाने अडाणी ग्रुप को 4 खरब 38 अरब का बिजनेस देने का प्लान!
अब कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार में रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं को ही मिलेगी 150 यूनिट फ्री बिजली। क्योंकि भजनलाल सरकार ने फ्री बिजली की योजना में सोलर प्लांट की शर्त जोड़ दी है और इसके बाद भी फ्री बिजली ना देकर केवल सब्सिडी ही मिलेगी।
भजनलाल सरकार ने सोलर प्लांट की शर्त क्यों जोड़ी? इसकी तह में जब यूपी आज तक ने जाकर पड़ताल की तो तथ्य यह उभर कर आए कि इस योजना को लॉन्च करने के पीछे अडाणी ग्रुप को सीधे-सीधे 4 खरब 38 अरब से अधिक का बिजनेस सोलर प्लांट के नाम पर देने की भजनलाल सरकार की प्लानिंग हैं।
लाइव रिपोर्ट | जोधपुर से दिलीप कुमार पुरोहित
राजस्थान की बिजली नीति को लेकर इस वक्त सियासत गरमा गई है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि राज्य में 150 यूनिट फ्री बिजली योजना में सोलर प्लांट की शर्त जोड़कर सरकार एक बड़े औद्योगिक घराने को फायदा पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot की सरकार ने प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 150 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना शुरू की थी। उस समय करीब 1.04 करोड़ घरेलू उपभोक्ता इस योजना में रजिस्टर्ड बताए जाते हैं। लेकिन अब मौजूदा सरकार ने इस योजना को सोलर पावर से जोड़ दिया है।
मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma की सरकार का कहना है कि योजना को प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के साथ जोड़ा गया है, ताकि घरों में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा मिल सके। इसके तहत उपभोक्ताओं को सोलर प्लांट लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से करीब 50 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जाएगी।
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि सोलर प्लांट लगाने की अनिवार्यता से आम उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और मुफ्त बिजली की जगह केवल सब्सिडी ही मिलेगी। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि बड़े पैमाने पर सोलर प्लांट लगने से निजी कंपनियों को भारी फायदा हो सकता है, जिनमें प्रमुख रूप से Adani Group का नाम भी चर्चा में है। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि अडाणी ग्रुप को 4 खरब 38 अरब का बिजनेस देने का भजनलाल सरकार ने प्लान तैयार किया है। इसीलिए फ्री योजना में सोलर प्लांट की शर्त जोड़ी गई है।
राजस्थान में अनुमानित 27 लाख से अधिक उपभोक्ता ऐसे बताए जा रहे हैं जो सोलर योजना के पात्र हो सकते हैं। यदि बड़ी संख्या में लोग सोलर सिस्टम लगाते हैं तो इससे हजारों करोड़ रुपये का बाजार तैयार हो सकता है। और इस समय अडाणी ग्रुप का बाजार में कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है, इसलिए सीधा-सीधा अडाणी ग्रुप को फायदा होगा।
वहीं सरकार का पक्ष है कि सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देना भविष्य की जरूरत है और इससे बिजली बिल कम होगा तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में बड़ा सवाल बन सकता है कि क्या यह योजना वास्तव में जनता को राहत देगी या फिर इससे निजी कंपनियों को ज्यादा फायदा होगा।

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