May 12, 2026

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कानपुर नगर 12मई26*कभी भी हथियाई जा सकती हैं ग़रीब किसानों की जमीनें, किसानों में दिखी बेबसी

कानपुर नगर 12मई26*कभी भी हथियाई जा सकती हैं ग़रीब किसानों की जमीनें, किसानों में दिखी बेबसी

*Breaking News kanpur*

कानपुर नगर 12मई26*कभी भी हथियाई जा सकती हैं ग़रीब किसानों की जमीनें, किसानों में दिखी बेबसी

*कभी भी हथियाई जा सकती हैं ग़रीब किसानों की जमीनें, किसानों में दिखी बेबसी,, बिठूर थाना क्षेत्र संभलपुर कि ज़मीन बनी पुलिस छावनी*

*पूर्व की सरकारों की तरह ही भाजपा सरकार में भी केडीए विभाग द्वारा किसानों की जमीनों की छीना झपटी,, लाचार किसान माथा पटकते घूम रहा*

*किसानों की ज़मीनी कागजों में बड़ा हेर फेर, और फिर विभागों की तानाशाही के चलते सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि भी पीड़ित किसानों के पक्ष में नहीं*

*बिठूर क्षेत्र में न्यू कानपुर सिटी परियोजना को लेकर मंगलवार को उस समय हालात विस्फोटक हो गए, जब कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) की टीम भारी पुलिस बल, पीएसी और प्रशासनिक अमले के साथ किसानों की जमीन पर पहुंच गई*।

*ग़रीब किसानों ने केडीए पर जबरन जमीन कब्जाने, फसल जलाने और दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि 1996 में धारा 17 लगाकर उनकी जमीन अधिग्रहित दिखाई गई, लेकिन न मुआवजा मिला और न कोई वैधानिक सूचना दी गई*।

*इसके बावजूद 2007 में राजस्व अभिलेखों में जमीन केडीए के नाम दर्ज कर किसानों को कागजों में बेदखल कर दिया गया, जबकि आज तक जमीन पर किसानों का ही कब्जा और खेती जारी है। मौके पर किसानों ने अधिकारियों से वैध दस्तावेज और कानून का आधार पूछा, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, जिससे आक्रोश और भड़क उठा*।

*पीड़ित किसानों का आरोप है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में किसानों के पक्ष में फैसले आने के बावजूद केडीए गरीब किसानों की जमीन हथियाने पर आमादा है। किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी खड़ी फसल तक जला दी गई और पीएसी व पुलिस बल के सहारे डराने-धमकाने की कोशिश की गई*।

*हालांकि मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस ने पीड़ित ग़रीब किसानों पर लाठीचार्ज नहीं किया और पुलिस आयुक्त से मिलने की सलाह दी, लेकिन किसानों का कहना है कि केडीए अधिकारियों ने अगले दिन बड़ी कार्रवाई की चेतावनी देकर माहौल और तनावपूर्ण बना दिया*।

*किसानों ने साफ कहा कि यह सिर्फ जमीन की लड़ाई नहीं, बल्कि गरीब किसानों के अस्तित्व और अधिकारों को बचाने की जंग है, और यदि जबरन कब्जे की कोशिश जारी रही तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।*