October 27, 2021

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🌹 *आर्थिक न्याय हेतु सर्वे भवन्तु सुखिन: का शांतिपूर्ण मार्ग, यह रिपोर्ट पूरी पढ़ें एवं मंथन करें

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🌹 *आर्थिक न्याय हेतु सर्वे भवन्तु सुखिन: का शांतिपूर्ण मार्ग, यह रिपोर्ट पूरी पढ़ें एवं मंथन करें*
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*”बौद्ध संगठनों की राष्ट्रीय समन्वय समिति,भारत” के द्वारा वोटरों को ₹8000/- मासिक “वोटर- पेंशन” देने हेतु ,राष्ट्रपति के समक्ष “पत्र – याचिका” पेश* ।
*श्री रामनाथ कोविंद जी*
माननीय राष्ट्रपति भारत सरकार
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली-110004
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*विषय* : *वैश्वीकरण ,निजीकरण, मशीनीकरण,एवं विश्व बाजार प्रतिस्पर्धा तथा “कोरोना वायरस लाकडाउन” के चलते भारत में भुखमरी, कुपोषण,गरीबी, बे-रोजगारी को रोकने एवं “नागरिकों को आत्मनिर्भर” बनाने के लिए सांसदों एवं विधायकों की तरह देश की आर्थिक समृद्धि( राष्ट्रीय आय) में भारत के नागरिकों – वोटरों को महंगाई भत्ता सहित ₹8000/-प्रति महीने “वोटर पेन्शन” के रूप में आर्थिक हिस्सेदारी देने हेतु स्मरण पत्र-याचिका*।
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*महोदय*
*संयुक्त राष्ट्र संघ के श्रम निकाय ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस संकट के कारण अनौपचारिक असंगठित क्षेत्र मे काम करने वाले लगभग 40 करोड लोग गरीबी में फंस सकते हैं और दुनिया भर में 19.5 करोड लोगों की पूर्णकालिक नौकरी छूट सकती है*।
*अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आई एलओ) ने अपनी रिपोर्ट “आईएलओ और निगरानी- दूसरा संस्करण कोविड-19 और वैश्विक कामकाज” मे कोरोना वायरस संकट को दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे भयानक संकट बताया*।
*आईएलओ के महानिदेशक गाय राइडर ने कहा कि “विकसित और विकासशील दोनों अर्थव्यवस्थाओं में श्रमिकों और व्यवसायों को तबाही का सामना करना पड़ रहा है, हमें तेजी से निर्णायक रूप से और एक साथ कदम उठाने होंगे”* ।
*रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में 2 अरब लोग अनौपचारिक असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं ।इनमें से ज्यादातर उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से हैं और यह विशेष रूप से संकट में है*।
*रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड -19 संकट से पहले ही अनौपचारिक क्षेत्र के लाखों श्रमिक प्रभावित हो चुके हैं ।आई एल ओ ने कहा “भारत ,नाइजीरिया और ब्राजील लॉक डाउन और नियंत्रण उपायों से बड़ी संख्या में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के श्रमिक प्रभावित हुए हैं”*।
*रिपोर्ट में कहा गया है कि ” भारत में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करने वालों की हिस्सेदारी लगभग 90% है , इसमें से करीब 40 करोड़ श्रमिकों के सामने गरीबी में फंसने का संकट है “। इसके मुताबिक भारत में लागू किए गए देशव्यापी बंद से श्रमिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे उन्हें अपने गांव की ओर लौटने को मजबूर होना पड़ा है* ।
