October 23, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

चित्रकूट 23 अक्टूबर 26*चित्रकूट से कौशांबी-प्रयागराज तक धड़ल्ले से चल रहा अवैध ओवरलोडिंग का खेल:

चित्रकूट 23 अक्टूबर 26*चित्रकूट से कौशांबी-प्रयागराज तक धड़ल्ले से चल रहा अवैध ओवरलोडिंग का खेल:

चित्रकूट 23 अक्टूबर 26*चित्रकूट से कौशांबी-प्रयागराज तक धड़ल्ले से चल रहा अवैध ओवरलोडिंग का खेल:

‘लोकेशन गैंग’ के सिंडिकेट से राजस्व को करोड़ों का चूना, मौन बैठे जिम्मेदार!**

**चित्रकूट:**प्रदेश सरकार एक तरफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत राजस्व चोरी और अवैध खनन पर लगाम कसने के दावे कर रही है, वहीं चित्रकूट जनपद में इन दावों की पोल सरेआम खुलती नज़र आ रही है। जिले की सड़कों पर रात्रि 11 बजे के बाद एक समानांतर व्यवस्था सक्रिय हो जाती है, जिसे संचालित करता है शातिर **’लोकेशन गैंग’**। बिना रवन्ना (परमिट) और क्षमता से अधिक ओवरलोड लदे ट्रक धड़ल्ले से कौशांबी और प्रयागराज की सीमाओं तक पार कराए जा रहे हैं, और खनिज एवं परिवहन विभाग (RTO) की भूमिका इस खेल में पूरी तरह संदेहास्पद बनी हुई है।

*सक्रिय सिंडिकेट और लोकेशन गैंग का जाल**

सूत्रों के मुताबिक, जनपद में अवैध परिवहन का यह खेल किसी सुनियोजित सिंडिकेट की तरह चल रहा है। भरतकूप से लेकर राजापुर तक इसका पूरा नेटवर्क फैला हुआ है।

* भरतकूप बेडिपुलिया, धनुष चौराहा (LIC के पास), जिला चिकित्सालय तिराहा, पहाड़ी और राजापुर चौराहा इस गैंग के मुख्य अड्डे बने हुए हैं।
*
* यह गैंग आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से ऑडियो नोट्स और लाइव लोकेशन शेयर कर प्रशासनिक गाड़ियों और पुलिस की आवाजाही की पल-पल की जानकारी ट्रक चालकों तक पहुंचाई जाती है।

*राजस्व को हर महीने करोड़ों का चूना*

ओवरलोडिंग और बिना रवन्ना (बिना रॉयल्टी पर्ची) के चल रहे इन वाहनों के कारण शासन को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है। भारी-भरकम ट्रकों के बेरोक-टोक संचालन से जहां एक तरफ सरकार की तिजोरी को चपत लग रही है, वहीं दूसरी तरफ बदहाल हो रही सड़कें आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुकी हैं। इसके बावजूद खनिज विभाग और आरटीओ (परिवहन विभाग) के अधिकारी कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं और धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।

*सर्विलांस से खुल सकती है गहरी परतें*

जिले के जागरूक नागरिकों और जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन थोड़ी सी भी सख्ती दिखाए, तो इस पूरे सिंडिकेट की कमर तोड़ी जा सकती है। यदि इन चिन्हित स्थानों पर सक्रिय लोकेशन गैंग के प्रमुख सदस्यों और सरगनाओं को चिन्हित कर उनके मोबाइल नंबरों को *सर्विलांस* पर लगा दिया जाए, तो कई सफेदपोशों और विभागीय मिलीभगत के बड़े राज से पर्दा उठ सकता है।

अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारी इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए इस अवैध लोकेशन सिंडिकेट के खिलाफ कोई बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हैं या फिर राजस्व चोरी का यह खेल यूं ही बेखौफ जारी रहेगा।

 

Taza Khabar