कौशाम्बी16नवम्बर*पूर्व प्रधान को संदिग्ध परिस्थितियों में लगी गोली मौत*
*परिजन और पुलिस का मानना है कि बीमारी से त्रस्त हट्टा कट्टा पूर्व प्रधान ने किया आत्महत्या*
*मौके की परिस्थिति जन्य साक्ष्य आत्महत्या की घटना से कर रहे हैं बार बार इनकार*
*कौशांबी* सैनी कोतवाली क्षेत्र के गनपा गांव में मंगलवार की भोर में घर के भीतर सो रहे पूर्व प्रधान को संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगी है जिससे उनका भेजा उड़ गया है घटनास्थल पर ढेर खून बिखर गया है और मौके पर उनकी मौत हो गई है परिजनों और पुलिस का मानना है कि पूर्व प्रधान के पास लाइसेंसी बंदूक थी और उन्होंने अपनी बंदूक से खुद गोली मारकर आत्महत्या कर लिया है लेकिन घटनास्थल पर मिले परिस्थिति जन्य साक्ष्य पुलिस और परिजनों की बातों को झूठा करार रहे हैं घटनास्थल के बजाय दूसरे कमरे में उनकी बंदूक मिली है यह बिस्तर वह सो रहे थे लेकिन बिस्तर में खून के निशान नहीं मिले हैं मौके पर पहुंची पुलिस ने पूर्व प्रधान की लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है पुलिस द्वारा बताया जा रहा आत्महत्या में पुलिस द्वारा बताए जा रहे तमाम जवाब पुलिस को कटघरे में खड़ा कर रहा है
घटनाक्रम के मुताबिक सैनी कोतवाली क्षेत्र के गनपा गांव निवासी पूर्व प्रधान गंगादीन पासी उम्र 65 वर्ष पुत्र टिर्रा घर के भीतर सो रहे थे मंगलवार की भोर उनके गले को चीरते हुए गोली लगी और खोपड़ी फाड़ कर भेजा निकल गया सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है मृतक के चार बेटियां हैं तीन बेटियों की शादी हो गई है चौथी बेटी पुलिस में भर्ती हुई है जो इस समय ट्रेनिंग कर रही है एक बेटी और पत्नी घर पर मौजूद थी पूर्व प्रधान की मौत के बाद जब मौके पर ग्रामीण पहुंचे तो बंदूक कमरे के गेट के बाहर रक्खी हुई थी यदि थाना पुलिस की बात को सत्य मान लिया जाए तो प्रधान की मौत के बाद बंदूक मौके से हटाने की किसने जुर्रत की है चारपाई पर बिस्तर लपेट कर रक्खा हुआ था बिस्तर में खून नहीं लगा था मृतक के कमरे का दरवाजा खुला हुआ था पूर्व प्रधान की लाश खटिया के नीचे जमीन पर पड़ी हुई थी जमीन पर ढेर खून पड़ा था मृतक की मौत के पीछे संपत्ति विवाद बताया जाता है ग्राम प्रधान की मौत को आत्महत्या बताने वाले परिजन और पुलिस मौके पर मौजूद तमाम साक्ष्य के सवाल का जवाब नहीं दे सके हैं घटनास्थल पर जमीन से दीवाल के 3 फीट ऊपर खून लगा है जिससे लगता है कि जिस समय प्रधान को गोली लगी है वह बैठे हुए थे अब सवाल उठता है कि ग्राम प्रधान ने खड़े होकर बंदूक से खुद गोली मार ली है तो खून और उनका भेजा उड़ गया है तो छत के ऊपर तक उनके भेजें के टुकड़े और खून के धब्बे होने चाहिए लेकिन मौके पर छत की उल्टी सतह पर ना तो खून के धब्बे हैं और ना छत के उल्टे तरफ भेजे के टुकड़े लगे दिखाई पड़ रहे हैं यदि ग्राम प्रधान ने बैठ कर आत्महत्या किया है तो लाइसेंसी बंदूक की ऊंचाई लगभग साढ़े चार फीट होती है कोई व्यक्ति जमीन में बैठकर गले में गोली कैसे मार सकता है और यदि ग्राम प्रधान ने लेट कर आत्महत्या किया था तो जमीन के पास नीचे हिस्से में दीवाल में खून और भेजा का निशान होना चाहिए लेकिन दीवाल के नीचे हिस्से में खून मौजूद नहीं है घटनास्थल पर मौजूद सामान दरवाजे बंदूक बिस्तर दीवाल आदि के फिंगरप्रिंट एकत्रित करने की जहमत पुलिस ने नहीं उठाई है जिससे थाना पुलिस की भी मंशा साफ नहीं दिखाई पड़ रही है हालांकि थाना पुलिस बड़े दमदारी से पूर्व प्रधान के आत्महत्या की बात को कह रही है अब सवाल उठता है कि जब दमदारी से पुलिस पूर्व प्रधान के आत्महत्या की बात कह रही है पूर्व प्रधान की आत्महत्या के समय थाना पुलिस क्या चश्मदीद गवाह थी पुलिस किस दम पर मौके के तमाम सबूत को नजरअंदाज कर आत्महत्या की बात दमदारी से कह रही है आधारहीन बात कर थाना पुलिस पूर्व प्रधान की मौत को आत्महत्या साबित करने पर लगी थाना पुलिस के कारनामे उसे कटघरे में खड़ा कर रहे हैं कहीं ऐसा तो नहीं कि ग्राम प्रधान की हत्या करने के बाद हत्यारे थाना पुलिस के संपर्क में हो यह बड़ा सवाल उत्पन्न हो रहा है

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