August 25, 2026

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सुल्तानपुर25अगस्त26*न्याय मांगने पहुंची महिला को चौकी से भगाने का आरोप, अब एसपी के दरबार में पहुंची फरियाद*

सुल्तानपुर25अगस्त26*न्याय मांगने पहुंची महिला को चौकी से भगाने का आरोप, अब एसपी के दरबार में पहुंची फरियाद*

सुल्तानपुर25अगस्त26*न्याय मांगने पहुंची महिला को चौकी से भगाने का आरोप, अब एसपी के दरबार में पहुंची फरियाद*

*प्रतापगंज पुलिस चौकी पर तैनात कांस्टेबल मनीष सिंह पर महिला ने लगाया गाली-गलौज कर भगाने का आरोप; थाने पर सुनवाई न होने का दावा, पुलिस अधीक्षक को सौंपा शिकायती पत्र*

सुल्तानपुर से संतोष तिवारी की रिपोर्ट यूपीआजतक

सुलतानपुर । पुलिस से न्याय की उम्मीद लेकर चौकी पहुंची एक महिला को अगर कथित तौर पर गाली-गलौज सुननी पड़े और चौकी से ही भगा दिया जाए, तो सवाल सिर्फ एक कर्मचारी के व्यवहार पर नहीं, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और फरियादियों के साथ व्यवहार की व्यवस्था पर भी उठता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने प्रतापगंज पुलिस चौकी पर तैनात कांस्टेबल मनीष सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर के सामने अपनी फरियाद रखी है।

महिला द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र के मुताबिक, वह अपनी शिकायत लेकर संबंधित पुलिस चौकी पहुंची थी। आरोप है कि वहां तैनात कांस्टेबल मनीष सिंह ने उसकी बात सुनने के बजाय उसके साथ गाली-गलौज की और उसे चौकी से भगा दिया। महिला का दावा है कि स्थानीय स्तर पर उसकी सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद उसे मजबूर होकर पुलिस अधीक्षक के दरबार में पहुंचना पड़ा।

शिकायत में महिला ने अपने साथ हुई कथित घटना का उल्लेख करते हुए पुलिस अधिकारियों से मामले में कार्रवाई और न्याय की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर एक पीड़ित महिला पुलिस चौकी पर अपनी शिकायत लेकर पहुंचती है तो उसकी बात सुनना किसकी जिम्मेदारी है? क्या किसी फरियादी को कथित तौर पर गाली देकर चौकी से बाहर कर देना पुलिस की कार्यप्रणाली का हिस्सा हो सकता है?

*चौकी पर सुनवाई नहीं तो एसपी के दरबार में क्यों पहुंची महिला?*

महिला का आरोप है कि स्थानीय पुलिस स्तर पर उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। यही वजह रही कि उसने सीधे पुलिस अधीक्षक के समक्ष पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई और लिखित शिकायत सौंपी।

यह घटनाक्रम पुलिस महकमे के लिए भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। क्योंकि आम नागरिक जब थाने या चौकी की चौखट पर पहुंचता है तो उसे सबसे पहले सुनवाई, सुरक्षा और सम्मान की उम्मीद होती है। यदि वहीं कथित तौर पर अभद्र व्यवहार हो, तो फिर फरियादी अपनी समस्या लेकर आखिर कहां जाए?

*आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी*

महिला के आरोप गंभीर हैं, लेकिन आरोपों की अंतिम पुष्टि निष्पक्ष पुलिस जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में पुलिस अधीक्षक के सामने अब यह मामला पहुंचने के बाद निगाहें विभागीय कार्रवाई और जांच पर टिकी हैं।

सवाल यह भी है कि पुलिस चौकी पर उस समय कौन-कौन पुलिसकर्मी मौजूद थे? महिला की शिकायत क्या थी? क्या उसकी शिकायत दर्ज की गई? क्या चौकी पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उपलब्ध है? और यदि महिला के साथ वास्तव में गाली-गलौज या दुर्व्यवहार हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

*अब एसपी के आदेश पर टिकी नजर*

महिला ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले में न्याय और कार्रवाई की गुहार लगाई है। ऐसे में अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक इस शिकायत को किस गंभीरता से लेते हैं और क्या संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच कराकर सच्चाई सामने लाई जाती है या यह शिकायत भी पुलिसिया फाइलों में दबकर रह जाती है।

फिलहाल मामला शिकायत से जांच की दहलीज तक पहुंच चुका है। महिला के आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच में सामने आएगा—लेकिन इतना जरूर है कि न्याय मांगने पहुंची किसी महिला को कथित तौर पर गाली देकर चौकी से भगाने का आरोप भी अपने आप में ऐसा सवाल है, जिसका जवाब पुलिस विभाग को देना होगा।

Taza Khabar