March 3, 2026

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मथुरा 12 जनवरी 26*दुनियां में सबसे पहले और सबसे बड़ा काम है न्यायस्थापना - अरविंद अंकुर जी* मथुरा से बृजभूषण शर्मा की खबर यूपीआजतक *शिक्षा, रोजगार, आवासीय सुविधा एवं संरक्षण प्रदान करना ही न्यायनगर कार्ययोजना का उद्देश्य - अरविंद अंकुर* *देशभर मे 15 हजार सामाजिक न्यायनगर बसाने की योजना* चित्रकूट। उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश राज्य के चित्रकूट के नजदीक सतना जिले के मझगवां तहसील में कानपुर रोड न्यायनगर का दसवां स्थापना दिवस 6 जनवरी को मनाया गया। बताते चलें न्यायस्थापना के लिए एक मॉडल दुनियाभर के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। सामाजिक विद्यालय,सामाजिक चिकित्सालय सामाजिक बस्ती एवं सामाजिक उद्यम का कार्य प्रारंभ हो चुका है। न्यायनगर में मानव सभ्यता स्थापित की जा रही है । बताते चलें कि यह स्थान भारत के सबसे गरीब स्थानों में से एक था। अब इस स्थान का प्रतिवर्ष विकास हो रहा है। वार्षिकोत्सव के अवसर पर मधुर जी ने धर्म संस्थापक संघ के संस्थापक श्री अरविंद अंकुर जी का माला पहनाकर स्वागत किया। सनत जी द्वारा संचालन किया गया। अंकुर जी ने संबोधन में बताया कि दुनिया में वास्तव में सबसे पहले और सबसे बड़ा काम न्याय स्थापना करना है। संस्था द्वारा विगत वर्षों से यहां पर एक न्यायशील ग्रामयोजना का क्रियान्वयन हेतु कार्य किया जा रहा है । अब इस क्षेत्र की जनता के दुःखों का अंत प्रारम्भ हो चुका है। जनता को यहां पर उनकी क्षमताओं के अनुसार रोजगार सुलभ होगा । देशभर मे न्यायनगर बसाने का कार्य किया जायेगा। मानवता की रक्षा के लिए न्याय का धर्म लाना होगा। न्यायरूपी धर्म को सनातन धर्म माना जाता है। न्याय को ही समुचित व्यवहार कहते हैं। न्यायशील सामाजिक व्यवस्था द्वारा न्यायसमाज के सदस्यों को उनकी मूलभूत आवश्यकता शिक्षा, रोजगार, आवासीय सुविधा एवं स्वस्थ-संरक्षण प्रदान करना ही न्यायनगर कार्ययोजना का उद्देश्य है । इस क्रांतिकारी योजना के वार्षिकोत्सव अवसर पर गुरुजी द्वारा सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रदान की गयी। इस अवसर पर उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड तमाम राज्यों से आये लोगों ने न्यायनगर का भ्रमण किया। न्याय समाज प्रभारी शैलेन्द्र यदु ने न्यायनगर की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। स्थानीय लोगों मे न्यायनगर को विकसित देखकर बहुत प्रसन्न हो रहे हैं। स्थानीय लोग अपने भविष्य को उज्जवल होते हुए देखकर हर्षित हो रहे हैं। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी चन्द्रसेन शर्मा जी ने कहा वास्तव मे न्यायसमाज की सदस्यता लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। न्याय स्थापना से ही देश की जनता को शिक्षा,रोजगार,आवासीय सुविधाएं तथा संरक्षण सुलभ हो सकता है। अन्य कोई विकल्प नहीं। न्याय के सिद्धांत पर संचालित न्यायनगर की योजनाएं अद्भुत है। इस अवसर पर अलग अलग राज्यों से आये सम्यक जी, शीला जी, संदेश जी, नलिन पांडेय जी,संजीव सिंह जी, संजीव सिकदर जी, सतीश तिवारी जी, रविन्द्र जी, रूपेश जी,लाला बहादुर यादव जी, राकेश गगन जी, डॉ अंजू जी,जयचंद पटेल जी, रामफल पाटिल जी, शशांक जी, अनुराग तिवारी जी, पुरुषोत्तम बंधू जी, नैनी जी, अपराजिता जी, अचिंत जी, छत्रपाल जी, सुशांत जी, निशांत जी, वरुण जी, सुशील शर्मा जी अभिषेक जी आदि मुख्यरूप से उपस्थित रहे।

मथुरा 12 जनवरी 26*दुनियां में सबसे पहले और सबसे बड़ा काम है न्यायस्थापना – अरविंद अंकुर जी*

