February 25, 2026

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अयोध्या ८ फ़रवरी २६*रामायण का पुष्पक विमान अब हक़ीक़त है!रूदौली अयोध्या के लाल सैयद क़ायम ने 21वीं सदी में उड़ाया एयरबस,

अयोध्या ८ फ़रवरी २६*रामायण का पुष्पक विमान अब हक़ीक़त है!रूदौली अयोध्या के लाल सैयद क़ायम ने 21वीं सदी में उड़ाया एयरबस,

अयोध्या ८ फ़रवरी २६*रामायण का पुष्पक विमान अब हक़ीक़त है!रूदौली अयोध्या के लाल सैयद क़ायम ने 21वीं सदी में उड़ाया एयरबस,

एक्सहिकॉन के साथ रची इतिहास की नई उड़ान

भेलसर(अयोध्या)इंसानियत, तहज़ीब और अच्छी फ़िक्र की रौशन पहचान अयोध्या और अयोध्या के उसी सांस्कृतिक ताने-बाने का एक सादा, मगर गहरा नाम है—रुदौली।
यहीं से उठी वह कहानी, जिसने सदियों पुरानी कल्पना को 21वीं सदी की ताबीर बना दिया—एक ऐसी उड़ान, जो दिल को छूती है और सोच को आसमान देती है।
इस ऐतिहासिक मोड़ पर दो नाम साथ-साथ चमकते हैं—सैयद क़ायम और उनकी कंपनी Exhicon Events Media Solutions Limited।
एक नाम अयोध्या की मिट्टी से जुड़ा, दूसरा आधुनिक भारत की कॉर्पोरेट उड़ान का प्रतीक—और दोनों मिलकर रचते हैं तरक्की की एक नई इबारत।

रुदौली की मिट्टी, आसमान की मंज़िल

सैयद क़ायम रुदौली, अयोध्या के रहने वाले हैं। यहीं उनकी तालीम हुई, यहीं उनकी तरबियत ने आकार लिया। यह वही धरती है, जहाँ इंसानियत और ज़िम्मेदारी साथ-साथ चलती हैं। इसी संस्कार ने सिखाया कि ऊँचा उड़ना है तो जड़ों से जुड़े रहकर उड़ो—और अपनी कामयाबी को अपनी मिट्टी की पहचान बनाओ।
आज जब United Helicharters Private Limited (UHPL) के बेड़े में एयरबस H125 शामिल होता है, तो यह सिर्फ़ एक एविएशन अपडेट नहीं रहता। यह उस सोच की जीत बन जाता है, जो कहती है कि अयोध्या आस्था का ही नहीं, आधुनिकता और तकनीकी प्रगति का भी केंद्र बन सकती है।

रामायण का पुष्पक विमान—कथा से हक़ीक़त तक

रामायण में पुष्पक विमान केवल एक उड़न खटोला नहीं था।वह मर्यादा की विजय, न्याय की वापसी और सभ्यता के उत्कर्ष का प्रतीक था।
सदियों तक यह हमारी कथाओं में रहा—सुना गया, समझा गया, मगर देखा नहीं गया।

21वीं सदी में, उसी प्रतीक को हक़ीक़त की शक्ल मिली

जब रुदौली अयोध्या के लाल सैयद क़ायम ने उस कल्पना को आधुनिक तकनीक, अनुशासन और वैश्विक मानकों से जोड़ दिया।
एयरबस H125 आज उसी पुष्पक विमान की आधुनिक ताबीर बनकर आसमान में उड़ता है—
एक ऐसा संदेश लेकर कि कथाएँ तब इतिहास बनती हैं, जब उन्हें कर्म का सहारा मिलता है।

एक्सहिकॉन से UHPL तक—विज़न की उड़ान

एक्सहिकॉन इवेंट्स मीडिया सॉल्यूशंस लिमिटेड की सहायक कंपनी UHPL का यह विस्तार
एसेट-बैक्ड ग्रोथ, ऑपरेशनल कंट्रोल और दीर्घकालिक दृष्टि का प्रमाण है।
यह साझेदारी और नेतृत्व दिखाता है कि भारतीय कंपनियाँ अब सिर्फ़ ज़मीन पर नहीं,
आसमान में भी अपनी मज़बूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं।

पहचान जो ज़मीन से मिलती है

राजपथ चैनल के राजनीतिक विश्लेषक सैयद क़ासिम के छोटे भाई होने के बावजूद,
सैयद क़ायम ने अपनी पहचान किसी परिचय से नहीं,बल्कि अपने काम, अपनी सोच और अपनी खामोश मेहनत से बनाई है।
आसमान छू लेने के बाद भी उनका रिश्ता रुदौली और अयोध्या से उतना ही मज़बूत है वे आज भी अक्सर लौटते हैं,
यह जताने कि उड़ान कितनी भी ऊँची हो, पहचान अपनी मिट्टी से ही मिलती है।

अयोध्या की नई तस्वीर

अयोध्या ने बहुत कुछ देखा है—संघर्ष, सब्र, आस्था और बदलाव। यहाँ बहुत लोगों ने तरक्की की, नाम कमाया।
लेकिन राम की नगरी के उड़न खटोले को सैयद क़ायम ने सिर्फ़ कहानियों में नहीं छोड़ा—उसे अयोध्या की तरक्की और आधुनिकता की पहचान बना दिया।
यह कहानी सिर्फ़ एक व्यक्ति या एक कंपनी की नहीं,यह उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर, भारत की बढ़ती उड़ान
और अयोध्या की जाग्रत चेतना की कहानी है।
रामायण का पुष्पक विमान अब अतीत की गाथा नहीं—
वह 21वीं सदी की ताबीर है।

और इस ताबीर पर सैयद क़ायम और एक्सहिकॉन इवेंट्स मीडिया सॉल्यूशंस लिमिटेड ने मिलकर अयोध्या का नाम हमेशा के लिए आसमान पर भी लिख दिया है।

Taza Khabar