*भारत में बढ़ रही गरीबी के आंकड़ों को देखें तो ! गत वर्ष “वैश्विक भूख सूचकांक” (जी एच आई) ने दुनिया भर में भूख से जूझ रहे देशों की जानकारी देने वाली रिपोर्ट “ग्लोबल हंगर इंडेक्स – 2019” मे भारत को 102 वां स्थान मिला। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अब भी काफी भुखमरी मौजूद है*।
*ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019 में कुल 117 देशों को शामिल किया गया जिसमे भारत 102वें पायदान पर था ।यह दक्षिण एशियाई देशों में सबसे निचला स्थान है। भारत, ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019 में पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका से भी पीछे है। रिपोर्ट के अनुसार भारत को 100 अंकों में से 30.3 अंक मिले जो भुखमरी की गंभीर स्थिति को दर्शाता है*।
*वर्ष 2014 में मौजूदा सरकार के सत्ता संभालते समय भारत “वैश्विक भूख सूचकांक” के 55 वें रैंक पर था, 2015 में 80 में स्थान पर, 2016 में 97 स्थान पर, 2017 में 100वें स्थान पर और 2018 में 103 वें स्थान पर था*।
*संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 50 करोड़ 30 लाख लोग भुखमरी के शिकार हैं। अकेले भारत में भूखे लोगों की संख्या 20 करोड़ से भी अधिक है*।
*वैश्वीकरण, निजीकरण, मशीनीकरण एवं विश्व बाजार प्रतिस्पर्धा तथा कोरोना वायरस लाकडाउन के कारण भारत में बढ़ रही आर्थिक तंगी ,कुपोषण,गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी एवं आत्म हत्याओ को रोकने के लिए सांसदों एवं विधायकों की तरह देश के नागरिकों (वोटरों) को हर महीने वोटर पेन्शन, देने हेतु ” वोटरशिप कानून ” बनाकर वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार प्रतिमाह 8000₹ नकद रकम महंगाई भत्ता सहित वोटरों के बैंक खातों में भेजने एवं एटीएम द्वारा ‘वोटर पेंशन’ निकालने की कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए*।
*क्योंकि भारत के प्रत्येक नागरिक का देश की सारी प्राकृतिक संपदा, जल, जंगल,जमीन, खनिज और सारी धन-संपत्ति में मूलभूत समान अधिकार है। भारत का आम नागरिक अपने धन और अधिकार से वंचित होकर नितांत गरीबी, बेरोजगारी,बदहाली ,अभाव, शोषण, *लाचारी ,अपमान और अन्याय का पशुवत् जीवन जीने को मजबूर हो रहा है* ।
*भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं भारत सरकार के मंत्रियों, संसद सदस्यों देश के सभी विधायकों की तरह भारत के प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय संपत्ति( सकल घरेलू उत्पाद) राष्ट्रीय आय में बराबर का हिस्सा है इसलिए देश में सरकार बनाने वाला मतदाता (वोटर) को उसके हिस्से की आधी रकम सीधे बैंक खाते में भेजी जानी चाहिए और 50 प्रतिशत राष्ट्रीय आय से देश चलाने की व्यवस्था होनी चाहिए*।
*आर्थिक आजादी आंदोलन के कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों से चौधवीं लोकसभा के 110 संसद सदस्य एवं राज्यसभा के 25 संसद सदस्यों द्वारा “वोटरशिप याचिका” लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियम 168 के अंतर्गत लोकसभा में प्रेषित की गई थी, जिसे तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष श्री सोमनाथ चटर्जी एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रियरंजन दास मुंशी ने वोटरशिप की गंभीरता को देखते हुए वोटरशिप याचिका पर नियम 193 के अंतर्गत बहस कराने के लिए सहमत हुई किंतु अचानक वोटरशिप पर बहस कराए बिना लोकसभा का सत्र समाप्त कर दिया इससे वोटरशिप का कानून बनते- बनते रह गया*।
