दिल्ली १४ मई २६ * दिल्ली पुलिस के नारकोटिक्स विभाग में तैनात रहे इंस्पेक्टर सुभाष यादव की गिरफ्तारी ने पूरे पुलिस महकमे पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली पुलिस के नारकोटिक्स विभाग में तैनात रहे इंस्पेक्टर सुभाष यादव की गिरफ्तारी ने पूरे पुलिस महकमे पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सीबीआई के मुताबिक जांच में अब तक 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति और भारी रकम के लेन-देन के सुराग मिले हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक इंस्पेक्टर इतनी बड़ी दौलत कैसे खड़ी कर सकता है और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी?
सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए इंस्पेक्टर सुभाष यादव कभी द्वारका जिले के नारकोटिक्स सेल में तैनात थे। आरोप है कि वर्षों तक ड्रग्स नेटवर्क पर कार्रवाई के नाम पर उसने अपनी मजबूत पकड़ बना ली। द्वारका, उत्तम नगर, मोहन गार्डन और आसपास के इलाकों में लंबे समय से विदेशी नागरिकों, खासकर नाइजीरियन ड्रग सिंडिकेट की गतिविधियों की चर्चा होती रही है। अब आरोप लग रहे हैं कि इसी नेटवर्क से करोड़ों रुपये की कमाई की गई।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2017 से लगातार द्वारका जिले में उसकी पकड़ बनी रही। बीच में ट्रांसफर जरूर हुआ, लेकिन वह ज्यादा समय तक बाहर नहीं रहा। आईपीएस अधिकारी बदलते रहे, जिले बदलते रहे, लेकिन सुभाष यादव की तैनाती और प्रभाव कायम रहा। वह स्पेशल स्टाफ में भी रह चुका है, जहां आमतौर पर संवेदनशील मामलों और खुफिया ऑपरेशन का काम होता है।
अब सवाल सिर्फ सुभाष यादव तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर संपत्ति बनाने वाला अधिकारी अकेले काम कर सकता है? क्या विभाग के किसी वरिष्ठ अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं थी? अगर जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या किसी दबाव, सांठगांठ या “सेटिंग” के कारण उसे महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखा गया?
सीबीआई की जांच में अभी सिर्फ उन संपत्तियों का खुलासा हुआ है जिनके दस्तावेज और लेन-देन सामने आए हैं। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यही वजह है कि अब लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या सिर्फ एक इंस्पेक्टर पर कार्रवाई होगी या फिर उन अधिकारियों तक भी जांच पहुंचेगी जिन पर उसे संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं।
अब निगाहें सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या एजेंसी उन बड़ी मछलियों तक पहुंचेगी जिनके नाम अंदरखाने चर्चा में हैं? क्या संबंधित अधिकारियों के बैंक खातों, बेनामी संपत्तियों और आर्थिक लेन-देन की भी जांच होगी? या फिर मामला सिर्फ एक इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी तक सीमित रह जाएगा?
फिलहाल, 100 करोड़ की संपत्ति वाले इस इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और आंतरिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

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