March 19, 2026

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पूर्णिया२५जनवरी२६ * विशिष्ट वक्ता एवं उद्भट साहित्यकार पंडित जनार्दन प्रसाद झा ‘द्विज’ की 122वीं जयंती सारस्वत एवं गरिमामय वातावरण में धूमधाम से मनाई गई। 

पूर्णिया२५जनवरी२६ * विशिष्ट वक्ता एवं उद्भट साहित्यकार पंडित जनार्दन प्रसाद झा ‘द्विज’ की 122वीं जयंती सारस्वत एवं गरिमामय वातावरण में धूमधाम से मनाई गई।

पूर्णिया२५जनवरी२६ * विशिष्ट वक्ता एवं उद्भट साहित्यकार पंडित जनार्दन प्रसाद झा ‘द्विज’ की 122वीं जयंती सारस्वत एवं गरिमामय वातावरण में धूमधाम से मनाई गई। 

पूर्णिया से मो० इरफ़ान कामिल की खास खबर न्यूज यूपीआजतक 

पूर्णिया *कलाभवन साहित्य विभाग के तत्वावधान में 24 जनवरी, 2026 को साहित्य भवन, पूर्णिया कॉलेज में कॉलेज के प्रथम प्राचार्य, विशिष्ट वक्ता एवं उद्भट साहित्यकार पंडित जनार्दन प्रसाद झा ‘द्विज’ की 122वीं जयंती सारस्वत एवं गरिमामय वातावरण में धूमधाम से मनाई गई। यह आयोजन साहित्य, स्मृति और श्रद्धा का भावपूर्ण संगम सिद्ध हुआ।

इस सारस्वत समारोह की अध्यक्षता बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय के प्रथम लोकपाल एवं भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष, विद्वान डॉ. शिवमुनि यादव ने की। मुख्य अतिथि के रूप में शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक, कलाभवन के उपाध्यक्ष एवं सूरज राम–गुलाबो देवी मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. डी. राम उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में कटिहार से पधारे पूर्णिया विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कामेश्वर पंकज, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. शंभू लाल वर्मा ‘कुशाग्र’, दर्शनशास्त्र विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विजयारानी, महिला कॉलेज, पूर्णिया की अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. उषा शरण, तथा सुधांशु जी के पुत्र श्री प्रियव्रत नारायण सिंह प्रमुख रूप से शामिल थे।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं द्विज जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। प्रथम सत्र में साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए आगत अतिथियों का अभिनंदन किया तथा पंडित द्विज जैसे कालजयी व्यक्तित्व को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. शिवमुनि यादव ने कहा कि द्विज जी अनुशासनप्रिय, उत्कृष्ट शिक्षक एवं उच्च कोटि के शिक्षाविद थे। उन्होंने द्विज जी से जुड़े अनेक प्रेरक संस्मरण साझा किए तथा उनके प्रसिद्ध आलोचना ग्रंथ “प्रेमचंद की उपन्यास कला” पर प्रकाश डालते हुए उनके आलोचक रूप को रेखांकित किया। साथ ही साहित्य विभाग द्वारा आयोजित इस सारस्वत समारोह की मुक्तकंठ से सराहना की।

मुख्य अतिथि डॉ. डी. राम ने कहा कि द्विज जी जैसे व्यक्तित्व हमारे समाज के नक्षत्र स्वरूप होते हैं, जिनका साहित्य और जीवन-दर्शन आज भी हमें प्रेरणा देता है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. कामेश्वर पंकज ने द्विज जी की कहानियों पर सारगर्भित वक्तव्य देते हुए उनकी प्रसिद्ध कहानी “विद्रोही के चरणों पर” की विशेष चर्चा की। उन्होंने द्विज जी को महामानव एवं विशिष्ट व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि वे मनसा, वाचा और कर्मणा एकरूप थे। उनका लेखन अपने समय के अनुरूप होने के साथ-साथ आज भी पूर्णतः प्रासंगिक है। उन्होंने द्विज जी को छायावादी युग का भावुक कवि, प्रमुख स्तंभ, अनुशासनप्रिय शिक्षाविद, आलोचक एवं सशक्त रचनाकार बताया।

डॉ. शंभू लाल वर्मा ‘कुशाग्र’ ने द्विज जी की कविताओं, उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित वक्तव्य देते हुए अनुभूति एवं अंतर्ध्वनि जैसे तत्वों की विवेचना की।
डॉ. उषा शरण ने कहा कि द्विज जी की रचनाएं कम से कम मैट्रिक स्तर तक के पाठ्यक्रम में अवश्य शामिल होनी चाहिए। इसके लिए साहित्य विभाग की ओर से शीघ्र ही बिहार सरकार को पत्र प्रेषित किया जाएगा।

इस अवसर पर प्रो. विजयारानी, श्री प्रियव्रत नारायण सिंह, श्री विजय श्रीवास्तव, डॉ. के. के. चौधरी, डॉ. सरिता झा, डॉ. ज्ञान कुमारी राय तथा सुधांशु जी के पौत्र राजवर्धन सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने द्विज जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

द्वितीय सत्र में महान कवि द्विज की स्मृति में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें यमुना प्रसाद बसाक, प्रो. गिरीश कुमार सिंह, सुनील समदर्शी, हरे कृष्ण प्रकाश, दिव्या त्रिवेदी, रानी सिंह, डॉ. निशा प्रकाश, मीना सिंह, वंदना कुमारी, रंजीत तिवारी, महेश विद्रोही, किशोर कुमार यादव, श्रीमती शल्या झा, श्री मलय कुमार झा, श्री पंकज कुमार सिंह, पवन कुमार जायसवाल, प्रियंवद जायसवाल, श्रीमती बबीता किशोरी, डॉ. कामेश्वर पंकज, डॉ. उषा शरण, प्रो. विजयारानी एवं डॉ. शंभू लाल वर्मा ‘कुशाग्र’ सहित अन्य कवियों ने काव्य पाठ किया। सभी कवियों ने विविध विषयों एवं भावनाओं से परिपूर्ण कविताओं का सस्वर पाठ कर श्रोताओं का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का मंच संचालन अधिवक्ता श्रीमती किशोरी बबीता चौधरी ने अत्यंत कुशलता, आत्मविश्वास एवं काव्यात्मक शैली में किया, जिससे संपूर्ण वातावरण रसपूर्ण एवं मय हो गया। अंत में डॉ. निरुपमा राय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस स्मृति समारोह का सफल समापन हुआ।

Taza Khabar