*भारत के राष्ट्रपति के समक्ष प्रेषित याचिका के अंतिम क्रमांक -9 में कहा गया है कि जिस तरह साझी बाजार बनाने के लिए “गैट समझौता” (General Agreement on Tariffs and Trade -GATT) हुआ उसी प्रकार साझी नागरिकता व साझे प्रशासन के लिए “गैप समझौता”(Global Agreement on Poverty & Peace – GAPP) होना चाहिए यानि गरीबी निवारण एवं शांति स्थापना के लिए “विश्वव्यापी समझौते का प्रस्ताव” को रखकर अपनाने के लिए उन्हें प्रेरित किया जाए, जिस तरह अमेरिका दुनिया भर के विकसित नागरिकों का प्रवक्ता बन गया, उसी प्रकार भारत की संसद एवं भारत अब दुनिया भर के गरीबों एवं अविकसित नागरिकों की आवाज बने*।

*अतः भारत में मानवीय संकट को देखते हुए याचिका के माध्यम से अपील की गई है कि भारत संघ में विधायकों सांसदों को अमूल्य मत देकर मतदाता विधायक एवं सांसद बनाता है और वही गरीबी बेरोजगारी आर्थिक तंगी से बेमौत मरता है और जीवन में कुछ नहीं पाता है*।
*जबकि विधायक एवं सांसद आजीवन सरकारी खजाने से वेतन भत्ता तथा पेंशन पाता है* ।
*इसलिए ग्राम सभा चुनाव से लेकर विधानसभा एवं लोकसभा के चुनाव में मतदान का अधिकार रखने वाले भारत संघ के सभी मतदाताओं को सांसदों – विधायकों की तरह इस याचिका में “वोटरशिप या मतदातावृत्ति” के नाम से परिभाषित जन्म के आधार पर वोटर पेंशन का वित्तीय अधिकार देकर लोकतंत्र को और अधिक न्याय प्रिय ढांचा विकसित करने, जन्म के आधार पर बढ़ते जा रहे आर्थिक भेदभाव पर अंकुश लगाने, न्यूनतम आर्थिक समता कायम करने एवं भारत संघ के सभी मतदाताओं की नियमित रूप से न्यूनतम आमदनी का जरिया सुनिश्चित करने, गरीब परिवारों द्वारा बच्चों की शादी- विवाह को संभव बनाने, मानवीय गरिमा व सुरक्षा के साथ जीवन जी पाने और आर्थिक समृद्धि के इस युग में भी आर्थिक तंगी के कारण हो रही आत्महत्याओं की दुर्घटनाओं को रोकने हेतु भारत की आर्थिक समृद्धि में देश के मतदाताओं को देश की सामूहिक औसत आय (सकल घरेलू उत्पाद) का आधा हिस्सा महंगाई भत्ता सहित वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार लगभग ₹8000/- मासिक “मतदातावृत्ति कानून” बनाकर भ्रष्टाचार मुक्त बिना भी किसी बिचौलिए के सीधे प्रत्येक मतदाता का बैंक में खाता खोलकर एटीएम कार्ड द्वारा मतदातावृत्ति (वोटर पेंशन) दिये जाने हेतु याचिका प्रेषित की गई है*।
*मतदातावृत्ति याचिका भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के अध्यक्ष श्री एम वेंकैया नायडू, भारत सरकार के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्री श्री किरण रिजिजू, लोकसभा के महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह एवं राज्यसभा के महासचिव श्री देश दीपक वर्मा जी को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है*।
*भवतु सब्ब मंगलं* 🌷🌷🌷🌷🌷
*अभय रत्न बौद्ध* ✍️
*राष्ट्रीय सन्ववयक एवं संगठक*
*9वीं राष्ट्रीय बौद्ध धम्म संसद बुध्दगया एवं*
बौद्ध संगठनों की राष्ट्रीय समन्वय समिति, भारत
*केंद्रीय कार्यालय*: बुध्द कुटीर, 284 /सी- 1, स्ट्रीट नंबर – 8,नेहरू नगर,
नई दिल्ली -110008
*मुख्यालय*: महाबोधि मेडिटेशन सेंटर, बुध्दगया, जिला, गया-824231(बिहार)
M:09899853744
*Email* : argautam48@gmail.com
👉 *जनहित में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और अपने संगठन के माध्यम से अपने क्षेत्र के संसद सदस्य एवं विधायक से वोटर पेंशन की मांग रखें और वोटरशिप (वोटर पेंशन) को “मतदाता का वित्तीय अधिकार” बनाए जाने के लिए जन आंदोलन चलाएं*।
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