September 17, 2026

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अयोध्या2अगस्त26*आखिर पत्रकारों के साथ ये खाकी की बर्बरता कब समाप्त होगी।

अयोध्या2अगस्त26*आखिर पत्रकारों के साथ ये खाकी की बर्बरता कब समाप्त होगी।

बड़ी खबर

अयोध्या2अगस्त26*आखिर पत्रकारों के साथ ये खाकी की बर्बरता कब समाप्त होगी

अयोध्या*बीमार पिता का अयोध्या में इलाज कराकर ऑटो से घर लौट रहे पत्रकार को पुलिस ने कथित तौर पर रोका, मरीज होने का इशारा करने के बावजूद नहीं पसीजा दिल!*

*बारुन चौकी के SI और सिपाही उपेंद्र सिंह पर पत्रकार व ऑटो चालक से अभद्रता का आरोप टोल प्लाजा तक पीछा कर रुकवाया वाहन, पुलिसकर्मियों के रवैये से उठे गंभीर सवाल*

*‘जहां शिकायत करनी हो कर देना, जो उखाड़ना हो उखाड़ लेना, मैं किसी से नहीं डरता’ पत्रकार का आरोप, खाकी के कथित रौब के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज*

 

*मिल्कीपुर/अयोध्या।*
बीमार पिता का अयोध्या जिले में इलाज कराकर ऑटो से अपने घर वापस लौट रहे एक पत्रकार के साथ कथित तौर पर पुलिसकर्मियों द्वारा अभद्रता किए जाने का मामला सामने आया है। पत्रकार का आरोप है कि वह अपने बीमार पिता को इलाज के बाद ऑटो से वापस घर लेकर लौट रहा था। इसी दौरान बारुन चौकी क्षेत्र में तैनात एक SI और सिपाही उपेंद्र सिंह ने ऑटो को रोकने का प्रयास किया।
पत्रकार के मुताबिक, ऑटो में मरीज होने के कारण उसने इशारे के माध्यम से पुलिसकर्मियों को यह बताने का प्रयास किया कि वाहन में उसके बीमार पिता मौजूद हैं और उनका अयोध्या में इलाज कराकर उन्हें वापस घर ले जाया जा रहा है। इसके बावजूद ऑटो आगे निकल गया। आरोप है कि इससे नाराज SI और सिपाही उपेंद्र सिंह ने अपनी गाड़ी से ऑटो का पीछा किया और टोल प्लाजा के पास वाहन को रुकवा लिया।
पत्रकार का आरोप है कि वाहन रुकवाने के बाद पुलिसकर्मियों ने ऑटो चालक और उसके साथ मौजूद पत्रकार के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया और अभद्रता की। पत्रकार द्वारा बार-बार यह बताया गया कि ऑटो में उसके बीमार पिता हैं और उनका इलाज अयोध्या में कराकर उन्हें वापस घर ले जाया जा रहा है, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद पुलिसकर्मियों का रवैया नहीं बदला।
मामले को लेकर पत्रकार का यह भी आरोप है कि पुलिसकर्मियों की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया“जहां मेरी शिकायत करनी हो कर देना और जो उखाड़ना हो उखाड़ लेना, मैं किसी से डरता नहीं।” यदि पत्रकार द्वारा लगाए गए ये आरोप सही हैं तो यह पुलिस के आचरण और आम नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसी वाहन में गंभीर रूप से बीमार मरीज को इलाज के बाद घर वापस ले जाया जा रहा हो, तो क्या ऐसी स्थिति में पुलिसकर्मियों को मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए पहले मरीज की स्थिति समझने की कोशिश नहीं करनी चाहिए? क्या किसी पत्रकार या आम नागरिक के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना पुलिस की कार्यशैली का हिस्सा हो सकता है?
घटना को लेकर पत्रकार ने संबंधित उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि पुलिस विभाग इस पूरे प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेता है और लगाए गए आरोपों की जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।

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