बांदा(उत्तर प्रदेश)21जुलाई26*कैंडल मार्च कार्यक्रम राइफल क्लब मैदान बाबूलाल चौराहा से महेश्वरी देवी मंदिर चौक तक आयोजित किया गया,
बांदा(उप्र), दिनांक 20 जुलाई 2026 को देर शाम को बांदा में एक 🕯️ कैंडल मार्च कार्यक्रम राइफल क्लब मैदान बाबूलाल चौराहा से महेश्वरी देवी मंदिर चौक तक आयोजित किया गया, जिसमें सभी प्रबुद्ध जनों ने भागीदारी की।
हाई कोर्ट का हवाला देते हुए, सरकार ने सोनम वांगचुक को जबरदस्ती सरकारी अस्पताल पहुँचाया; इस कार्रवाई ने सरकार के प्रति जनता के गुस्से को और बढ़ा दिया। मुद्दों को बातचीत से बेहतर ढंग से सुलझाया जा सकता है, फिर भी सरकार ने बातचीत की पहल नहीं की। सरकार का यह अहंकार संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे जनता का आक्रोश और बढ़ रहा है। देश भर में लोग विरोध कर रहे हैं। सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों और जवाबदेही को भूल गई है। वह जानबूझकर विरोध-प्रदर्शनों को नजरअंदाज़ कर रही है, जिससे जनता में गहरा असंतोष फैल रहा है। आगे क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा।
बांदा कांग्रेस सोशल मीडिया जिलाध्यक्ष सन्तोष कुमार द्विवेदी ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि “मेरा मानना है कि NEET और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की अव्यवस्था को देखते हुए, जवाबदेही और सुधार सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की प्रदर्शनकारियों की मांग पूरी तरह से जायज है। मांग मानने या बातचीत शुरू करने के बजाय, आंदोलन को कुचलने की कोशिशें की जा रही हैं। सरकारी तंत्र को युवाओं की भावनाओं और मांगों का सम्मान करना चाहिए और उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए; आखिरकार, वे हमारे ही बच्चे हैं, एक जागरूक युवा शक्ति, सरकार को उनकी आवाज दबाने की कोशिश करने के बजाय एक अभिभावक की तरह व्यवहार करना चाहिए। अगर प्रधानमंत्री आज—सत्र के पहले ही दिन—संसद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा कर दें, तो आक्रोश शांत हो जाएगा, जंतर-मंतर पर विजय रैली निकाली जा सकती है और प्रधानमंत्री की तारीफ होगी। यह प्रधानमंत्री के लिए एक अवसर है।
सरकार जानबूझकर इस आंदोलन को नजरअंदाज कर रही है। जब जनभावनाओं की अनदेखी की जाती है, तो लोगों की सोच केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से आगे बढ़कर सरकार को ही नकारने की ओर मुड़ जाती है। जो राजनीतिक दल अभी इस सरकार को समर्थन दे रहे हैं, उन्हें अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए और गठबंधन से बाहर आ जाना चाहिए। दूसरी बात, आने वाले सभी चुनावों में सत्ताधारी राजनीतिक दलों के ख़िलाफ वोट करने के लिए एक अभियान चलाया जाना चाहिए। संवैधानिक संवेदनशीलता की कमी वाले लोगों के हाथ में सत्ता नहीं होनी चाहिए; सरकार बदलना जरूरी है। अगर सत्ता ऐसे लोगों के हाथों में हो जो संविधान के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं, तो संविधान और लोकतंत्र दोनों ही खतरे में पड़ जाते हैं। संविधान की रक्षा करना नागरिकों का कर्तव्य है। यह आंदोलन इसी मकसद से प्रेरित है और समर्थन के काबिल है।
जिन राजनीतिक नेताओं ने जंतर-मंतर पर विरोध स्थल का दौरा किया और अपना समर्थन दिया, उन्हें अब संसद में सरकार को जवाबदेह ठहराना चाहिए और असहयोग का रुख अपनाना चाहिए। उन्हें सरकार द्वारा पेश किए गए बिलों का विरोध करना चाहिए। अगर वे राजनीतिक फायदे के लिए पाखंड करते हैं, तो जनता उन्हें सबक सिखाएगी। युवा जाग चुके हैं; वे महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के आदर्शों से प्रेरित होकर शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से विरोध कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह आंदोलन भविष्य में सकारात्मक बदलाव लाएगा।”
पेपर लीक किसी एक परीक्षा की नहीं, पूरे सिस्टम की नाकामी है – सिर्फ इसपर पैबंद लगाना काफी नहीं।
भारत को अपनी परीक्षा व्यवस्था नए सिरे से गढ़नी होगी – जहाँ परीक्षाएँ सुरक्षित हों, संस्थाएँ स्वतंत्र और जवाबदेह हों, और हर छात्र के वक्त, मेहनत और सपनों की रक्षा हो।
युवाओं के सपनों को जो नीलाम कर रहे,
वो देश की कुर्सी पर कैसे आराम कर रहे?
