वेद धर्म छोड़ू नहीं, कोशिश करो हजार।
तिल तिल काटो चाहे, या गोदो अंग कटार।।
🏵️संत परंपरा के महान योगी और परम ज्ञानी, सामाजिक समरसता, शांति, भाईचारा एवम् समानता का अलख जगाने व अपनी कालजयी कृतियों से समस्त मानव के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाले संत शिरोमणि #संत_रविदास जी की #६४९वीं_जन्मजयंती पर कोटि-कोटि नमन🙏।
समतामूलक समाज की आवाज उठाने वाले संत रविदास ने हमेशा ही स्वतंत्रता, बंधुता, समाधि, करूणा, मैत्री व शील की धारणा का प्रसार व प्रचार किया। इनका जन्म वर्ष १३७७ ई० को काशी के सीर गोवर्धन में हुआ था।
जाति जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।
जात-पात के फेर मह उरझि रहे सब लोग।
मानुषता को खात है, रैदास जात का रोग।।
आज संत रविदास जी की ६४९वें अवतरण दिवस है, इनका जन्म माघ पूर्णिमा को दिन हुआ था। हमारे धर्म ग्रंथों में कर्म को प्रधान बताया है, मानसकार गोस्वामी जी ने भी कहा है…
‘कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। जो जस करहिं सो फल चाखा।।’
हमारे सनातन संस्कृति में कर्मों के आधार पर वर्ण बांटा गया था।
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