बाराबंकी 22दिसम्बर 25*जिस धागे कि गांठे खुल सकती है, ऊस पर कभी कैची ना चलाये-शोभित शुक्ला
बाराबंकी *तजुर्बा कहता है, अगर मनोभूमि में जहर भरा हो, तो रणभूमि में कहर मचना लाजमी है। ज़िंदगी ने अगर आज थोड़ा झुका दिया है, तो घबराइए मत…क्योंकि झुककर ही इंसान आगे बढ़ना सीखता है।”
*सुप्रभात : ब्यूरोचीफ : शोभित शुक्ला ‘शुभ’*

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