औरैया19सितम्बर*अंतर्राष्ट्रीय कथाकार एवं समाज सुधारक आचार्या मनोज अवस्थी जी ने उषा अनुरुध के विवाह के प्रसंग को सुनाया
गड़े पूर्वा दिबियापुर मे चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस मे अन्तरास्ट्रिय कथाकार एवं समाज सुधारक आचार्या मनोज अवस्थी जी ने उषा अनुरुध के विवाह के प्रसंग को सुनाया आचार्या जी ने युधिष्ठिर के राजसू यघ्य का वर्णन किया और कहा की धर्म के कार्य के लिये कोई भी कर्म छोटा नही होता भगवान कृष्णा ने भी यघ्य मे सभी पत्त्लो को उठना एवं सभी के पैर धोने का काम किया जरासन्द वध की कथा को सुनाया उसके उपरांत आचार्या जी ने कहा की हमे पानी ओर वाणी दोनो को तौल कर प्रयोग करना चाहिये द्रोपदी ने वाणी प्रयोग सही णी किया द्रोपदी का एक शब्द ही इस भारत मे महाभारत हो गया वैसे ही हमे पानी को भी बहुत ध्यान से प्रयोग करना चाहिये जलसंरक्षण आज हमारी पहली प्राथमिकता है फिर महाराज श्री ने सुदामा चरित्र का बहुत सुन्दर वर्णन किया ओर कहा की कभी किसी गरीब व्यक्ति को कुछ बोलना नही चाहिये क्युंकि गरीब का दिल दुखाना ही इस संसार मे सबसे बडा पाप है ओर इससे उसको भी कस्ट होता है उसके बाद मे महाराज जी ने 9 योगिस्वरो की कथा को सुनाया ओर कहा की धर्म हमे आडम्बर नही सिखाता हमे धर्म मे आडम्बर नही होना चाहिये उसके बाद मे 24 गुरु की कथा को सुनाया ओर कहा की हमे हर व्यक्ति ओर वस्तु से लुच शिक्षा लेनी चाहीये कथा के समापन ं3 महाराज श्री ने पूरी कथा को 5 मिनट मे सुनाया इस अवसर पर आयोजक लोग आदि लोग उपस्तिथ रहे एवं कथा मे उम्दा विशाल जनमानस

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