अयोध्या17मई26*यूपीआजतक न्यूज चैनल पर अयोध्या की कुछ महत्वपूर्ण खबरें
[17/05, 16:12] +91 87380 48060: ब्रेकिंग
अयोध्या.
सरयू नदी में तीन किशोरो के डूबने का मामला, डूबे किशोर में दो शव मिले, सत्यम पांडे व अमित पांडे का मिला शव, घटनास्थल से लगभग 500 मीटर दूर मिले दोनों शव, एसडीआरएफ टीम को कड़ी मसक्कत के बाद मिली सफलता, अभी एक किशोर मानस पांडे की चल रही तलाश, रौनाही थाना क्षेत्र के सरयू नदी में डूबे थे तीनों किशोर.
[17/05, 16:12] +91 87380 48060: ✍🏼
*तहसीनपुर पहुंच सपा नेताओं ने शोकाकुल परिवार को बंधाया ढांढस*
अयोध्या:
रौनाही थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तहसीनपुर में 14 वर्षीय सत्यम पांडेय, 15 वर्षीय मानस पांडेय एवं 17 वर्षीय अमित पांडेय के कल शाम नदी में नहाते समय डूब जाने की दुखद घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
आज समाजवादी पार्टी के बीकापुर विधानसभा प्रभारी एजाज अहमद, युवजन सभा के जय सिंह यादव, कृष्ण कुमार पटेल, राजेश यादव तथा दयाशंकर भारती ने घटनास्थल पर पहुंचकर शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। मालूम हो कि आज तीनों शव नदी से निकाल लिए गए।
[17/05, 16:12] +91 87380 48060: ब्रेकिंग
अयोध्या.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का असर अवध विश्वविद्यालय में भी दिखा, अब पांच दिवसीय होगा कार्य, सोमवार से शुक्रवार तक होगा कार्य, शनिवार को होगा वर्क फ्रॉम होम, कार्य दिवस के दिन 9:30 से 6:00 बजे तक खुले रहेंगे कार्यालय, डेढ़ से 2:00 बजे तक होगा लंच, वर्क फ्रॉम होम के समय जरूरत पड़ने पर किसी भी कर्मचारी को बुलाया जा सकता है, कुल सचिव विनय कुमार सिंह ने जारी किया पत्र.
[17/05, 16:36] +91 87380 48060: ब्रेकिंग
अयोध्या
अयोध्या से वृंदावन घूमने गए युवक की यमुना में डूबने से हुई मौत।कैंट थाना क्षेत्र के गांव पलिया शाहबदी निवासी 25 वर्षीय सर्वेश की डूबने से हुई मौत।अपने 11 साथियों के साथ गया था युवक वृंदावन घूमने।
[17/05, 16:36] +91 87380 48060: *रामकथा संग्रहालय में लगेगी भगवान राम के पूर्वजों की प्रतिमाएं, इतिहास के बारे में डिजिटल जानकारी मिलेगी, प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर भी मंथन*
श्रीरामजन्भूमि परिसर में अब भगवान श्रीराम के पूर्वजों और इक्ष्वाकु वंश की प्रतिमाएं स्थापित नहीं की जाएंगी। इन मूर्तियों और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियों को अब निर्माणाधीन इंटरनेशल रामकृष्ण म्यूजियम में स्थान दिया जाएगा। यहां श्रद्धालुओं को इक्ष्वाकु वंश के प्रतापी राजाओं की मूर्तियों के साथ उनकी वंशावली और गौरवशाली इतिहास की डिजिटल जानकारी भी मिलेगी। इक्ष्वाकु वंश के लिए बनेगी विशेष गैलरी रामकथा संग्रहालय में तैयार हो रही 20 गैलरियों में से एक विशेष गैलरी इक्ष्वाकु वंश को समर्पित होगी।
श्री राम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और संग्रहालय प्रशासन फिलहाल उन राजाओं के चयन में जुटा है, जिनकी कीर्ति, पराक्रम और धार्मिक योगदान आज भी जनमानस में जीवित हैं। साथ ही उनकी प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर भी मंथन चल रहा है। डिजिटल कियोस्क से मिलेगा सूर्यवंश का इतिहास रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ संदीप कुमार सिंह ने बताया कि गैलरी में आधुनिक डिजिटल कियोस्क लगाए जाएंगे।इनके जरिए श्रद्धालु सूर्यवंशी राजाओं के इतिहास, उनके पराक्रम और धार्मिक परंपराओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इक्ष्वाकु वंश की वंशावली बेहद विस्तृत है, इसलिए सभी राजाओं को शामिल करना संभव नहीं होगा। हालांकि, उन प्रमुख विभूतियों को अवश्य स्थान दिया जाएगा जिनकी पहचान भारतीय संस्कृति में आज भी अमिट है। हरिश्चंद्र से भगीरथ तक की कथाएं होंगी प्रदर्शित गैलरी में सतयुग से लेकर त्रेता, द्वापर और कलियुग तक इक्ष्वाकु वंश की परंपरा को दर्शाया जाएगा।
इसमें सत्य और धर्म के प्रतीक राजा हरिश्चंद्र धर्मपरायण सम्राट दिलीप, महाराज रघु और मां गंगा को पृथ्वी पर लाने वाले महाराज भगीरथ की कथाओं को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। राजा दिलीप की नंदिनी गाय की सेवा, पुत्र रघु के जन्म और रघुवंश की स्थापना की कथा भी संग्रहालय का हिस्सा होगी। इसी रघुवंश की मर्यादा को भगवान राम ने “रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई” कहकर अमर बनाया था। महाराज रघु की दानवीरता की कथा भी होगी शामिल संग्रहालय में महाराज रघु की दानवीरता से जुड़ी स्वर्ण वर्षा की प्रसिद्ध कथा भी प्रदर्शित की जाएगी।मान्यता के अनुसार, ब्रह्मचारी कौत्स गुरु दक्षिणा के लिए नौ हजार स्वर्ण मुद्राओं की मांग लेकर महाराज रघु के पास पहुंचे थे। उस समय महाराज रघु तपस्वी जीवन व्यतीत कर रहे थे, लेकिन उन्होंने रघुवंश की परंपरा निभाते हुए किसी याचक को खाली हाथ लौटाने से इनकार कर दिया। कथा के अनुसार, जब धन के देवता कुबेर ने सहायता नहीं की, तो महाराज रघु ने उन पर चढ़ाई की तैयारी कर दी। इससे भयभीत होकर कुबेर ने स्वर्ण वर्षा कर दी। बताया जाता है कि महाराज रघु ने पूरा स्वर्ण कौत्स को अर्पित कर दिया, हालांकि कौत्स ने केवल नौ हजार स्वर्ण मुद्राएं ही स्वीकार कीं। इसी घटना के बाद वह स्थान “स्वर्ण खनि कुंड” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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