औरैया12नवम्बर*भ्रष्टाचार के तीन पीड़ितों की शिकायत 15 वर्षों से उच्च न्यायालय में पड़ी पेंडिंग में, न्याय की आस में दो ने गंवाई जान*
औरैया, बाबरपुर, अजीतमल नगर पंचायत में भ्रस्टाचार में बड़ा शिस्टाचार, नगर पंचायत बाबरपुर अजीतमल भ्रस्टाचार के मामलों में अक्सर मीडिया की सुर्खियों में रहा है, परन्तु यह एक ऐसा मामला समाने आया है जहाँ पर भ्रस्टाचार के तीन पीड़ित दो वर्ष नही 10 वर्ष नही करीब 13 से 15 वर्षों से निरंतर न्याय की राह ताकते हुये दो पीड़ितों अपनी जान गंवा दी है, परन्तु न्याय अब तक नही मिला आखिर क्या है बाबरपुर, अजीतमल नगर पंचायत का भ्रष्टाचार जिसके आगे प्रशासनिक अधिकारियो सहित उच्च न्यायालय भी हो गई मौन, बाबरपुर, अशोक नगर निवासी विजय कुमार ने 05 नवंबर 2022 को तहसील दिवस में जिलाधिकारी औरैया को शिकायत पत्र देते हुये बताया गया हैकि नगर पंचायत बाबरपुर अजीतमल में सन 2007-2008 में बिग्यप्ति प्रकाशित कर फोर्थ क्लास के कर्मचारियों की भर्ती निकाली गई गई थी जिसमें नगर पंचायत में पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों को बरीयता देने का उल्लेख था, परन्तु बसपा सरकार के केविनट मंत्री रहे अशोक दोहरे ने अपनी जातिय पक्षपात के चलते दबाव पूर्ण कर्मचारियों को भर्ती किया गया है, विजय कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुये बताया हैकि नगर पंचायत बाबरपुर, अजीतमल में फोर्थ क्लास कर्मचारियों की भर्ती समय में कुछ कर्मचारियों ने अपनी फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र दाखिल किये गये और नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी परशुराम संखवार ने कर्मचारियों के द्वारा दाखिल किये गये शैक्षिक प्रमाण पत्र का सत्यापन नही कराया गया और फर्जी दस्तावेजों पर ही भर्ती कर दिया गया, जिनमें से बालेस्टर सिंह महादेव सिंह निवासी शास्त्री नगर बाबरपुर, फोर्थ क्लास, बिनोद कुमार दिवाकर, अजीतमल सूर्य नगर, दुष्यन्त सिंह जन्नाथपुर पंप ऑपरेटर, नरेंन्द्र सिंह राजपूत निवासी गढ़ा, रघुनाथ कुशवाहा निवासी बाबरपुर सफाई कर्मी, विजय कुमार ने बताया कि वह 01 जून 1997 से नगर पंचायत में 2007 – 2008 की उक्त भर्ती के बाद उसे नगर पंचायत से निकाल दिया गया है, जब से पीड़ित विजय कुमार ने निरंतर अपनी समस्या को उच्चधिकारियों सहित प्रदेश सरकार को लिखित शिकायत कर निस्तारण किये जाने की मांग करता रहा, जब पीड़ित को न्याय नही मिला विजय कुमार सहित रमेश चंद कठेरिया अजीतमल, रवि दिवाकर अशोक नगर ने उच्च न्यायालय इलाहबाद में अपनी रिट फाइल कर दी, हद तो जब हो गई कि पीड़ित जिन्हें प्रशासनिक अधिकारियों को व प्रदेश सरकार से न्याय नही मिला एवं वह न्याय की उम्मीद लगाकर सन 2008 में माननीय उच्च न्यायालय का दरबाजा खतखटाया परन्तु करीब 15 वर्षों तक पीड़ितों की शिकायत फाइल पर सुनवाई नही हो सकी है, परन्तु तीन पीड़ितों में से रमेश चंद कठेरिया अजीतमल, रवि दिवाकर अशोक नगर बाबरपुर ने न्याय की आस लगाये अपनी दम तोड़ दी है वहीं विजय कुमार ने अब भी उच्च न्यायालय के द्वारा भ्रस्ट अधिकारियों एवं अनिमिकता करने वाले कर्मचारियों के बिरुद्ध कार्यवाही का इंतजार कर रहें है, अब अगले शिर्घक में पढ़ेंगे कि आखिर उच्च न्यायालय भ्रस्टाचार के बिरुद्ध किस एक्शन में है,

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