March 5, 2026

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बीकानेर25सितम्बर25*नवरात्रि में करणी माता मंदिर का दिव्य दर्शन : आस्था,रहस्य और विकास का संगम

बीकानेर25सितम्बर25*नवरात्रि में करणी माता मंदिर का दिव्य दर्शन : आस्था,रहस्य और विकास का संगम

बीकानेर25सितम्बर25*नवरात्रि में करणी माता मंदिर का दिव्य दर्शन : आस्था,रहस्य और विकास का संगम

विनोद कुमार सिंह, स्वतंत्र पत्रकार व स्तम्भकार

बीकानेर*राजस्थान की धरा शक्ति-भक्ति और लोकआस्था की गवाह रही है। बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर देशनोक स्थित करणी माता मंदिर आस्था का अद्भुत प्रतीक है। स्थानीय मान्यता के अनुसार लगभग 650 वर्ष पूर्व मां करणी का अवतरण हुआ था। उन्हें शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा का अवतार माना जाता है। विवाह के उपरांत उन्होंने सांसारिक मोह त्यागकर गुफा में तपस्या की और करीब सौ वर्ष तक कठोर तप कर 150 वर्ष तक जीवित रहीं।
करणी माता बीकानेर और जोधपुर राजघरानों की कुलदेवी हैं। बीकानेर राज्य की नींव रखने में उनका आध्यात्मिक योगदान माना जाता है। आज भी उनके चमत्कारों और आशीर्वाद की अनगिनत कथाएँ लोकजीवन में जीवित हैं।
चूहों वाला अनूठा मंदिर –
यह मंदिर ‘चूहों वाली देवी’ के रूप में विख्यात है। संगमरमर से निर्मित इस भव्य धाम का निर्माण बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। यहां लगभग 25 हज़ार चूहे, जिन्हें स्थानीय भाषा में काबा कहा जाता है, मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। यह अपने आप में अनूठा और अद्भुत रहस्य है कि इतनी बड़ी संख्या में चूहों के होने के बावजूद वे न तो किसी को नुकसान पहुंचाते हैं और न ही किसी वस्तु को कुतरते हैं।ऐसा भी माना जाता है कि करणी माता ने अपने वंशजों को 84 लाख योनियों के चक्र से मुक्त कर दिया था।उनके निधन के बाद वे पुनः काबा के रूप में इस मंदिर में जन्म लेते हैं और फिर मनुष्य योनि पाकर वंशज के रूप में जन्म ग्रहण करते हैं।सफेद चूहे का चमत्कार –
मंदिर में सफेद और काले दोनों प्रकार के चूहे रहते हैं। किंतु यदि किसी श्रद्धालु को दर्शन के समय सफेद चूहा दिखाई दे जाए तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। विश्वास है कि ऐसा होने पर भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसका जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है।
मंदिर की एक और अनूठी परंपरा यह है कि प्रसाद सबसे पहले चूहों के सामने रखा जाता है। काबा उसे चखते हैं और तत्पश्चात वही ‘झूठा प्रसाद’ भक्तों में वितरित किया जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह प्रसाद महाप्रसाद के समान पवित्र और अमूल्य माना जाता है।एक किंवदंती यह भी है कि यदि किसी भक्त से भूलवश किसी चूहे की मृत्यु हो जाए, तो उसे “चांदी का चूहा” बनवाकर मंदिर में अर्पित करना होता है,ताकि देवी का कोप टल सके।
नवरात्रि और विशेष आयोजन –
हर वर्ष नवरात्रि के अवसर पर देशनोक में भव्य मेले का आयोजन होता है। लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना,भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है।आश्विन शुक्ल सप्तमी को मां करणी का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
नवरात्रि के दौरान देशनोक का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो जाता है। .भक्तों की भीड़,चूहों की विचरण करती टोलियां और मंदिर का दिव्य आभामंडल एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करता है।
करणी माता और सामाजिक समरसता -मुगल आक्रांताओं के समय जब भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर संकट था,तब मां करणी का अवतरण हुआ।उन्होंने बीकानेर और जोधपुर राज्य की नींव मजबूत की और विभिन्न जाति-समुदायों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखी। यह मंदिर आज भी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है। देशनोक अमृत भारत स्टेशन : विकास का नया अध्याय
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ अब देशनोक तेजी से विकास की ओर भी अग्रसर है।विगत 22 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीकानेर में 24 करोड़ रुपये की लागत से बने देशनोक अमृत भारत स्टेशन का उद्घाटन किया।
यह स्टेशन न केवल यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराता है, बल्कि करणी माता मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए भी एक वरदान है। विस्तृत परिसर, आधुनिक प्रतीक्षालय और यात्री सुविधाएं क्षेत्रीय पर्यटन व धार्मिक यात्राओं को और अधिक सुलभ बना रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन से पहले स्वयं करणी माता मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया था। यह घटना इस मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता और देशव्यापी पहचान को और भी सशक्त बनाती है।
आस्था और आधुनिकता का संगम
करणी माता मंदिर आज भी आस्था, रहस्य और चमत्कार का केंद्र है। चूहों की अनगिनत उपस्थिति, सफेद चूहे की दुर्लभ झलक, भक्तों का अटूट विश्वास और मां के चमत्कार इस मंदिर को अद्वितीय बनाते हैं।
साथ ही,अमृत भारत स्टेशन जैसी विकास परियोजनाएं यह प्रमाणित करती हैं कि यह पावन धाम केवल धार्मिक महत्व ही नहीं,बल्कि आधुनिक भारत के प्रगतिशील स्वरूप का भी प्रतीक बन रहा है।
नवरात्रि के पावन अवसर पर देशनोक करणी माता मंदिर का दर्शन भक्तों के लिए जीवन का अविस्मरणीय अनुभव है। यह धाम जहां दिव्य आस्था का प्रतीक है, वहीं अब विकास की नई राह भी खोल रहा है।आस्था और आधुनिकता का यह अद्वितीय संगम भारत की उस सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करता है,जो सदियों से जनमानस को प्रेरित करती रही है।