मथुरा 12 जनवरी 26*दुनियां में सबसे पहले और सबसे बड़ा काम है न्यायस्थापना – अरविंद अंकुर जी*

मथुरा से बृजभूषण शर्मा की खबर यूपीआजतक

*शिक्षा, रोजगार, आवासीय सुविधा एवं संरक्षण प्रदान करना ही न्यायनगर कार्ययोजना का उद्देश्य – अरविंद अंकुर*

*देशभर मे 15 हजार सामाजिक न्यायनगर बसाने की योजना*

चित्रकूट। उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश राज्य के चित्रकूट के नजदीक सतना जिले के मझगवां तहसील में कानपुर रोड न्यायनगर का दसवां स्थापना दिवस 6 जनवरी को मनाया गया।
बताते चलें न्यायस्थापना के लिए एक मॉडल दुनियाभर के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
सामाजिक विद्यालय,सामाजिक चिकित्सालय सामाजिक बस्ती एवं सामाजिक उद्यम का कार्य प्रारंभ हो चुका है।

न्यायनगर में मानव सभ्यता स्थापित की जा रही है । बताते चलें कि यह स्थान भारत के सबसे गरीब स्थानों में से एक था। अब इस स्थान का प्रतिवर्ष विकास हो रहा है।
वार्षिकोत्सव के अवसर पर मधुर जी ने
धर्म संस्थापक संघ के संस्थापक श्री अरविंद अंकुर जी का माला पहनाकर स्वागत किया।
सनत जी द्वारा संचालन किया गया।

अंकुर जी ने संबोधन में बताया कि दुनिया में वास्तव में सबसे पहले और सबसे बड़ा काम न्याय स्थापना करना है।
संस्था द्वारा विगत वर्षों से यहां पर एक न्यायशील ग्रामयोजना का क्रियान्वयन हेतु कार्य किया जा रहा है ।
अब इस क्षेत्र की जनता के दुःखों का अंत प्रारम्भ हो चुका है। जनता को यहां पर उनकी क्षमताओं के अनुसार रोजगार सुलभ होगा । देशभर मे न्यायनगर बसाने का कार्य किया जायेगा।
मानवता की रक्षा के लिए न्याय का धर्म लाना होगा। न्यायरूपी धर्म को सनातन धर्म माना जाता है। न्याय को ही समुचित व्यवहार कहते हैं।
न्यायशील सामाजिक व्यवस्था द्वारा न्यायसमाज के सदस्यों को उनकी मूलभूत आवश्यकता शिक्षा, रोजगार, आवासीय सुविधा एवं स्वस्थ-संरक्षण प्रदान करना ही न्यायनगर कार्ययोजना का उद्देश्य है ।

इस क्रांतिकारी योजना के वार्षिकोत्सव अवसर पर गुरुजी द्वारा सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रदान की गयी।

इस अवसर पर उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड तमाम राज्यों से आये लोगों ने न्यायनगर का भ्रमण किया। न्याय समाज प्रभारी शैलेन्द्र यदु ने न्यायनगर की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी।

स्थानीय लोगों मे न्यायनगर को विकसित देखकर बहुत प्रसन्न हो रहे हैं। स्थानीय लोग अपने भविष्य को उज्जवल होते हुए देखकर हर्षित हो रहे हैं।

राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी चन्द्रसेन शर्मा जी ने कहा वास्तव मे न्यायसमाज की सदस्यता लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। न्याय स्थापना से ही देश की जनता को शिक्षा,रोजगार,आवासीय सुविधाएं तथा संरक्षण सुलभ हो सकता है। अन्य कोई विकल्प नहीं। न्याय के सिद्धांत पर संचालित न्यायनगर की योजनाएं अद्भुत है।

इस अवसर पर अलग अलग राज्यों से आये सम्यक जी, शीला जी, संदेश जी, नलिन पांडेय जी,संजीव सिंह जी, संजीव सिकदर जी, सतीश तिवारी जी, रविन्द्र जी, रूपेश जी,लाला बहादुर यादव जी, राकेश गगन जी, डॉ अंजू जी,जयचंद पटेल जी, रामफल पाटिल जी, शशांक जी, अनुराग तिवारी जी, पुरुषोत्तम बंधू जी, नैनी जी, अपराजिता जी, अचिंत जी, छत्रपाल जी, सुशांत जी, निशांत जी, वरुण जी, सुशील शर्मा जी अभिषेक जी आदि मुख्यरूप से उपस्थित रहे।

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