धर्मेंद्र प्रधान अगर अब भी इस्तीफा न देंगे,
तो युवा खुद अपने हाथों से सत्ता बदल देंगे!
सोनम वांगचूक को उठाने का दाव उलटा पड़ता नजर आ रहा है।
इस देश में कोई भी प्रोटेस्ट कर सकते है
आजादी के बाद कई सरकार आई और गई लेकिन ऐसी हरकत किसी भी सरकार ने नहीं की।
कांग्रेस की सरकार थी तब बीजेपी वाले हर रोज कोई न कोई नौटंकी करके देश का माहौल खराब करते थे फिर भी कांग्रेस की सरकार ने ऐसी हरकत नहीं की है।
भाजपा सरकार में पेपर लीक सबसे बड़ा उद्योग बन गया है जो करोड़ों युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहा है।
पिछले 10 साल में कुल 152 पेपर लीक हुए हैं यानी हर महीने एक पेपर लीक। इससे 7.5 करोड़ छात्रों को नुकसान हुआ है। लेकिन एक भी व्यक्ति को सजा नहीं हुई।
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं – इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सजा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज सवाल उठाए – तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद – और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही – उनपर टूट पड़ी है।
जुल्म के आगे झुकना, ना ही इस देश की मिट्टी में है, ना ही हमारे युवाओं के फितरत में है… शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।
सत्ता का अहंकार सरकारों को अंधा बना देता है।
अगर देश के युवा संसद आकर अपनी बात रखना चाहते हैं तो क्या मोदी सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए या फिर उन्हें जानवरों की तरह पुलिसिया लाठियों से पिटवाये, उन पर आँसू गैस के गोले बरसवाए?
ये अधिकार मोदी सरकार को किसने दिया?
ये प्रजातंत्र नहीं, लठतंत्र है,
जिसका भय आज टूट गया।
अब भी समय है, धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा लीजिये,
छात्रों की गूँज सुनिये….
वरना जान लीजिये,
देश की युवा शक्ति भाजपाई घमंड को तोड़ देगी।
इस अवसर पर 🕯️ कैंडल मार्च कार्यक्रम में राइफल क्लब मैदान बाबूलाल चौराहा, बांदा से महेश्वरी देवी मंदिर चौक, बांदा तक बांदा कांग्रेस सोशल मीडिया जिलाध्यक्ष सन्तोष कुमार द्विवेदी, जिला कांग्रेस कंट्रोल रूम प्रभारी बी लाल भाई, जिला कांग्रेस महासचिव अमित तिवारी, जिला कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ अध्यक्ष रमेश चन्द्र गुप्ता, आरिफ निजामी, जिलानी दुर्रानी सहित काफी संख्या में कांग्रेसजन व लोग शामिल रहे।
More Stories
बांदा 6 नवंबर 26*आगामी त्योहारों को सकुशल व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए DM ने की बैठक, दिए आवश्यक दिशा-निर्देश*
दिल्ली 6 नकबर 26*केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से मिले राष्ट्रीय महासचिव नितिन भाटी और चौधरी सुनील गुर्जर,
पूर्णिया बिहार 6 नवंबर 26 *दीपावली पर जरा सी लापरवाही बन सकती है बड़ा हादसा: