नई दिल्ली06मई25अब न्याय भी होगा पारदर्शी: सुप्रीम कोर्ट ने खोली नियुक्तियों और जजों की संपत्ति की पूरी किताब!
नई दिल्ली 6 मई, भारत की न्यायपालिका अब सिर्फ फैसले सुनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब उसने अपने भीतर झांकने की भी पूरी छूट जनता को दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली जजों की नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक कर दिया है। अब जनता जान सकेगी कि किस नाम की सिफारिश कब हुई, वह व्यक्ति वकालत से आया है या न्यायिक सेवा से, उसका सामाजिक वर्ग क्या है, और यहां तक कि क्या वह किसी पूर्व या वर्तमान न्यायाधीश का रिश्तेदार है।
9 नवंबर 2022 से 5 मई 2025 के बीच सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम द्वारा मंज़ूर किए गए सभी नाम, उनकी सिफारिश की तारीख़, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने की तारीख़, और उनकी नियुक्ति की तारीख़ – ये सभी जानकारियां सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अब सबके लिए खुली किताब बन चुकी हैं।
इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ही छवि को पारदर्शिता के आइने में दिखाने का साहसी फैसला भी किया है। 1 अप्रैल 2025 को फुल कोर्ट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण भी वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। जो जानकारी प्राप्त हो चुकी है, उसे सार्वजनिक कर दिया गया है, और बाकी जजों की संपत्ति की जानकारी आते ही क्रमशः वेबसाइट पर चढ़ाई जाएगी।
यह कदम केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र की दिशा में न्यायपालिका का एक गहरा विश्वास है। यह इस बात का प्रमाण है कि न्याय अब सिर्फ ‘देने’ की प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि उसमें खुद को ‘जांचने’ का साहस भी आ गया है। जनता को जवाबदेही देने की यह पहल बताती है कि अगर सर्वोच्च न्यायालय पारदर्शिता का उदाहरण बन सकता है, तो बाकी संस्थाओं के लिए भी यह एक आदर्श बन सकता है।
अब जजों की नियुक्ति में रहस्य नहीं रहेगा, और उनकी संपत्ति की जानकारी भी किसी फाइल में कैद नहीं रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने जो कदम उठाया है, वह केवल व्यवस्था नहीं बदलता – यह न्याय को जनता के और करीब लाने का सशक्त प्रयास है।

More Stories
कानपुर27जून26*गल्ला मंडी दीनदयाल पुरम E-4 कॉलोनी से निकला जुलूस-ए-मोहम्मदिया,
महोबा २७ जून २०२६ * चरखारी में अकीदत और एहतराम के साथ ताजियों को किया गया सुपुर्द-ए-खाक
पूर्णिया बिहार 26 जून 26* दसवीं को इमामबाड़ों-अखाड़ों में उमड़ा आस्था का सैलाब, गूंजा ‘या हुसैन’ का नारा